नई दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय के 80 वर्ष पूरे होने पर सम्मान समारोह; राजनाथ सिंह और भूपेंद्र यादव ने पत्रकारिता में उनके योगदान को रेखांकित किया, ‘अस्सी के राय साहब’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण
नई दिल्ली, 26 सितंबर। भारतीय पत्रकारिता जगत के पुरोधा, प्रज्ञा संस्थान के संस्थापक न्यासी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष रामबहादुर राय जी के जीवन के 80 वर्ष पूर्ण होने पर एक गरिमामयी और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के कई दिग्गज राजनेताओं और वरिष्ठ पत्रकारों ने उनकी निष्कलंक पत्रकारिता और वैचारिक दृढ़ता को नमन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, SGT यूनिवर्सिटी के प्रबंध न्यासी मनमोहन चावला और प्रज्ञा संस्थान के सचिव राकेश सिंह ने आदरणीय राय साहब का शॉल ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। इस खास मौके पर उनके जीवन और कृतित्व पर आधारित पुस्तक ‘अस्सी के राय साहब’ का औपचारिक लोकार्पण केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वरिष्ठ पत्रकार बनवारी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
“राय साहब अदम्य निष्ठा के साथ खड़े पत्रकारिता के पर्वत हैं”
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रामबहादुर राय के व्यक्तित्व की तुलना कबीर और भारतेन्दु हरिश्चंद्र से की। उन्होंने कहा कि राय साहब ने पत्रकारिता की चादर को कबीर की तरह बेदाग निभाया है, अपनी बात बेबाकी से कहने की ताकत को तुलसीदास की तरह चरितार्थ किया है और हिंदी भाषा व संस्कृति को भारतेन्दु हरिश्चंद्र की तरह आगे बढ़ाया है।

उन्होंने आगे कहा, “राय साहब शब्दों के सच्चे साधक हैं। उनके लिए पत्रकारिता कोई व्यवसाय नहीं बल्कि लोकसेवा का एक पवित्र अवसर है। उनका पूरा जीवन व्यवस्था परिवर्तन और समाज के मार्गदर्शन को समर्पित रहा है।” राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में जहां पत्रकारिता को केवल एक पेशा मान लिया गया है, वहीं राय साहब ने हमेशा कलम के प्रति पूरी ईमानदारी बनाए रखी। उन्होंने कहा कि उनके पास संसद और सत्ता के गलियारों तक पहुँचने के दूसरे विकल्प भी थे, लेकिन उन्होंने पत्रकारिता की इस कठिन पाठशाला में ‘अ’ से ‘ज्ञ’ तक का सफर तय किया। उनकी निर्भीक पत्रकारिता कई बार सत्ता के करीबियों या अपने लोगों के खिलाफ भी पूरी मजबूती से खड़ी नजर आती है, जिससे समय-समय पर विपक्षियों और वैचारिक विरोधियों को भी एक नया साहस मिला।
“सत्य के पक्ष में खड़े रहने वाले धरातल के पत्रकार”
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि रामबहादुर राय वातानुकूलित कमरों में बैठकर लिखने वाले नहीं, बल्कि जमीन के संघर्षों को अपनी कलम से जीवंत करने वाले पत्रकार हैं। उन्होंने हमेशा सत्ता या दबाव के आगे झुकने के बजाय ‘सत्य’ का साथ दिया है और पत्रकारिता के जरिए लगातार बुनियादी और तीखे सवाल पूछे हैं।
लोकार्पण भाषण में पीएम मोदी का जिक्र

पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा रामबहादुर राय के उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया. राय साहब ने अपने भाषण में कहा कि – मैं अपनी बात समाप्त करने से पहले यह कहना चाहता हूं कि आज भारत मोदी मार्ग पर है, गांधी मार्ग से स्वाधीनता संग्राम की यात्रा शुरू हुई. मोदी मार्ग और गांधी मार्ग जहां मिलते हैं और जो मिलाता है, उनका 110वां जन्मदिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय का आज है.
“जिनमें साहबी नहीं, वह राय साहब हैं”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि रामबहादुर राय ‘आत्मवंचना’ (खुद से ईमानदारी) के लिए जाने जाते हैं। भारतीय संस्कृति में शील, निष्ठा और विनय ही जीवन का मूल हैं और राय साहब इन्हीं संस्कारों के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि मूल रूप से वह एक राजनीतिक समझ रखने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन पत्रकार के रूप में उन्होंने हमेशा पत्रकारीय मर्यादाओं और लक्ष्मण रेखा का पूरी निष्ठा से पालन किया है। उन्होंने बहुत ही सारगर्भित अंदाज में कहा- “जिनमें किसी तरह की ‘साहबी’ या अहंकार नहीं होता, वही असल मायनों में ‘राय साहब’ हैं।”
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