साधु यादव बोले-संजय यादव को राज्यसभा भेजना गलत फैसला, रोहिणी आचार्य को करेंगे पूरा सहयोग; बिहार सरकार के पास खजाना नहीं, केंद्र से भी नहीं मिल रही मदद
FreelancerPost.com | विशेष राजनीतिक साक्षात्कार
बिहार की सियासत में इन दिनों राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में संभावित बदलाव, रोहिणी आचार्य की राजनीतिक भूमिका और जनता दल यूनाइटेड (JDU) में टूट की अटकलों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। क्या आरजेडी में नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है? क्या रोहिणी आचार्य को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है? क्या जेडीयू में किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की आहट है? और क्या बिहार की मौजूदा सरकार आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रही है?
इन तमाम सवालों पर बिहार के वरिष्ठ नेता साधु यादव से FreelancerPost.com के संपादक योगेश चक्रवर्ती ने विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने तेजस्वी यादव के नेतृत्व, रोहिणी आचार्य की राजनीतिक क्षमता, संजय यादव को राज्यसभा भेजने के फैसले, बिहार में अपराध, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति पर खुलकर अपनी राय रखी।
साधु यादव ने दावा किया कि बिहार की जनता रोहिणी आचार्य को बड़ी जिम्मेदारी में देखना चाहती है। उन्होंने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने के तीन मौके मिले, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। वहीं, संजय यादव को राज्यसभा भेजने के फैसले को उन्होंने गलत बताया। हालांकि, आरजेडी में संभावित बदलाव को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
पेश है साधु यादव से बातचीत के प्रमुख अंश।
विशेष साक्षात्कार: साधु यादव से सवाल-जवाब
सवाल: साधु जी, FreelancerPost.com में आपका बहुत-बहुत स्वागत है।
साधु यादव: बहुत-बहुत धन्यवाद आपका।
सवाल: बिहार की सियासत में इन दिनों चर्चा है कि जल्द ही आरजेडी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, जेडीयू में टूट की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। आप पुराने नेता हैं। इन चर्चाओं पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
साधु यादव: देखिए, किसी दूसरी पार्टी के बारे में बोलना मेरे हिसाब से उचित नहीं है। हर पार्टी का अपना संविधान और अपने अधिकार होते हैं। पार्टी के भीतर लोग अपनी बात रखते हैं, लेकिन हर संगठन का एक अनुशासन भी होता है, जिसका पालन किया जाता है।
हालांकि, बिहार में अभी जो कुछ चल रहा है, उस पर आपके सवाल के संदर्भ में बात कर सकता हूं। आज बिहार सरकार पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। आप वित्त विभाग से इसकी जानकारी मांग लीजिए, मिल जाएगी। बिहार सरकार आर्थिक दबाव में है और खजाने की स्थिति भी ठीक नहीं है। केंद्र सरकार की आर्थिक स्थिति भी अलग नहीं है।
बिहार को केंद्र सरकार से पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। मुख्यमंत्री कई बार दिल्ली गए और लौटकर आए, लेकिन अभी तक उसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। फिलहाल हम यही स्थिति देख रहे हैं।
सवाल: आरजेडी में जल्द ही बड़े बदलाव की खबरें चल रही हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
साधु यादव: आरजेडी में बदलाव से क्या फर्क पड़ने वाला है? अभी एमएलसी चुनाव से कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता। असली फर्क विधानसभा और लोकसभा के चुनाव से पड़ता है। एमएलसी चुनाव ऐसा नहीं है कि उससे बहुत बड़ा राजनीतिक बदलाव हो जाएगा।
सवाल: कहा जा रहा है कि आरजेडी खुद को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है और इसमें साधु यादव की भी बड़ी भूमिका हो सकती है।
साधु यादव: आरजेडी की बात करें तो लालू यादव, साधु यादव और पुराने साथियों ने मिलकर इस पार्टी को सींचा था। मैं आपको एक हकीकत बताता हूं। जब शरद यादव ने पार्टी तोड़ी थी, तब लालू जी ने मुझे रात एक बजे फोन किया था।
उस समय मैं पटना में नहीं था। गोपालगंज में एक शादी समारोह में गया हुआ था। उस दौर में मोबाइल फोन का चलन नहीं था और मेरे घर में लैंडलाइन भी नहीं थी। हमारा घर सालार में था, वहां फोन की सुविधा नहीं थी।
मुझे गोपालगंज में सूचना मिली। उस समय वहां एसपी मीना जी थे, जो शायद आजकल झारखंड में हैं। उन्होंने स्थानीय थाने के एक इंस्पेक्टर को भेजा। इंस्पेक्टर ने मुझसे कहा कि बड़े साहब आपसे बात करना चाहते हैं। मैंने पूछा कि क्या वे पटना आ गए हैं? उन्होंने बताया कि नहीं, दिल्ली से फोन आया है।
इसके बाद मैं एसपी कोठी पहुंचा और बातचीत हुई। लालू जी ने कहा कि कमल पासवान को पकड़ना है। उस समय कमल पासवान पटना में नहीं थे और प्रदेश अध्यक्ष थे। मैंने उन्हें पूसा में रात करीब तीन बजे पकड़ा और फिर पटना लेकर आया। इसके बाद दिल्ली चलने की बात हुई।
हमने यहां से एयर इंडिया का विमान बुक किया। उसमें विधायक और मंत्री समेत करीब 300 लोग बैठकर दिल्ली गए। दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित बिहार भवन में बैठकर पार्टी के गठन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
मैं आपको इसलिए बता रहा हूं कि पार्टी को खड़ा करने में हमारा भी योगदान रहा है। हमने इसे सींचा है।
लेकिन 2009 के बाद से मैं पार्टी में सक्रिय रूप से नहीं हूं। तब से देख रहा हूं कि पार्टी की स्थिति विचित्र रही है। लोग आए, लेकिन सत्ता हासिल करने की दिशा में वैसी गंभीरता नहीं दिखाई। पार्टी अपने हाथ में सत्ता नहीं ला सकी। इससे अफसोस और तकलीफ होती है।
तेजस्वी यादव को जनता ने मुख्यमंत्री बनने के तीन मौके दिए, लेकिन तीनों बार वे सफल नहीं हो सके। अब जनता, समाज, बिहार के गरीब, किसान और मजदूर उम्मीद लगाए बैठे हैं। आखिर जनता कितनी बार परीक्षा देगी?
इसलिए हम चाहते हैं कि पार्टी अपने विचार और सिद्धांतों में बदलाव करे। नेता वही रहें, लेकिन काम ऐसा करें जो बिहार के हित में हो।
मैं बार-बार कहता हूं कि बिहार में बाहर के लोगों के भरोसे कुछ नहीं होने वाला। आज इंटरनेट, कंप्यूटर और एआई का युग है। आईटी के युवा काम कर रहे हैं। यह सब देखने और सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन असली बात यह है कि गांव का मतदाता आपके साथ जुड़ा है या नहीं।
जब तक गांव-गांव और बूथ-दर-बूथ संगठन मजबूत नहीं होगा, तब तक आईटी और सोशल मीडिया के सहारे राजनीति करने वाले सफल नहीं हो पाएंगे। यही मेरी बात है। बाकी किसी बदलाव को लेकर मेरे पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

सवाल: आपने बड़ी बात कही कि बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव को तीन बार मौका दिया, लेकिन वे हर बार पिछड़ गए। अब चर्चा है कि रोहिणी आचार्य को पार्टी की कमान मिल सकती है और इसमें आपकी बड़ी भूमिका होगी।
साधु यादव: मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं उतना ही बोलता हूं, जितना जानता हूं।
हां, मुझे इतना जरूर मालूम है कि रोहिणी लोकसभा का चुनाव लड़ेंगी। इस बात से मैं इनकार नहीं कर सकता, क्योंकि मुझे इसकी जानकारी है। उन्हें आठ हजार वोटों से हराया गया था। वह हारी नहीं थीं, उन्हें हराया गया था।
वह मेरी भगिनी हैं। उनका मनोबल दिन-दूना, रात-चौगुना बढ़ाना है। इस बार वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगी और जीतकर जाएंगी। यह पूरे बिहार के लोग देखेंगे।
सवाल: रोहिणी आचार्य भारत से दूर सिंगापुर में रहकर भी इंटरनेट और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी बात रखती हैं। उनकी बातों का असर भी दिखाई देता है। इस पर आपका क्या कहना है?
साधु यादव: बिल्कुल। वह सिंगापुर में रहकर भी अपनी बात बहुत दमदार तरीके से रखती हैं। वहां से भी अपनी बात बिहार की जनता तक पहुंचा देती हैं।
सवाल: जो काम रोहिणी आचार्य कर लेती हैं, वह काम तेजस्वी यादव और उनकी टीम नहीं कर पाती। क्या आप इससे सहमत हैं?
साधु यादव: हां, वे नहीं कर पाते हैं। आपकी बात सही है। इसमें कोई दो राय नहीं है।
सवाल: क्या आपको लगता है कि अगर रोहिणी आचार्य आरजेडी की कमान संभालती हैं, तो वह पार्टी को बेहतर ढंग से चला सकती हैं? पार्टी में बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए क्या यह बेहतर फैसला होगा?
साधु यादव: बिल्कुल, आप सही कह रहे हैं। मैं इस भावना का सम्मान करता हूं और इससे सहमत हूं। लेकिन फैसला तो हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को करना है। उनका क्या विचार है, यह मैं नहीं जानता।
आपने जो कहा और मीडिया में जो बातें सामने आ रही हैं, वही हम सुन रहे हैं। मुझे वास्तविक स्थिति की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि पार्टी में क्या हो रहा है और आगे क्या होगा।
लेकिन यह जरूर है कि जनता में आवाज उठ रही है। लोग इस बात को समझ रहे हैं कि अगर रोहिणी आचार्य आ जाती हैं, तो बिहार में आरजेडी को चार चांद लग सकते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है।
सवाल: क्या आपको लगता है कि रोहिणी आचार्य जनता की आवाज और उसकी भावनाओं को समझने के साथ-साथ उसका राजनीतिक लाभ भी उठा पाएंगी?
साधु यादव: बिल्कुल। उनमें क्षमता है। वह जिस भाव से जनता से मिलती हैं, उससे लोग खुश होते हैं। जनता के साथ उनका मेल-जोल अच्छा है।
सवाल: आपने बाहरी लोगों का जिक्र किया। रोहिणी आचार्य ने भी संजय यादव और रमीज जैसे लोगों पर आरोप लगाए थे। क्या आपको लगता है कि संजय यादव की वजह से आरजेडी की यह स्थिति हुई है?
साधु यादव: बिल्कुल। तीन बार तेजस्वी यादव असफल हुए हैं। इसके पीछे संजय यादव की भूमिका भी है। तेजस्वी उसी की वजह से असफल हो रहे हैं।
सवाल: संजय यादव को राज्यसभा भेजने के फैसले को आप किस तरह देखते हैं?
साधु यादव: यह गलत फैसला हुआ है। उन्हें राज्यसभा नहीं भेजना चाहिए था। अगर भेज भी दिया गया, तो यह गलत काम किया गया।
अगर यादव को ही राज्यसभा भेजना था, तो बिहार के किसी यादव को भेज देते। बिहार में एक से बढ़कर एक पढ़े-लिखे और विद्वान यादव नेता हैं, जो राज्यसभा जाने के योग्य हैं। किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति को भेजकर गलत फैसला किया गया।
सवाल: मैंने खुद कई बार आपको रोहिणी आचार्य से बात करते देखा है। अगर रोहिणी आचार्य आरजेडी की कमान संभालती हैं, तो क्या इसमें आपकी भूमिका भी बड़ी होगी?
साधु यादव: बिल्कुल, बिल्कुल। मेरी भूमिका रहेगी। मैं अपनी तरफ से उन्हें पूरा सहयोग करूंगा।

सवाल: आपने कहा कि बिहार का खजाना खाली है और केंद्र सरकार की ओर से भी पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। ऐसे में बहुत सारे ठेकेदारों का पैसा फंसा हुआ है। इस स्थिति को आप किस तरह देखते हैं?
साधु यादव: भुगतान नहीं हो रहा है। यह बात सही है। बहुत सारे ठेकेदार परेशान होकर सड़कों पर भटक रहे हैं।
मैंने सुना है कि सरकार ने हाल में इस तरह का कोई नोटिफिकेशन जारी किया था कि दो-तीन लाख रुपये तक का भुगतान हो सकता है, लेकिन जिनका दो-तीन करोड़ रुपये या उससे अधिक बकाया है, उनका भुगतान नहीं हो रहा है।
बड़े ठेकेदारों ने दस करोड़, पंद्रह करोड़ और बीस करोड़ रुपये तक के ठेके लेकर काम कराया है, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है।
सवाल: बिहार सरकार लगातार बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रही है। चार टाउनशिप प्रोजेक्ट लाने की भी घोषणा की गई है। क्या आपको लगता है कि ये घोषणाएं जनता को गुमराह करने का तरीका हैं?
साधु यादव: जनता को आश्वासन दिया जा रहा है कि हम यह करेंगे, वह करेंगे। लोगों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि आप इत्मीनान रखिए, जो हम कह रहे हैं, वह करेंगे।
लेकिन अभी तो सिर्फ दिलासा देने की बातें हो रही हैं।
सवाल: बिहार में अपराध की घटनाएं लगातार चर्चा में रहती हैं। नीतीश कुमार के शासन को सुशासन कहा जाता रहा है। आप इस स्थिति को कैसे देखते हैं?
साधु यादव: देखिए, नीतीश कुमार के समय में भी अपराध होते रहे हैं। इसके लिए पुराने आंकड़े निकालिए, बीच के समय के आंकड़े देखिए और फिर तीसरे दौर के आंकड़ों से तुलना कीजिए। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी सरकार में कितनी घटनाएं हुईं।
आंकड़े निकालिए, फिर बैठकर बहस कीजिए। हम भी इस पर बात करेंगे।
सवाल: अपराध के मुद्दे पर साधु यादव की छवि को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं और आरोप लगते रहे हैं। आपको व्यक्तिगत रूप से भी इस मामले में काफी निशाना बनाया गया। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
साधु यादव: देखिए, मैं बार-बार किसी बात पर सफाई नहीं देता हूं। सफाई देना भी जरूरी नहीं समझता। लेकिन इतना जरूर है कि मीडिया में कुछ लोग, जो हमारे विरोधी हैं, उन्होंने गलत प्रचार किया। इसके चलते आज हमें उसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हमने बहुत कुछ झेला है। यह बात सच है।
लेकिन गलत गलत है और सही सही है। जब हम सही हैं, तो आप लाख कोशिश कर लीजिए, हम पर दाग लगाने में सफल नहीं हो पाएंगे। हम अपने स्तर पर मजबूत हैं।
किसी के गलत आरोप लगाने या झूठा प्रचार करने से सच्चाई नहीं बदल जाती।
सवाल: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपराध नियंत्रण को लेकर कई तरह के दावे कर रहे हैं। बुलडोजर कार्रवाई से लेकर एआई के इस्तेमाल तक की बातें कही गई हैं। लेकिन अपराध की घटनाओं को लेकर सवाल उठते रहते हैं। आप क्या कहेंगे?
साधु यादव: परसों भी यही सवाल उठा था। उस समय हमने कहा था कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में महिला सिपाहियों की बहाली की गई। महिला सिपाहियों को चौराहों पर वर्दी पहनाकर और राइफल देकर खड़ा कर दिया गया है।
जबकि मेरी राय में महिला सिपाहियों की तैनाती के लिए दूसरी जगहें भी हो सकती हैं। उन्हें कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों में लगाया जा सकता है। पढ़ी-लिखी महिलाएं डॉक्टर बन सकती हैं, यूपीएससी की परीक्षा पास करके आईपीएस या आईएएस बन सकती हैं।
लेकिन यहां मूल सवाल पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनकी तैनाती का है। अपराधियों को पकड़ने और अपराध नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की जरूरत के अनुसार तैनाती होनी चाहिए।
मान लीजिए, किसी महिला ने अपराध किया है, तो महिला पुलिसकर्मी उसे पकड़ सकती है। इसी तरह पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती कानून, जरूरत और परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए।
33 प्रतिशत आरक्षण के तहत बड़ी संख्या में महिला सिपाहियों की भर्ती हुई है। आजकल पटना में कई जगह महिला सिपाही दिखाई देती हैं। होमगार्ड में भी महिलाएं तैनात हो रही हैं। सुरक्षा के लिए कर्मियों की मांग करने वाले कुछ लोग भी कहते हैं कि महिला कर्मियों को उनके यहां तैनात नहीं किया जाए।
मेरा मानना है कि सिपाही स्तर पर महिलाओं की इतनी बड़ी संख्या में भर्ती और तैनाती को लेकर सरकार से गलती हुई है। हालांकि, शिक्षा समेत दूसरे क्षेत्रों में महिलाओं को आगे बढ़ाने में कोई बुराई नहीं है। इससे महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और अवसर मिलते हैं।
लेकिन पुलिस की ड्यूटी और तैनाती का फैसला जरूरत और काम की प्रकृति को ध्यान में रखकर होना चाहिए। यही मेरा कहना है।
सवाल: क्या आपको लगता है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बिहार को ठीक से संभाल नहीं पा रहे हैं?
साधु यादव: नहीं, सम्राट चौधरी संभाल रहे हैं। देखिए, दोष व्यवस्था में है। सम्राट मेरे छोटे भाई की तरह रहे हैं।

मैंने ही उनसे कहा था कि भाजपा में मुझे तुमसे ज्यादा कद्दावर नेता नजर नहीं आ रहा है। दूसरे नेताओं में कुछ न कुछ कमी या अड़चन दिखाई देती है, लेकिन तुम्हारे साथ समाज के लोग भी जुड़े हुए हैं। इसलिए तुम मुख्यमंत्री बनोगे।
यह बात मैंने पहले कही थी। देखिए, संयोग से वे पार्टी के अध्यक्ष बने, फिर विधायक दल के नेता बने। इससे पहले विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहे और फिर चुनाव लड़कर जीते। इसमें कोई दो राय नहीं है कि वे लंबे समय तक हमारे साथ रहे हैं।
इसलिए जो लोग उनके बारे में कहते हैं कि वे हमारे साथ रहे हैं, वे गलत नहीं कहते। वे सही बात कहते हैं।
अब उन्हें जिस परिस्थिति में बिहार मिला है, उसी परिस्थिति को वे देख रहे हैं। केंद्र सरकार से अतिरिक्त मदद मिले, तभी वे कुछ बेहतर कर सकते हैं। लेकिन केंद्र से अभी पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है।
सवाल: जन सुराज के प्रशांत किशोर अक्सर कहते हैं कि मुख्यमंत्री सातवीं पास हैं और विपक्ष के नेता नौवीं पास हैं। इस तरह की टिप्पणियों पर आपकी क्या राय है?
साधु यादव: नहीं, नहीं। देखिए, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी भी पढ़े-लिखे हैं और तेजस्वी भी पढ़े-लिखे हैं। तेजस्वी दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) के विद्यार्थी रहे हैं।
आप उनसे जिस भाषा में बात करना चाहें, वे उस भाषा में बात कर सकते हैं। पढ़ा-लिखा व्यक्ति अलग-अलग भाषाओं में बात कर सकता है, जबकि बिना पढ़ाई के यह मुश्किल हो सकता है।
डिग्री और प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी व्यावहारिक ज्ञान है। बहुत से लोगों के पास फर्जी डिग्रियां होती हैं और वे एक लाइन भी ठीक से नहीं बोल पाते। इसलिए केवल डिग्री के आधार पर किसी की क्षमता का आकलन नहीं करना चाहिए।
सवाल: एक ओर सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता पर चर्चा होती है, दूसरी ओर तेजस्वी यादव की पढ़ाई को लेकर सवाल उठते हैं। नीतीश कुमार के बेटे निशांत की शिक्षा को लेकर भी बातें होती रही हैं। ऐसे में क्या आप रोहिणी आचार्य को इन सबसे बेहतर मानते हैं?
साधु यादव: नीतीश जी के बेटे ने कहां पढ़ाई की है, यह भी मैं जानता हूं। लालू जी ने उनका दाखिला रांची के बीआईटी मेसरा में कराया था। वह भी वहां से पढ़ाई छोड़कर चले गए थे।
रोहिणी आचार्य तो एमबीबीएस डॉक्टर हैं। वह पढ़ी-लिखी हैं। उनके पास एमबीबीएस की डिग्री है। शिक्षा के दृष्टिकोण से उनमें कोई कमी नहीं है। वह हर दृष्टिकोण से सक्षम हैं।
सवाल: जेडीयू में टूट की खबरें भी सामने आ रही हैं। क्या आपको लगता है कि इससे आरजेडी के लिए नई राजनीतिक संभावनाएं बन सकती हैं?
साधु यादव: देखिए, मैं आपको स्पष्ट बता देता हूं। नीतीश कुमार हमारे साथ रहे हैं। लालू जी ने हमेशा उन्हें छोटे भाई की तरह रखा है। आज नीतीश कुमार जिस मुकाम पर हैं, उसमें लालू यादव का भी बड़ा योगदान रहा है।
विश्वनाथ सिंह के मंत्रिमंडल में पहली बार कृषि मंत्री बनाने में लालू प्रसाद यादव की भूमिका रही थी। जब नीतीश कुमार पहली बार बाढ़ से चुनाव जीतकर गए थे, तब उन्हें देवीलाल के समय कृषि राज्य मंत्री का पद मिला था। लालू जी ने ही उन्हें आगे बढ़ाया था।
लालू जी ने नीतीश कुमार को सींचा है। दोनों एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। लेकिन बाद के समय में उनके बीच दूरियां कैसे आईं, यह नीतीश कुमार ही बता सकते हैं। उनसे पूछिए।
हम लोग उनके साथ 24 घंटे रहते थे। ललन सिंह भी साथ रहे हैं। लालू यादव ने नीतीश कुमार को आगे बढ़ाया और नीतीश कुमार ने भी ललन सिंह को आगे बढ़ाया। लेकिन बाद में परिस्थितियां कैसे बदलीं, यह वही लोग बेहतर बता सकते हैं।
सवाल: मेरा सवाल यह है कि क्या आपको लगता है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में आरजेडी और रोहिणी आचार्य के लिए बेहतर माहौल बन रहा है?
साधु यादव: इस पर मैं कुछ ज्यादा नहीं बोलूंगा। देखिए, बिहार के लोग चाहते हैं कि रोहिणी आचार्य को जिम्मेदारी मिले। यह बिहार की जनता की हार्दिक इच्छा है।

लेकिन जिम्मेदारी किसे देनी है, यह उनके पिता लालू प्रसाद यादव को तय करना है। वे क्या सोचते हैं और क्या फैसला लेते हैं, यह मैं कैसे बता सकता हूं? इतना जरूर है कि अगर रोहिणी आचार्य को जिम्मेदारी मिलती है, तो मैं उनका साथ दूंगा।
निष्कर्ष: रोहिणी आचार्य को लेकर उम्मीद, आरजेडी के फैसले पर नजर
साधु यादव के इस साक्षात्कार में आरजेडी के नेतृत्व, तेजस्वी यादव की राजनीतिक रणनीति और रोहिणी आचार्य की संभावित भूमिका को लेकर उनकी राय प्रमुखता से सामने आई। उन्होंने रोहिणी आचार्य की राजनीतिक संवाद क्षमता और शैक्षणिक योग्यता की सराहना की तथा पार्टी में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की मांग का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम फैसला लालू प्रसाद यादव को करना है और उन्हें पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
साक्षात्कार के दौरान साधु यादव ने संजय यादव को राज्यसभा भेजने के फैसले की आलोचना की, बिहार की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई और अपराध नियंत्रण के लिए मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर उन्होंने कहा कि उनके सामने मौजूद चुनौतियों को समझना जरूरी है और केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता मिलनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या आरजेडी में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव होगा? क्या रोहिणी आचार्य को पार्टी में नई जिम्मेदारी मिलेगी? और क्या बिहार की राजनीति में इन अटकलों का कोई ठोस नतीजा निकलेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में पार्टी के फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों से ही मिलेंगे।
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