पत्नी ने 31 वर्षीय पति को किडनी दान की; एम्स पटना में हुआ 15वां प्रत्यारोपण, इलाज पर आया करीब 3 लाख रुपये का खर्च
पटना, 21 अक्टूबर 2026। एम्स पटना में आयुष्मान भारत योजना के तहत पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। दरभंगा जिले के पचगछिया निवासी 31 वर्षीय मरीज को सफल प्रत्यारोपण के बाद बुधवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मरीज की 24 वर्षीय पत्नी ने उन्हें अपनी किडनी दान की। संस्थान के अनुसार, यह एम्स पटना में किया गया 15वां किडनी ट्रांसप्लांट है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा का लाभ मिलने से बिहार के आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए महंगे इलाज तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। किडनी ट्रांसप्लांट में होने वाला खर्च कई जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत इस सुविधा का उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गरीब मरीजों के लिए राहत की उम्मीद
एम्स पटना के निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा बिहार के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है। इससे आर्थिक कठिनाइयों के कारण किडनी प्रत्यारोपण नहीं करा पाने वाले मरीजों को राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी समन्वय का उदाहरण है।
ट्रांसप्लांट के बाद एक साल तक दवाइयों का प्रावधान
एम्स पटना के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अमरेश कृष्ण ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों को प्रत्यारोपण के बाद एक वर्ष तक आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद होने वाली संभावित जटिलताओं के उपचार की सुविधा भी योजना के अंतर्गत उपलब्ध है। इससे मरीजों को ऑपरेशन के बाद जरूरी दवाइयां और चिकित्सा देखभाल प्राप्त करने में मदद मिलती है।
करीब 3 लाख रुपये का आया खर्च
एम्स पटना के यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश गुंजन ने बताया कि इस किडनी ट्रांसप्लांट पर लगभग तीन लाख रुपये का खर्च आया।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत यह सुविधा उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल और महंगी चिकित्सा सेवा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम रही मौजूद
इस अवसर पर एम्स पटना के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, नेफ्रोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मेघा सहगल, यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. विपिन चंद्र, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. साकेत सिंह और डॉ. नवीन कुमार उपस्थित थे।

इसके अलावा एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) निशांत सहाय, प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार, अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अभ्युदय कुमार और डॉ. नीरज कुमार सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी भी मौजूद रहे।
मरीज ने जताया आभार
अस्पताल से छुट्टी मिलने पर मरीज ने एम्स पटना के निदेशक, संबंधित चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और आयुष्मान भारत योजना के प्रति आभार व्यक्त किया। मरीज ने कहा कि योजना की मदद से उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल और महंगी चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता मिली।
एम्स पटना में आयुष्मान भारत योजना के तहत पहले किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता से बिहार में जरूरतमंद मरीजों के लिए उन्नत किडनी उपचार और प्रत्यारोपण सेवाओं की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। यह उपलब्धि संस्थान की चिकित्सा टीम और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
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