योग का दार्शनिक पक्ष बहुत बड़ा है लेकिन जो अर्थ आम लोगों में प्रचलन में है, जो व्यवहारिक पक्ष है अर्थात आसन, प्राणायाम और ध्यान, वह भी इतने शक्तिशाली हैं कि मानव मात्र की सभी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। यह आसान और बिना कोई आर्थिक बोझ डाले मनुष्य को शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी संपूर्ण स्वस्थ बनाने की शक्ति रखता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य की जो परिभाषा दी है उसमें स्पष्ट कहा है कि ‘सिर्फ रोगों का अभाव होना ही स्वास्थ्य नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य पूर्ण शारिरिक, मानसिक और…