पटना। बिहार में BPSC और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों पर BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की विवादित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद अब सड़क पर पुलिस कार्रवाई और वाटर कैनन तक पहुंच गया है।
छात्रों के प्रदर्शन को लेकर BPSC अधिकारी की ओर से की गई टिप्पणी पर सरकार ने कार्रवाई करते हुए राजेश कुमार सिंह को निलंबित करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद अभ्यर्थियों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और 25 अगस्त को पटना में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर गए। गांधी मैदान से निकला मार्च डाकबंगला चौक तक पहुंचा, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस कार्रवाई और हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई।
BPSC अधिकारी की एक टिप्पणी ने क्यों बढ़ा दिया विवाद?
BPSC परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने अभ्यर्थियों के आंदोलन से जुड़े सवाल पर प्रेस से बातचीत के दौरान कहा था- “हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार।”
यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई जब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी BPSC और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। छात्रों ने इस टिप्पणी को अपमानजनक माना और राजनीतिक दलों तथा छात्र संगठनों ने भी इसका विरोध किया।
बयान पर विवाद बढ़ने के बाद राजेश कुमार सिंह ने अपने बयान पर खेद जताया। इसके बाद बिहार सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके निलंबन की कार्रवाई की।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BPSC जैसी संस्था से जुड़े अधिकारी सीधे उन अभ्यर्थियों की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े होते हैं, जिनके लिए सरकारी नौकरी उनके भविष्य और वर्षों की तैयारी का सवाल होती है।

अधिकारी निलंबित हुए, लेकिन छात्रों का गुस्सा नहीं थमा
सरकार की कार्रवाई के बावजूद अभ्यर्थियों की कई मांगें कायम रहीं। छात्रों का कहना है कि विवाद सिर्फ एक अधिकारी के बयान का नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों का है।
TRE-4 को लेकर अभ्यर्थी परीक्षा को एक चरण में कराने, निगेटिव मार्किंग सहित परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि इन मांगों पर अब तक संतोषजनक समाधान नहीं निकला है।
यही वजह है कि छात्रों ने मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मार्च का फैसला किया।
गांधी मैदान से निकला मार्च, डाकबंगला पर बढ़ा तनाव
छात्र युवा संघर्ष मोर्चा के अनुसार, अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान के रामगुलाम चौक से मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए मार्च निकाला। मार्च मौर्या होटल के पास पहुंचा, जहां पुलिस की बैरिकेडिंग के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करते हुए डाकबंगला चौक पहुंचे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की और इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज की भी खबर सामने आई। कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
PMCH पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, बोले- छात्रों पर कार्रवाई शर्मनाक
पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों से मिलने बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) पहुंचे। उन्होंने घायल अभ्यर्थियों का हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।

राजेश कुमार ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को शर्मनाक और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकार और भविष्य से जुड़े सवाल उठाने वाले छात्रों की आवाज को लाठी और दमन के जरिए दबाने के बजाय सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि BPSC अभ्यर्थी रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता और बातचीत के जरिए करे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने घायल छात्रों के समुचित इलाज, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मांगों पर तत्काल बातचीत की मांग की।
उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “छात्र सवाल पूछें तो लाठी, हक मांगें तो दमन—क्या यही सम्राट का ‘सुशासन’ है?”
छात्र संगठनों ने भी सरकार को घेरा
छात्र युवा संघर्ष मोर्चा ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए गिरफ्तार छात्रों को तत्काल रिहा करने की मांग की है।
मोर्चा के मुताबिक प्रदर्शन में DYFI, AIYF, SFI, AISA, छात्र राजद, NSUI सहित विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता और BPSC अभ्यर्थी शामिल हुए।
छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से बातचीत करने के बजाय आंदोलन को प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए रोकने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़े जाने और पुलिस के साथ टकराव की भी रिपोर्ट सामने आई है। इसलिए पूरे घटनाक्रम को केवल एक पक्ष के दावे के आधार पर देखना उचित नहीं होगा।
TRE-4 की एकल परीक्षा और निगेटिव मार्किंग का मुद्दा बरकरार
छात्रों के आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा TRE-4 की परीक्षा प्रक्रिया है। अभ्यर्थी परीक्षा को एक चरण में कराने और निगेटिव मार्किंग को लेकर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा BPSC परीक्षाओं की पारदर्शिता, परीक्षा प्रक्रिया, भर्ती में देरी और अभ्यर्थियों की शिकायतों को लेकर भी असंतोष है।
यानी BPSC अधिकारी की विवादित टिप्पणी ने भले विवाद को अचानक तेज कर दिया हो, लेकिन छात्रों का आंदोलन केवल उस बयान के कारण नहीं है। इसके पीछे भर्ती और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई पुराने सवाल भी हैं।

सरकार ने हेल्पलाइन शुरू की, लेकिन क्या इससे आंदोलन थमेगा?
छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अभ्यर्थियों की शिकायतें सीधे सुनने के लिए 1100 हेल्पलाइन शुरू करने की घोषणा की है। सरकार की ओर से छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सहायता शिविर लगाने की बात भी कही गई है।
सरकार का यह कदम संवाद की दिशा में एक प्रयास माना जा सकता है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या हेल्पलाइन और सहायता शिविर छात्रों की उन मूल मांगों का समाधान कर पाएंगे, जिनको लेकर वे लगातार सड़क पर उतर रहे हैं?
असली सवाल: छात्रों को जवाब चाहिए, टिप्पणी नहीं
BPSC विवाद ने बिहार की परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवा वर्षों तक पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनके लिए परीक्षा की तारीख, पैटर्न, निगेटिव मार्किंग, भर्ती प्रक्रिया और परिणाम से जुड़ा हर फैसला उनके भविष्य पर सीधा असर डालता है।
ऐसे में किसी संवैधानिक भर्ती संस्था के जिम्मेदार अधिकारी की ओर से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के संदर्भ में ऐसी टिप्पणी विवाद पैदा करती है। सरकार ने अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करके तत्काल संदेश जरूर दिया है, लेकिन इससे छात्रों के मूल सवाल खत्म नहीं होते।
अब बिहार सरकार के सामने चुनौती सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नहीं है। चुनौती यह भी है कि BPSC और शिक्षक भर्ती से जुड़े विवादों का ऐसा समाधान निकले जिससे अभ्यर्थियों को परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा हो सके।
क्योंकि छात्रों के आंदोलन का सबसे बड़ा सवाल यही है-उन्हें विरोध करने के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ रही है, क्या उनकी बात परीक्षा केंद्र और बातचीत की मेज पर नहीं सुनी जा सकती?
ये भी पढ़ें:
बालेन्दु शर्मा दाधीच को मिलेगा राजभाषा गौरव सम्मान, गृहमंत्री अमित शाह करेंगे सम्मानित
