नई दिल्ली/मुंबई: सुविख्यात तकनीकविद बालेन्दु शर्मा दाधीच को केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रतिष्ठित ‘राजभाषा गौरव सम्मान’ (प्रथम पुरस्कार) से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। उन्हें यह पुरस्कार उनकी बहुचर्चित पुस्तक ‘यंत्रबुद्धि : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के लिए दिया जा रहा है। मुंबई में 14 सितंबर को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे।
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले बालेन्दु शर्मा दाधीच वर्तमान में दुबई की कंपनी ‘एल्गो टेक्नोलॉजीज़’ के CEO हैं। साथ ही वे भारत में एआई स्किलिंग को बढ़ावा देने वाले मंच ‘रिस्किल नेशन’ के संस्थापक (Founder) भी हैं। हाल ही तक वे माइक्रोसॉफ्ट में निदेशक के रूप में कार्यरत थे और वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

पिछले 25 वर्षों में बालेन्दु शर्मा दाधीच ने 15 से अधिक देशों में कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और व्याख्यानों के माध्यम से डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को सशक्त बनाया है। उनकी नवीनतम पहल ‘रिस्किल नेशन’ भारत के नागरिकों को एआई कौशल से लैस करने के एक जन-आंदोलन की तरह काम कर रही है।
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एआई और भाषा प्रौद्योगिकी के प्रमुख विचारक
बालेन्दु शर्मा दाधीच एआई और भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी विचारक माने जाते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित उनकी नवीनतम पुस्तक ‘यंत्रबुद्धि’ की काफी चर्चा हुई है। प्रौद्योगिकी के उभरते विषयों पर उनकी अब तक 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि विभिन्न विषयों पर उनकी कुल 10 से अधिक पुस्तकें आई हैं। पिछले ढाई दशकों में मुख्यधारा के प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में तकनीक विषय पर उनके लगभग 2,000 लेख प्रकाशित हो चुके हैं।

तकनीक और भाषा को सुलभ बनाना मुख्य उद्देश्य
बालेन्दु शर्मा दाधीच इसरो (ISRO), डीआरडीओ (DRDO), बार्क (BARC), इटली के ट्रिएस्टे स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स (ICTP) व पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों, फिक्की (FICCI) जैसे औद्योगिक संगठनों तथा इन्फोसिस, टीसीएस व विप्रो जैसी शीर्ष आईटी कंपनियों में 200 से अधिक कार्यशालाएँ आयोजित की हैं। उनका मुख्य उद्देश्य तकनीक को हर व्यक्ति के लिए सुलभ बनाना और भारतीय भाषाओं में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
माइक्रोसॉफ्ट एशिया में रहते हुए उन्होंने भाषाई तकनीक के अत्याधुनिक अनुप्रयोगों (Applications) के विकास का नेतृत्व किया था। बालेन्दु शर्मा दाधीच को अब तक दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त ‘आत्माराम पुरस्कार’ और मॉरीशस के प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया ‘वैश्विक भाषा सम्मान’ प्रमुख हैं। इस स्वर्णिम शृंखला में अब प्रतिष्ठित ‘राजभाषा गौरव सम्मान’ (प्रथम पुरस्कार) का नाम भी जुड़ने जा रहा है।
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राजभाषा गौरव सम्मान भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित ‘राजभाषा विभाग’ का एक अत्यंत प्रतिष्ठित और सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के नागरिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को हिंदी भाषा में ज्ञान-विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और मौलिक विषयों पर स्तरीय एवं गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें लिखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस योजना के तहत प्रतिवर्ष भारतीय नागरिकों द्वारा हिंदी में लिखी गई उत्कृष्ट पुस्तकों तथा केंद्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत मौलिक लेखन के लिए प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। यह सम्मान न केवल हिंदी भाषा के प्रसार और समृद्ध साहित्य को बढ़ावा देता है, बल्कि आधुनिक और तकनीकी विषयों को आम जनता के लिए अपनी भाषा में सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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