प्रयागराज। मंच पर बर्फीले पहाड़ों का दृश्य था…द्रौपदी गाथा… पांडव स्वर्ग की ओर बढ़ रहे थे और द्रौपदी धीरे-धीरे पीछे छूट रही थी। उसने उम्मीद से पीछे देखा, लेकिन कोई लौटकर नहीं आया। अकेली द्रौपदी के मन में उस पल उठे सवालों ने पूरे प्रेक्षागृह को भावुक कर दिया। ‘मैंने अपना जीवन किसके लिए जिया? जिनके लिए सब कुछ त्याग दिया, क्या उनके लिए मेरी कोई जगह नहीं थी?’ महाभारत के इसी मार्मिक प्रसंग को ‘द्रौपदी गाथा’ ने मंच पर जीवंत कर स्त्री के त्याग, संघर्ष, पहचान और आत्मसम्मान की कहानी को नई आवाज दी। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) के तीन दिवसीय त्रिवेणी कला उत्सव के दूसरे दिन मंगलवाल को सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में डॉ. संध्या शर्मा एवं सुनील मक्कड़ के निर्देशन में नाटक का भावपूर्ण मंचन हुआ।
स्वांग शैली में प्रस्तुत नाटक में पारंपरिक हरियाणवी लोकगीतों और सारंगी, नगाड़ा, ढोलक व हारमोनियम जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग कर नाटक में चार चांद लगा दिए। कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति से द्रौपदी के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया।
मंच पर राम प्रताप राजपूत, सुनील मक्कड़, दिनेश वशिष्ठ, कृष्ण एवं अर्जुन, रविंदर कुमार, राजबीर सिंह, कपिल, नरेश (क्लैरिनेट) और राजेश (कोरस) ने प्रभावशाली अभिनय एवं प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों के अभिनय, संवाद और लोक संगीत के बेहतर तालमेल ने दर्शकों को कथा से जोड़े रखा।

द्रौपदी के जन्म से लेकर मृत्यु तक की जीवन-यात्रा, उसके रिश्तों, संघर्ष, त्याग और आत्मसम्मान को विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत दर्शकों को भावुक कर दिया। नाटक में द्रौपदी को केवल रानी या पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि अपने सम्मान, पहचान और अस्तित्व के लिए सवाल उठाने वाली स्त्री के रूप में दिखाया गया। प्रस्तुति ने महाभारत की कथा को आज की स्त्री के जीवन से जोड़ते हुए स्त्री अस्मिता और आत्मसम्मान के सवालों को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, महेश जोशी, उपाध्यक्ष, हरियाणा कला परिषद एवं सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक द्वारा मुख्य अतिथि को पौधा व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

हरियाणवी लोक संस्कृति की दिखी झलक
वहीं इससे पहले सोमवार को शिव स्तुति की गूंज, हरियाणवी लोकगीतों की मिठास और घूमर-धमाल की थिरकन… सोमवार को सांस्कृतिक केंद्र का प्रेक्षागृह हरियाणवी लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। इस दौरान पुनीत राठा ने शिव स्तुति ‘तू राजा की राजदुलाली, मैं सिर्फ लंगोटे आला’ की प्रस्तुति से की। उनकी प्रस्तुति ने पूरे प्रेक्षागृह को शिवमय कर दिया। इसके बाद प्रकाश मलिक एवं साथी कलाकारों ने ‘मैं नई नवेली आई, फागुन में ब्याह ली’ लोकगीत पर घूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। कलाकारों की थिरकन और हरियाणवी लोक रंगों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

इसके बाद प्रवीण शर्मा, संदीप, मोहित और आर्यन ने ‘छोरा मैं हरियाणे का’ गीत पर धमाल नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं प्रियंका, कोमल, रामभतेरी, नेहा एवं रितु ने हरियाणवी लोकगीतों पर समूह नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। कलाकारों ने ‘के सपने का जिक्र करूं, एक हूर लीकड़ गई जड़ से’, ‘मेरे पाक्षण-पाक्षण आवण का भला कौन सा मतलब तेरा सै है’ और ‘बालम मेरा बांका चिट्टा छैल’ जैसे लोकगीतों पर नृत्य प्रस्तुत कर लोक संस्कृति की जीवंत छटा बिखेरी। देशभक्ति से ओतप्रोत रागिनी लोकगीत गायन की प्रस्तुति कलाकारों ने देकर दर्शकों में उत्साह और देशप्रेम का भाव भर दिया। कार्यक्रम का संचालन आकाश अग्रवाल ने किया।
वही स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत स्पेशल कैंपेन 6 के तहत सोमवार को केंद्र परिसर स्थित महात्मा गांधी कला वीथिका में स्वच्छता थीम पर पोस्टर व स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में स्कूल और कॉलेज के करीब 12 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
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