नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के कथित “मियां मुस्लिम” बयान को लेकर असम के दिसपुर थाने में एक FIR दर्ज की गई है। इस संबंध में सरमा की ओर से पेश वकील अजीम एस. लस्कर ने दिल्ली की साकेत कोर्ट को जानकारी दी। अदालत ने FIR की स्पष्ट प्रति दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त के लिए निर्धारित की है।
कोर्ट ने मांगी FIR की साफ प्रति
सुनवाई के दौरान हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से पेश अधिवक्ता अजीम एस. लस्कर ने अदालत को बताया कि कथित बयान के संबंध में दिसपुर थाने में FIR संख्या 76/2026 दर्ज की गई है। उन्होंने FIR की प्रति सहित कुछ दस्तावेज अदालत में दाखिल किए, लेकिन अदालत ने पाया कि FIR की कॉपी स्पष्ट नहीं है। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने FIR की साफ प्रति दाखिल करने का निर्देश दिया।
पुलिस ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान मालवीय नगर थाने के सब-इंस्पेक्टर अजय ने मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। हालांकि रिपोर्ट SHO की फॉरवर्डिंग के बिना दाखिल की गई थी। अदालत को बताया गया कि अगली सुनवाई पर SHO की फॉरवर्डिंग के साथ संशोधित स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
26 मई को जारी हुआ था नोटिस
इससे पहले 26 मई को साकेत कोर्ट ने हिमंता बिस्वा सरमा को नोटिस जारी किया था। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मांदर द्वारा दायर की गई है।
क्या है पूरा मामला?
हर्ष मांदर ने पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दाखिल कर हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ एक विशेष धार्मिक समुदाय के विरुद्ध कथित भड़काऊ बयान देने के आरोप में FIR दर्ज कराने की मांग की थी।
हालांकि ट्रायल कोर्ट ने 20 अप्रैल के आदेश में कहा था कि कथित बयान उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता, इसलिए FIR दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस आदेश को हर्ष मांदर ने सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है।
जीरो FIR और ई-FIR का भी हुआ जिक्र
सेशंस कोर्ट में सुनवाई के दौरान हर्ष मांदर की ओर से पेश अधिवक्ता संवाद बागवादिश्वर ने गृह मंत्रालय द्वारा जारी जीरो FIR और ई-FIR से जुड़े स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का हवाला दिया। इसके बाद अदालत ने हिमंता बिस्वा सरमा को नोटिस जारी किया था।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि असम के मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए “मियां मुस्लिम” शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे याचिकाकर्ता ने भड़काऊ और समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाला बताया है। याचिका के अनुसार, “मियां” शब्द का प्रयोग आमतौर पर असम के बंगाली मूल के मुसलमानों के लिए किया जाता है।
