बिहार विद्यापीठ, सदाकत आश्रम स्थित देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को देशरत्न सभागार में “भारतीय शिक्षण पद्धति में धर्म की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, इतिहास, दर्शन और अध्यात्म से जुड़े विद्वानों ने भारतीय शिक्षा परंपरा, मूल्यपरक शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विजय प्रकाश ने की।
भारतीय शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास : विजय प्रकाश
अपने अध्यक्षीय संबोधन में विजय प्रकाश ने कहा कि भारतीय शिक्षण पद्धति का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलित विकास करना है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘धर्म’ का अर्थ किसी संप्रदाय या पूजा-पद्धति से नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा, कर्तव्यपरायणता, आत्मानुशासन, करुणा, सेवा, सहिष्णुता और लोकमंगल जैसे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों से है।

उन्होंने अपनी चर्चित पुस्तक ‘The Beautiful Tree’ के ऐतिहासिक निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन से पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था अत्यंत समृद्ध, विकेंद्रित और समाज आधारित थी। गुरुकुल, पाठशालाएं और मदरसे स्थानीय समाज के सहयोग से संचालित होते थे और शिक्षा समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचती थी।
विजय प्रकाश ने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति में ध्यान, अवलोकन, स्मृति, चिंतन, परिकल्पना, भावनात्मक प्रबंधन और प्रभावी संवाद व्यक्तित्व निर्माण के प्रमुख आधार थे, जिन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली में पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्यपरक शिक्षा को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। योग, अनुशासन और चरित्र निर्माण भारतीय शिक्षा की आधारशिला
बिहार विद्यापीठ के सचिव डॉ. राणा अवधेश (सेवानिवृत्त आईएएस) ने कहा कि महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग में वर्णित यम, नियम, संयम और आत्मानुशासन भारतीय शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव हैं।
उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा का उद्देश्य केवल विद्वान तैयार करना नहीं था, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना था जो समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी हों।
महाविद्यालय की उपलब्धियां रखीं सामने
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम वर्मा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए वर्ष 2025-26 की शैक्षणिक उपलब्धियों, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध गतिविधियों, नवाचारों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
धर्म एक विकसित होती नैतिक चेतना है : पुरुषोत्तम
मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार-चिंतक पुरुषोत्तम ने कहा कि धर्म कोई स्थिर अवधारणा नहीं बल्कि मानव सभ्यता के साथ निरंतर विकसित होने वाली नैतिक चेतना है।
उन्होंने वैदिक दर्शन, उपनिषद, बौद्ध, जैन, भक्ति आंदोलन और आधुनिक भारतीय चिंतन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन में धर्म का वास्तविक अर्थ आत्मबोध, न्याय, कर्तव्य और लोककल्याण है।
धर्म व्यक्ति को सेवा और करुणा का मार्ग दिखाता है : स्वामी भावात्मानंद
रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, मुजफ्फरपुर के सचिव स्वामी भावात्मानंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म लोगों को जोड़ने वाली शक्ति है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के भीतर छिपी दिव्यता को जागृत करना है।

मूल्यपरक शिक्षा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. रत्नेश्वर मिश्र (पूर्व अध्यक्ष, इतिहास विभाग, एलएनएमयू) ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल दर्शन “विद्या ददाति विनयम्” पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को सत्यनिष्ठ, न्यायप्रिय, धैर्यवान और लोकहितैषी बनाना है। वर्तमान समय में वैज्ञानिक सोच के साथ नैतिक मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने पूछे सवाल
संगोष्ठी के दौरान बी.एड. और डी.एल.एड. के शिक्षक-प्रशिक्षुओं ने भारतीय शिक्षा, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।
सर्वसम्मति से निकला यह निष्कर्ष
संगोष्ठी का निष्कर्ष रहा कि भारतीय शिक्षण पद्धति में धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय विशेष का प्रचार नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, कर्तव्य, आत्मानुशासन, न्याय और लोकमंगल जैसे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों की स्थापना है।
विद्वानों ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होगी जब वह ज्ञान के साथ चरित्र, विज्ञान के साथ विवेक और व्यक्ति के साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भी विकास करे।
