नई दिल्ली | FreelancerPost Special Report
जंतर-मंतर पैलेट गन विवाद गहराता जा रहा है। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है। इस बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस ने छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने पैलेट गन चलाए जाने के आरोपों को खारिज किया है। इसी बीच बिहार के सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से हवाई फायरिंग का मामला भी राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक, कानूनी और मानवाधिकारों से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों का समुचित इलाज कराया जाए।
साथ ही अदालत ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों, मूवमेंट रिकॉर्ड और संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उनकी न्यायिक जांच की जा सके।
सुप्रीम Court ने स्पष्ट किया कि यदि किसी विशेष घटना में पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप है तो उसकी वैधता की जांच न्यायालय कर सकता है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
पूर्व IB निदेशक एवं पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद सहित तीन याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
याचिका में मांग की गई है-
- देशभर में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक
- छात्र आंदोलन में घायल लोगों को मुआवजा
- बल प्रयोग की न्यायिक समीक्षा
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
याचिका में लगाए गए आरोप
याचिका के अनुसार 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान-
- पहले आंसू गैस छोड़ी गई
- फिर लाठीचार्ज किया गया
- उसके बाद कथित रूप से पैलेट गन चलाई गई
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि
- कोई चेतावनी नहीं दी गई
- कई छात्र आंखों में घायल हुए
- शरीर में धातु के छर्रे लगे
- बल प्रयोग आवश्यकता और अनुपातिकता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या नहीं कहा?
यह समझना बेहद जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह नहीं कहा है कि सुरक्षा बलों ने निश्चित रूप से पैलेट गन चलाई थी। अदालत ने केवल इतना कहा है कि यदि इस तरह का आरोप लगाया गया है तो उसकी न्यायिक जांच की जा सकती है। इसी कारण अदालत ने सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मीडिया के सामने कुछ घायल छात्रों को पेश करते हुए दावा किया कि उनके शरीर पर पैलेट के छर्रों जैसे घाव हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया।

हालांकि इन चोटों के कारणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
भाजपा का जवाब
भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया।पार्टी का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैला रहा है और मामले की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
CJP ने क्या दावा किया?
सिविल सोसायटी संगठन CJP से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं कई घायल प्रदर्शनकारियों को देखा। उनका आरोप है कि पैलेट गन के इस्तेमाल से कई छात्रों की आंखों और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं तथा कई घायलों को अस्पताल ले जाना पड़ा।
उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की।
बिहार का AK-47 मामला क्यों जुड़ गया?
जंतर-मंतर विवाद के बीच बिहार के सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से हवाई फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला भी राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया।
25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच बिहार पुलिस के विशेष कार्य बल (SIT) के जवान अभिषेक पटेल का AK-47 से हवाई फायरिंग करते वीडियो वायरल हुआ।
बाद में उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
सिवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने कहा कि जवान को इस तरह फायरिंग करने का कोई आदेश नहीं था और उसे सार्वजनिक स्थान पर इस हथियार के साथ नहीं होना चाहिए था।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार भीड़ नियंत्रण के मामलों में अदालत तीन प्रश्नों पर विशेष ध्यान देती है-
- क्या बल प्रयोग आवश्यक था?
- क्या बल प्रयोग परिस्थितियों के अनुपात में था?
- क्या कम घातक विकल्प पहले अपनाए गए?
इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
घटनाक्रम (Timeline)
20 जुलाई — संसद मार्च और प्रदर्शन
20 जुलाई — पैलेट गन इस्तेमाल के आरोप
राहुल गांधी — घायल छात्रों को मीडिया के सामने लाए
याचिका दाखिल — सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सुप्रीम कोर्ट — इलाज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश
25 जुलाई — सिवान में AK-47 हवाई फायरिंग
बिहार पुलिस — संबंधित जवान निलंबित
निष्कर्ष
यह मामला अब केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है।
अब तीन बड़े सवालों की जांच होगी-
- क्या वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ?
- यदि हुआ तो क्या वह कानून के अनुरूप था?
- क्या प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई इन सवालों पर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।
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