सुप्रीम कोर्ट में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की फेशियल रिकॉग्निशन (Facial Recognition) और बायोमेट्रिक सर्विलांस (Biometric Surveillance) के जरिए निगरानी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में इस तरह की निगरानी को संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की गई है।
यह याचिका सीपीएम के राज्यसभा सांसद एए रहीम ने अधिवक्ता सुभाषचंद्रन के.आर. के माध्यम से दाखिल की है।
कानून बने बिना तकनीक के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग
याचिका में कहा गया है कि जब तक संसद इस विषय पर स्पष्ट कानून नहीं बनाती, तब तक फेशियल रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक सर्विलांस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान नहीं किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान में इन तकनीकों के उपयोग का कोई वैधानिक आधार मौजूद नहीं है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
याचिका में विशेष रूप से दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए अपनाई गई व्यवस्था को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि न तो दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर्स और न ही क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) एक्ट बायोमेट्रिक निगरानी की अनुमति देते हैं।
याचिका के अनुसार दिल्ली पुलिस ऑटोमेटेड तकनीक के माध्यम से प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उनके बायोमेट्रिक डेटा को राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से जोड़ रही है, जिससे प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पत्रकारों और आम नागरिकों की भी निगरानी की जा रही है।
RTI के जवाब का भी हवाला
याचिका में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दिल्ली पुलिस के जवाब का उल्लेख किया गया है। इसमें पुलिस ने कहा था कि फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से गुमशुदा व्यक्तियों और अज्ञात शवों की पहचान के लिए किया जाता है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस तकनीक का प्रदर्शनकारियों की निगरानी में उपयोग उसके घोषित उद्देश्य से अलग है।
निजता के अधिकार का हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि नागरिकों की निजता (Right to Privacy) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है। बिना स्पष्ट कानूनी व्यवस्था के व्यापक बायोमेट्रिक निगरानी नागरिकों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
मामले पर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि जब तक संसद इस विषय पर स्पष्ट कानून नहीं बनाती, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान फेशियल रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक निगरानी तकनीकों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए।
FreelancerPost Fact Box
मामला: प्रदर्शनकारियों की बायोमेट्रिक निगरानी
याचिकाकर्ता: CPM सांसद एए रहीम
अदालत: सुप्रीम कोर्ट
मुख्य मांग: कानून बनने तक Facial Recognition और Biometric Surveillance पर रोक
मुख्य आधार: निजता का अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा
ये भी पढ़ें
बांकीपुर चुनाव में AI वीडियो पर बवाल, जन सुराज ने BJP को दी खुली चुनौती
