पटना में आयोजित संगोष्ठी में चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
पटना, 28 अक्टूबर। चिकित्सा उपकरणों का मानकीकरण और सुरक्षा मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती है। इसी को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने बुधवार को एम्स पटना में एक संगोष्ठी आयोजित की। इसमें चिकित्सा उपकरणों के मानकीकरण, उनकी सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं में राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों की भूमिका पर चर्चा की गई।
संगोष्ठी का विषय ‘चिकित्सा उपकरणों के मानकीकरण के माध्यम से मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना’ था। इसमें विशेषज्ञों ने उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, संभावित जोखिमों की पहचान करने और उनके सुरक्षित उपयोग के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई।
मरीजों की सुरक्षा के लिए मानकीकरण जरूरी
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा उपकरणों का मानकीकरण मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उपकरणों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ उनकी नियमित निगरानी से इलाज की गुणवत्ता बेहतर बनाने और मरीजों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलती है।

बीआईएस के मेडिकल इक्विपमेंट एंड हॉस्पिटल डिवाइसेज (एमएचडी) विभाग के निदेशक एवं प्रमुख सुमित सेंगर ने भी स्वास्थ्य सेवाओं में मानकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानक निर्धारण करने वाली संस्थाओं और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय तथा चिकित्सा उपकरणों की प्रभावी निगरानी से चिकित्सा तकनीक के प्रति भरोसा बढ़ाया जा सकता है। इससे मरीजों को अधिक सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों ने सुरक्षा निगरानी पर दी जानकारी
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में एम्स पटना की डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, डीन (रिसर्च) प्रो. (डॉ.) संजय पांडेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, बीआईएस के एमएचडी विभाग के निदेशक एवं प्रमुख सुमित सेंगर और एम्स पटना के फार्माकोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. प्रमोद कुमार मांझी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बीआईएस के कार्तिक रेड्डी ने राष्ट्रीय गुणवत्ता व्यवस्था और मानकीकरण में बीआईएस की भूमिका पर प्रस्तुति दी। वहीं, एनआईपीईआर हाजीपुर के आईपीसी-एमवीपीआई के आरटीसी समन्वयक डॉ. समीर धींगरा ने चिकित्सा उपकरणों और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक डिवाइस (आईवीडी) की सुरक्षा निगरानी पर जानकारी साझा की।
डॉ. धींगरा ने संभावित जोखिमों की पहचान करने और चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखने के महत्व को रेखांकित किया। बीआईएस के एमएचडी विभाग के पवन कुमार ने मानक निर्धारण की प्रक्रिया में विभाग की भूमिका के बारे में बताया।
विशेषज्ञों ने साझा किए व्यावहारिक अनुभव
संगोष्ठी में ‘बीआईएस स्नैप और मरीजों की सुरक्षा के क्षेत्रीय अनुभवों से मिली सीख’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसका संचालन बीआईएस के कार्तिक रेड्डी ने किया।

चर्चा में एम्स पटना के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. संजीव कुमार, ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. अनूप कुमार, कार्डियोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. अनुपम भंभानी और कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. प्रगति कपूर ने भाग लिया।
विशेषज्ञों ने मरीजों की सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए और चिकित्सा सेवाओं में गुणवत्ता मानकों की भूमिका पर विचार रखे। कार्यक्रम में ओपन हाउस चर्चा भी हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने चिकित्सा उपकरणों के मानकीकरण और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहतर समन्वय पर जोर
संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि चिकित्सा उपकरणों के लिए मजबूत गुणवत्ता मानक तय करना, उनकी सुरक्षा की प्रभावी निगरानी करना और स्वास्थ्य संस्थानों तथा मानक निर्धारण करने वाली संस्थाओं के बीच तालमेल बढ़ाना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर ध्यान देने से मरीजों की सुरक्षा को मजबूत बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम ने सुरक्षित चिकित्सा तकनीक के इस्तेमाल और बेहतर इलाज के लिए मानकीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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