नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के खिलाफ उनके कॉलेज या यूनिवर्सिटी के भीतर किए गए किसी व्यवहार को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून छात्रों के व्यवहार और अनुशासन से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार संबंधित यूनिवर्सिटी या शैक्षणिक संस्थान के पास है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि BCI के पास कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
छात्रों के अनुशासन का फैसला यूनिवर्सिटी करेगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के छात्रों के कॉलेज या यूनिवर्सिटी के अंदर के आचरण और अनुशासन का फैसला संबंधित शैक्षणिक संस्थान ही कर सकता है।
कोर्ट के मुताबिक, छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए BCI की ओर से भेजे गए पत्र उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे। यानी बार काउंसिल ऑफ इंडिया की नियामक भूमिका को कानून के छात्रों के विश्वविद्यालय के भीतर के व्यवहार तक नहीं बढ़ाया जा सकता।
नालसार छात्रों से जुड़ा है मामला
यह मामला नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के कुछ छात्रों से जुड़ा है। याचिका नालसार के पूर्व छात्रों मिहिर सूद और अभिषेक तिवारी ने दायर की थी।
याचिका में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से 13 अगस्त को जारी किए गए सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। इस सर्कुलर में नालसार के छात्रों के भविष्य में किसी भी बार काउंसिल में वकील के तौर पर रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने की बात कही गई थी।
चीफ जस्टिस के हाथों डिग्री लेने का किया था विरोध
दरअसल, नालसार के कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के हाथों दीक्षांत समारोह में डिग्री लेने का विरोध किया था। इसके बाद BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से छात्रों के खिलाफ सर्कुलर जारी किया गया था।
हालांकि, सर्कुलर को लेकर विरोध और कानूनी चुनौती के बाद BCI ने इसे वापस ले लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI के अधिकार क्षेत्र पर उठाया सवाल
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सीधा मतलब यह है कि BCI कानून के छात्रों पर केवल इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती कि उन्होंने अपने विश्वविद्यालय परिसर में कोई ऐसा व्यवहार किया जिसे बार काउंसिल अनुचित मानती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों के विश्वविद्यालय स्तर के अनुशासन का मामला संबंधित शैक्षणिक संस्थान के अधिकार क्षेत्र में आता है।
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