नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट CJP प्रदर्शन पर कहा है कि वह काकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का गठन करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वो इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाईकोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस और पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। कमेटी पुलिस ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा जैसे मामलों की जांच करेगी।
उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी तथ्यों का पता लगाएगी
सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शन को लेकर कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी को तथ्यों का पता लगाने का काम सौंपा जाएगा और उससे समय-समय पर रिपोर्ट देने को कहा जाएगा ताकि कोर्ट जरुरी निर्देश जारी कर सके। कोर्ट ने कहा कि हम कमेटी को सभी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएंगे और हमें पूरा भरोसा है कि कमेटी अपने पास आने वाले किसी भी पीड़ित की बात तुरंत सुनेगी और उन्हें अपनी बात रखने का मौका देगी। कोर्ट कमेटी की समय-समय पर आने वाली सिफारिशों का इंतजार करेगी और उसके बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि कमेटी महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न और ऑनलाइन उत्पीड़न, सोशल मीडिया के जरिये अन्य कमजोर लोगों को परेशान किए जाने के आरोपों की जांच करेगी।

फेशियल रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक सर्विलांस पर कोर्ट करेगा फैसला
कोर्ट ने ये साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और बायोमेट्रिक सर्विलांस का इस्तेमाल करने और अनुच्छेद 21 से संबंधित संवैधानिक प्रश्नों का निर्णय कोर्ट ही करेगी न कि कमेटी। आज सुनवाई दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि संसद मार्च के दौरान हिंसा और कथित असामाजिक तत्वों की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ गई। दिल्ली पुलिस की ओर से डीसीपी सचिन शर्मा की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। दिल्ली पुलिस ने कहा कि बल प्रयोग की जांच कोर्ट की ओर से नियुक्त कमेटी द्वारा की जा सकती है। दिल्ली पुलिस इस कमेटी को पूरा सहयोग करेगी और पूरा विवरण उपलब्ध कराएगी। हलफनामे में कहा गया है कि 20 जुलाई को विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और उसके आस-पास 30 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए थे, जिनमें कथित उपद्रवी और असामाजिक तत्व भी शामिल थे। बाद में यह प्रदर्शन हिंसक हो गया।
युवाओं से सख्ती के बजाय बातचीत पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था जोर
बता दें कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि युवाओं के साथ सख्ती से पेश आने के बजाए उन्हें समझना और उनसे बातचीत करना जरूरी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अगर कुछ भटके हुए लोग पत्थरबाजी कर भी दें, तब भी युवाओं को समझाना और उनसे बातचीत करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि युवाओं को सलाह और काउंसलिंग की जरूरत होती है। अगर सरकार बहुत सख्ती या आक्रामक रवैया अपनाएगी, तो समाज में तनाव और बढ़ सकता है इसलिए ऐसी स्थिति से बचा जाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा था कि जरूरत युवाओं को सुनने और समझने की है कि वे क्यों नाराज हैं और क्यों नारे लगा रहे हैं।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर दायर हुई थी याचिका
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में अभद्र गालियों का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को नसीहत देने के लिए सात दिनों की ‘कम्युनिटी सर्विस’ दी जाए। विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई हो। बता दें कि पिछले दिनों काकरोच जनता पार्टी ने पेपर लीक के मामले में जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया था। छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की ओऱ से ज्यादती की शिकायतें मिली थीं।

क्या है पूरा मामला?
काकरोच जनता पार्टी ने पेपर लीक के मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने संसद मार्च की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती की शिकायतें सामने आईं, जबकि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने और पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा किया। इसी घटनाक्रम से जुड़े आरोपों और पुलिस कार्रवाई की जांच को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। अब प्रस्तावित उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का काम घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच करना और समय-समय पर कोर्ट को अपनी रिपोर्ट देना होगा।
5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले 5 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं से निपटने में सख्ती के बजाय संवाद और समझ की जरूरत पर जोर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि युवाओं की नाराजगी के कारणों को समझना जरूरी है और सरकार को ऐसा रवैया अपनाने से बचना चाहिए जिससे सामाजिक तनाव और बढ़े। कोर्ट ने युवाओं को सलाह और काउंसलिंग देने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
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