मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार (14 जुलाई) को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका पर होगी।
सोमवार की सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुफैजा अहमदी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख (मेंशन) किया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस विवाद से जुड़ी अन्य याचिकाएं 14 जुलाई के लिए सूचीबद्ध हैं, लेकिन मुस्लिम पक्ष की याचिका सूची में शामिल नहीं है। इस पर चीफ जस्टिस ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को भी 14 जुलाई की सुनवाई सूची में शामिल करने का निर्देश दिया।
हिंदू पक्ष ने दाखिल की केविएट
इस मामले में हिंदू पक्षकार जितेंद्र सिंह विसेन ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर की है। केविएट में अनुरोध किया गया है कि यदि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई याचिका सुनवाई के लिए आए तो उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न किया जाए।
क्या कहा था मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने?
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने हालिया फैसले में कहा था कि भोजशाला स्थित विवादित स्थल मंदिर है, जो देवी सरस्वती से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
क्या है पूरा विवाद?
धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हिंदू संगठनों का दावा है कि यह स्थल मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर (भोजशाला) है, जिसका निर्माण राजा भोज ने संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में कराया था। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इस परिसर को कमाल मौला मस्जिद मानता है और अपने अधिकारों का दावा करता है।
अब इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
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यह मामला वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन है। इस रिपोर्ट में दोनों पक्षों के दावों और न्यायालय की कार्यवाही का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है। विवादित स्थल के संबंध में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
