नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक अहम फैसले में साफ कहा है कि अगर किसी बुजुर्ग के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान के लिए जरुरी हो तो संबंधित ट्रिब्यूनल उसकी संपत्ति से बेटे-बहू को बेदखल करने का आदेश दे सकता है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना कानून का अहम उद्देश्य है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले को भी रद्द कर दिया जिसमें बेटे और बहू को संपत्ति से बाहर करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया गया था। मामला लखनऊ के विकास नगर स्थित एक मकान से जुड़ा हुआ है। मकान के मालिक रवि कांत गुप्ता ने अपने बेटे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। गुप्ता का आरोप था कि उनके बेटे ने उनकी 81 वर्षीय मां यानि अपनी दादी को घर में नहीं रहने दिया और कथित तौर पर उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद बुजुर्ग महिला को वृद्धाश्रम जाना पड़ा। गुप्ता ने जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने माता-पिता के भरण-पोषण के लिए औऱ अपने बेटे को मकान से बेदखल करने की मांग की।
मजिस्ट्रेट ने नवंबर 2022 में कहा कि ये मकान रवि कांत गुप्ता की स्व-अर्जित संपत्ति है। आदेश में कहा गया था कि उनके बेटे ने अपनी दादी को घर में रहने की अनुमति नहीं दी थी। मजिस्ट्रेट ने बेटे को संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दिया था। मजिस्ट्रेट के आदेश को रविकांत गुप्ता के बेटे और बहू ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हईकोर्ट ने पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत अधिकारियों को संपत्ति से बेदखली का आदेश देने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
क्या कहता है Senior Citizens Act?
Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 का उद्देश्य माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण के लिए प्रभावी प्रावधान करना है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी स्पष्ट किया है कि इस कानून के तहत ट्रिब्यूनल कुछ परिस्थितियों में वरिष्ठ नागरिक के संरक्षण और भरण-पोषण को सुनिश्चित करने के लिए बेदखली जैसे ancillary relief पर विचार कर सकता है। हालांकि, ऐसे मामलों में दूसरे पक्ष के वैधानिक अधिकारों और परिस्थितियों पर भी विचार करना जरूरी है।
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