नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से NEET परीक्षा सुधारों को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्थायी और संस्थागत रूप देने को कहा है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की पीठ ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था के लिए केवल प्रक्रियाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत संस्थागत ढांचा, पर्याप्त मानव संसाधन, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
आज सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने परीक्षा प्रक्रिया का विस्तृत ब्यौरा दिया। तुषार मेहता ने कहा कि एनटीए की मौजूदा व्यवस्था लगभग अभेद्य है। हालांकि, किसी भी स्तर पर मानवीय गलती या मानवीय हस्तक्षेप की संभावना बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि एक विषय के लिए कई मॉडरेटर करीब पांच सौ प्रश्नों का बैंक तैयार करते हैं, ताकि एक व्यक्ति यह तय न कर सके कि परीक्षा में कौन से सौ प्रश्न आएंगे। इसके बाद मॉडरेटरों का दूसरा समूह सौ-सौ प्रश्न चुनकर चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार करता है। इनमें से दो प्रश्नपत्र एनटीए के महानिदेशक परीक्षा के लिए चुनते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में अंतिम प्रश्नपत्र को लेकर किसी एक व्यक्ति को पूरी जानकारी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र सीलबंद लिफाफे में दो अलग-अलग अधिकृत प्रिंटिंग प्रेस भेजे जाते हैं। इन प्रिंटिंग प्रेस पर सीसीटीवी और सीआईएसएफ की निगरानी रहती है।
डिजिटल कोड से बॉक्स खोला जाता है और कोड की जानकारी पहले से संबंधित व्यक्ति को नहीं होती। प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्रों को ऐसे सीलबंद बॉक्स में रखा जाता है, जिनकी सील दोबारा इस्तेमाल नहीं की जा सकती है।
प्रश्नों को अलग-अलग क्रम में रखा जाता है। 24 छात्रों के प्रत्येक समूह के लिए अलग पैकेट तैयार किए जाते हैं, जिन पर वाटरमार्क नंबर, सिटी कोड, सेंटर कोड और पैकेट नंबर होता है। इसके बाद प्रश्नपत्रों को ऐसे लोहे के बॉक्स में रखा जाता है, जिसे खोलने के लिए लॉक तोड़ना पड़ता है।
इन प्रश्नपत्रों को जीपीएस लगे वाहनों के जरिये स्ट्रांग रूम तक पहुंचाया जाता है और पूरी गतिविधि की निगरानी एनटीए मुख्यालय से की जाती है।
NEET परीक्षा सुधार पर कोर्ट ने कहा- केवल प्रक्रिया तैयार करना पर्याप्त नहीं
मेहता के विस्तृत ब्यौरे के बाद जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा प्रणाली के ये पहलू पहले ही राधाकृष्णन कमेटी के सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ नए लोग आते हैं और नई व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं। लेकिन समस्या का समाधान केवल प्रक्रिया तैयार करने से नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि यह एक प्रक्रियागत समस्या है, जिसे संस्थागत रूप देना सबसे ज्यादा जरूरी है। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि संस्था में कितने अधिकारी हैं, कार्यालय कहां है, कितने कर्मचारी हैं और कितनी सुरक्षा व्यवस्था है, इन पहलुओं को स्पष्ट रूप से तय करने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA में सुधारों को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया है। अदालत ने NTA की क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत भी रेखांकित की।
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