नई दिल्ली। काकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाई है। कोर्ट ने पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का गठन किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने प्रदर्शन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है।
कमेटी में पूर्व जज जस्टिस रवि शंकर झा, पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और पूर्व डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई को शामिल किया गया है।
18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे संकेत
इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को कहा था कि वह काकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का गठन करेगा।
कमेटी को पुलिस ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा जैसे मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी जाएगी। कोर्ट ने कहा था कि उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी को तथ्यों का पता लगाने का काम सौंपा जाएगा और उससे समय-समय पर रिपोर्ट देने को कहा जाएगा, ताकि कोर्ट आवश्यक निर्देश जारी कर सके।
पीड़ितों की शिकायतें सुनेगी कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कमेटी को सभी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा। कोर्ट ने भरोसा जताया था कि कमेटी के पास आने वाले किसी भी पीड़ित की बात तुरंत सुनी जाएगी और उसे अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा।
कोर्ट कमेटी की समय-समय पर आने वाली सिफारिशों का इंतजार करेगा और उसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
महिला प्रदर्शनकारियों और ऑनलाइन उत्पीड़न के आरोपों की भी जांच
कमेटी महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न और ऑनलाइन उत्पीड़न के आरोपों की भी जांच करेगी। इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए कमजोर वर्ग के लोगों को परेशान किए जाने के आरोपों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
सात दिन की कम्युनिटी सर्विस की मांग वाली याचिका
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में अभद्र गालियों का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को नसीहत देने के लिए सात दिनों की ‘कम्युनिटी सर्विस’ दी जाए। याचिका में विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई थी।
जंतर-मंतर पर हुआ था विरोध प्रदर्शन
बताया गया है कि पिछले दिनों काकरोच जनता पार्टी ने पेपर लीक के मामले में जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया था। छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की ओर से ज्यादती की शिकायतें भी सामने आई थीं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी अब प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न आरोपों और शिकायतों की जांच करेगी तथा समय-समय पर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें कोर्ट के सामने रखेगी।
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