पटियाला हाउस कोर्ट ने महेश गुप्ता को पुलिस हिरासत में भेजा, हरिराम और ऊर्मिला गुप्ता न्यायिक हिरासत में; हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत, 12 को बचाया गया
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बिल्डिंग के मालिक महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। वहीं उनके माता-पिता हरिराम गुप्ता और ऊर्मिला गुप्ता को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। तीनों को 7 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। देर रात उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट भव्य करहैल के सामने पेश किया गया।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इमारत का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था, जबकि संपत्ति ऊर्मिला गुप्ता के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पुलिस के अनुसार, इस इमारत में चल रहे PG का प्रबंधन उनके बेटे महेश गुप्ता के हाथ में था। हरिराम गुप्ता 81 वर्ष के हैं और भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड सार्जेंट बताए गए हैं। ऊर्मिला गुप्ता की उम्र 75 वर्ष और महेश गुप्ता की उम्र 52 वर्ष है।
हादसे में 7 लोगों की मौत
सत्य निकेतन की संकरी गली में यह हादसा 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। पांच मंजिला इमारत में बेसमेंट भी था और इसमें मुख्य रूप से छात्र रहते थे। सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के चलते बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया।
NDRF, दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश की। बचाव दल ने 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला। बाद में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई।
मृतकों में पांच छात्र
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा में जान गंवाने वाले सात लोगों में पांच छात्र थे। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- अर्पित जाज — 19 वर्ष
- अभिषेक — 20 वर्ष
- युवराज सोनी — 20 वर्ष
- पवन — 17 वर्ष
- अक्षत सिंह यादव — 18 वर्ष
- सुरिंदर सिंह — 56 वर्ष
- परम लाल कोरी — 30 वर्ष
इनमें पहले पांच मृतक छात्र और सुरिंदर सिंह तथा परम लाल कोरी मजदूर बताए गए हैं।
करीब 50-55 साल पुरानी थी इमारत

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा ने दिल्ली के कई इलाकों में चल रहे निजी PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जिस इमारत में PG चल रहा था, वह कई दशक पुरानी थी। अलग-अलग रिपोर्टों में इसकी उम्र करीब 50 से 55 वर्ष बताई गई है।
बताया गया है कि इमारत में कुछ समय से मरम्मत और renovation का काम चल रहा था और अगस्त में इसे फिर से छात्रों के लिए खोला गया था। हादसे से पहले बेसमेंट में भी काम चल रहा था। प्रारंभिक जांच में बेसमेंट में पानी जमा होने और वहां चल रहे निर्माण/मरम्मत कार्य को संभावित कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि बेसमेंट में पानी के रिसाव और सीपेज की समस्या को दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया जा रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस काम के दौरान इमारत की संरचना पर कोई असर पड़ा था या नहीं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD से मांगी उच्चस्तरीय जांच
हादसे के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचा। 7 सितंबर को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने MCD को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए।
अदालत ने जांच में यह पता लगाने को कहा कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसका निर्माण जरूरी और वैध अनुमतियों के तहत हुआ था या नहीं। इसके अलावा किसी अधिकारी की लापरवाही या नियामकीय चूक सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की जानकारी देने को भी कहा गया है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी घटना की जिम्मेदारी केवल PG मालिक तक सीमित नहीं हो सकती। अदालत ने MCD और विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जरूरत बताई है।
बिल्डिंग और PG के प्रबंधन को लेकर पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, बिल्डिंग का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था, जबकि संपत्ति ऊर्मिला गुप्ता के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पुलिस के अनुसार, बिल्डिंग में चल रहे PG का प्रबंधन उनके बेटे महेश गुप्ता के हाथ में था।
पुलिस के मुताबिक हरिराम गुप्ता की उम्र 81 साल, ऊर्मिला गुप्ता की 75 साल और महेश गुप्ता की उम्र 52 साल है। हरिराम गुप्ता भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड सार्जेंट हैं, जबकि महेश गुप्ता हार्डवेयर और पेंट की दुकान चलाते हैं। पुलिस ने PG संचालकों और वहां काम करने वाले ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली के PG और हॉस्टल पर भी उठे सवाल
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में एक पांच मंजिला छात्र आवास के गिरने से पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने छात्र PG समेत सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों के structural audit और safety certification को लेकर सख्ती की बात कही है। सरकार ने छात्र इलाकों में चल रहे PG की संरचनात्मक सुरक्षा जांच की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।
हाईकोर्ट ने भी MCD के अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG accommodations की व्यापक जांच का निर्देश दिया है। इससे मामला सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दिल्ली में निजी छात्र आवासों की सुरक्षा और उनकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अब जांच के सामने ये बड़े सवाल
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की जांच में अब कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं—इमारत को कितनी मंजिलों की अनुमति थी, वास्तविक निर्माण कितना अलग था, मरम्मत और बेसमेंट में चल रहे काम की अनुमति थी या नहीं, इमारत की संरचनात्मक स्थिति की पहले कभी जांच हुई थी या नहीं और संबंधित अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी किस स्तर तक की थी।
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच, MCD की उच्चस्तरीय जांच और अन्य जांच प्रक्रियाओं के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा अब सिर्फ एक इमारत गिरने का मामला नहीं रह गई है। यह दिल्ली में तेजी से बढ़ते निजी PG और छात्र आवासों की सुरक्षा, पुराने भवनों की निगरानी और निर्माण नियमों के पालन पर बड़ा सवाल बन चुकी है।
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