नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (BLA) को एन्यूमरेशन और डिक्लेरेशन फॉर्म में दर्ज हर जानकारी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। BLA की जिम्मेदारी केवल उस जानकारी तक सीमित होनी चाहिए, जिसकी वह खुद पुष्टि कर सकता है।
जस्टिस अमित बंसल की बेंच ने यह टिप्पणी दिल्ली कांग्रेस के नेताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
BLA से निजी अंडरटेकिंग लेने के आदेश को चुनौती
दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंदर यादव और दिल्ली कांग्रेस के बूथ मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन राजेश गर्ग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें निर्वाचन आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट को एन्यूमरेशन फॉर्म में दी गई जानकारियों को वेरिफाई करने संबंधी निजी अंडरटेकिंग देने को कहा गया है।
याचिका में निर्वाचन आयोग के 24 जून 2025 के दिशानिर्देश की धारा 9(डी)(4) को चुनौती दी गई है।
राजनीतिक दलों को 2002 की वोटर लिस्ट उपलब्ध कराने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण लागू होने से पहले राजनीतिक दलों को 2002 की वोटर लिस्ट की प्रिंटेड और सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही फ्रोजन फोटो वोटर लिस्ट भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि वोटर लिस्ट से जुड़ी जानकारी का वैधानिक वेरिफिकेशन बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) जैसे अधिकारियों का काम है।
‘राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों पर नहीं डाली जा सकती अधिकारियों की जिम्मेदारी’
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी निर्वाचन अधिकारियों और कर्मचारियों की है। इसे राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों पर नहीं डाला जा सकता।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि निर्वाचन आयोग का संबंधित निर्देश जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
कोर्ट की टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है?
हाईकोर्ट की टिप्पणी का महत्व इसलिए है क्योंकि SIR प्रक्रिया में मतदाताओं से संबंधित जानकारी के सत्यापन की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों और निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारियों का सवाल उठ रहा है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि BLA को ऐसी जानकारी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जिसकी वह स्वयं पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है। मामले में याचिकाकर्ताओं की अन्य मांगों और निर्वाचन आयोग के निर्देशों को लेकर सुनवाई जारी है।
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