बिहार पवेलियन में फिल्म प्रोत्साहन नीति, शूटिंग लोकेशन और सरकारी सुविधाओं की जानकारी; एनिमेशन-VFX स्टूडियो स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा, मगही फिल्म ‘स्वाहा’ की अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्क्रीनिंग
श्रीनगर, 8 सितंबर 2026। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू-कश्मीर (IFFJK 2026) में बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति और राज्य की शूटिंग लोकेशन देश-विदेश के फिल्मकारों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (SKICC) में स्थापित बिहार पवेलियन में फिल्म निर्माता, स्वतंत्र फिल्ममेकर, डॉक्यूमेंटेरियन, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और स्थानीय छात्र-युवा पहुंचकर बिहार में फिल्म निर्माण की संभावनाओं की जानकारी ले रहे हैं।
7 से 10 सितंबर तक चल रहे चार दिवसीय IFFJK में 40 देशों की 135 फिल्मों की स्क्रीनिंग हो रही है। जम्मू-कश्मीर सरकार के निमंत्रण पर बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति की दी जा रही जानकारी
फेस्टिवल के पहले दिन बिहार पवेलियन का उद्घाटन बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की महाप्रबंधक श्रीमती रूबी ने किया। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के अंतर्गत स्थापित इस पवेलियन में बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति, 2024, फिल्म निर्माण पर मिलने वाले अनुदान, शूटिंग की अनुमति, राज्य के विभिन्न शूटिंग लोकेशन और सरकार की सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है।
पवेलियन में पहुंच रहे फिल्मकारों और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को बिहार में फिल्म निर्माण की संभावनाओं के साथ-साथ राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता से भी परिचित कराया जा रहा है।
श्रीमती रूबी ने कहा कि बिहार की भौगोलिक विविधता और समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर इसे फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए उपयुक्त बनाती है। उन्होंने बताया कि राज्य में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा राष्ट्रीय महत्व के 71 स्मारक एवं पुरातात्विक अवशेष हैं, जो फिल्मकारों के लिए महत्वपूर्ण लोकेशन हो सकते हैं।

बिहार में फिल्म स्टूडियो लगाने में रुचि
IFFJK के दूसरे दिन बिहार पवेलियन में फिल्म प्रोड्यूसर, इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर, डॉक्यूमेंटेरियन, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और स्थानीय छात्र-युवाओं की मौजूदगी रही।
इसी दौरान बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम के परामर्शी (फिल्म) अरविंद रंजन दास ने फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के साथ बिहार में फिल्म निर्माण और पोस्ट-प्रोडक्शन की संभावनाओं पर चर्चा की।
लूमापिक्स क्रिएटिव स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर-डायरेक्टर प्रकाश मेहता के साथ बिहार में एनिमेशन और VFX स्टूडियो स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
प्रकाश मेहता ने बताया कि वह करीब एक दशक से एनिमेशन एवं VFX उद्योग से जुड़े हैं। उनके अनुसार बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति लागू होने के बाद शूटिंग गतिविधियों में बढ़ोतरी से पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाओं की स्थानीय मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की सब्सिडी योजना से पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधा स्थापित करने की संभावनाएं आसान हुई हैं और वे राज्य में एनिमेशन एवं VFX स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मगही फिल्म ‘स्वाहा’
IFFJK में बिहार की मगही फीचर फिल्म ‘स्वाहा’ की भी स्क्रीनिंग की जा रही है। वर्ष 2024 में बनी 99 मिनट की यह फिल्म गया के मुसहर समुदाय के वर्गीय संघर्ष, जातीय भेदभाव और धार्मिक मोहभंग के बीच एक मां के संघर्ष की कहानी प्रस्तुत करती है।
फिल्म के निर्देशक अभिलाष शर्मा और निर्माता विकास कुमार हैं। ‘स्वाहा’ अब तक 13 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है। इनमें शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के सर्वश्रेष्ठ निर्देशक एवं सर्वश्रेष्ठ कलाकार, न्यूयॉर्क के सोशली रेलेवेंट फिल्म फेस्टिवल का सर्वश्रेष्ठ फिल्म तथा स्पेन के इमेजिन इंडिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का सर्वश्रेष्ठ मानवीय फिल्म लाइफ अवार्ड शामिल हैं।
फिल्म 30 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हो चुकी है। भारत के अलावा इटली, जर्मनी, कनाडा, तुर्की और बांग्लादेश में भी इसकी स्क्रीनिंग हो चुकी है।
फिल्म में चंद्रशेखर दत्ता, सोनाली शर्मिठा, सत्यरंजन और बुल्लो कुमार मुख्य भूमिकाओं में हैं। संगीत मोहनदास वी.पी. ने दिया है।
‘स्थानीय भाषा की फिल्मों को मिल रहा अंतरराष्ट्रीय अवसर’
फिल्म के निर्देशक अभिलाष शर्मा ने कहा कि मगही भाषा में बनी फिल्म का अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचना गर्व का क्षण है। उन्होंने गंभीर और ज्वलंत विषय पर बनी ‘स्वाहा’ को आम लोगों तक पहुंचाने में बिहार सरकार के सहयोग की सराहना की।
उन्होंने कहा कि बिहार की स्थानीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी से भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और बज्जिका जैसी भाषाओं में बिहार की कहानियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
अभिलाष शर्मा ने बिहार फिल्म निगम के प्रबंध निदेशक प्रणव कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बिहार में NSD की शाखा खोलने की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी आभार जताया।
कश्मीर के युवाओं को दिखाई गई बिहार की सिनेमाई तस्वीर
बिहार पवेलियन में पहुंचे जम्मू-कश्मीर के स्थानीय छात्र-छात्राओं और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के लिए फिल्म निगम के असिस्टेंट मैनेजर (फिल्म) उत्तम ज्योति नारायण और परामर्शी (संचार) कुमार गौरव ने बिहार के विविध शूटिंग लोकेशन का प्रजेंटेशन दिया।

इस दौरान स्थानीय युवाओं ने बिहार की कला, संस्कृति और विरासत को फिल्मों के माध्यम से समझने में रुचि दिखाई।
स्थानीय छात्रा नाजिमा ने कहा कि कश्मीर में भोजपुरी गाने सुने जाते हैं, लेकिन बिहार की कला, संस्कृति और विरासत के बारे में जानकारी सीमित है। उनके अनुसार फिल्मों के माध्यम से बिहार को बेहतर तरीके से जानने और समझने का अवसर मिल सकता है।
वहीं सोशल एक्टिविस्ट और सिने-प्रेमी डॉ. जहूर ने कहा कि बिहार को जानना और उसे बड़े पर्दे पर देखना हर बार नया अनुभव है। सिनेमेटोग्राफर दिदान ने भी बिहार के सिनेमाई लोकेशन की सराहना करते हुए इन्हें अपने कैमरे में कैद करने की इच्छा जताई।
चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कर रहा बिहार का प्रतिनिधित्व
जम्मू-कश्मीर सरकार के निमंत्रण पर श्रीमती रूबी के नेतृत्व में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल IFFJK में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में परामर्शी (फिल्म) अरविंद रंजन दास, सहायक प्रबंधक (फिल्म) उत्तम ज्योति नारायण और परामर्शी (संचार) कुमार गौरव शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य फिल्म निर्माताओं और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के साथ संवाद कर बिहार की फिल्म नीति, सरकारी सुविधाओं और शूटिंग लोकेशन की जानकारी देना तथा राज्य में फिल्म निर्माण और संबंधित निवेश की संभावनाओं को समझना है।
बिहार पवेलियन से निकलता संदेश
IFFJK में बिहार की मौजूदगी सिर्फ एक पवेलियन तक सीमित नहीं दिख रही है। फिल्म नीति, स्थानीय भाषा की फिल्मों को प्रोत्साहन, शूटिंग लोकेशन और पोस्ट-प्रोडक्शन जैसी सुविधाओं के जरिए बिहार को फिल्म निर्माण के संभावित केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। ‘स्वाहा’ की अंतरराष्ट्रीय स्क्रीनिंग और एनिमेशन-VFX स्टूडियो में दिखाई गई रुचि इस प्रयास को नई दिशा देती दिखाई दे रही है।
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