पटाखे जलाने के लिए तय होगा समय; बोरियम वाले पटाखों पर CPCB की रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक, ‘लड़ी’ पटाखों पर शर्तों के साथ विचार
नई दिल्ली, 30 सितंबर। दिवाली पर पटाखों जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम संकेत दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, लेकिन 24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति भी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि बीच का रास्ता निकालते हुए दिवाली पर पटाखों जलाने के लिए एक निश्चित समय तय किया जा सकता है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से दिवाली मनाने वाले लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जबकि पूरे दिन पटाखे चलने से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों समेत अन्य लोगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए कोर्ट ने कहा कि ऐसा समाधान तलाशना होगा, जिसमें पटाखे चलाने के लिए निर्धारित समय हो।
15 अक्टूबर तक CPCB देगी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से बोरियम आधारित पटाखों को लेकर रिपोर्ट पेश करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि बोरियम आधारित पटाखों की आउटडोर टेस्टिंग अभी पूरी नहीं हुई है। इसके बाद ही इन पटाखों के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केंद्र की ओर से सीमित और शर्तों के साथ कुछ नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन पटाखों पर भी विचार का सुझाव दिया गया है। ऐसे पटाखों के लिए लाइसेंस प्राप्त निर्माता, निर्धारित शोर और उत्सर्जन मानकों तथा प्रतिबंधित रसायनों से मुक्त होने जैसी शर्तें लागू हो सकती हैं।
‘लड़ी’ पटाखों पर भी शर्तों के साथ विचार
सुनवाई में ‘लड़ी’ या जॉइंट पटाखों का मुद्दा भी उठा। ऐसे दिवाली पर पटाखों में कई पटाखे एक साथ जोड़े जाते हैं और एक फ्यूज के जरिए क्रम से फूटते हैं।
ASG ऐश्वर्या भाटी ने कुछ शर्तों के साथ ऐसे पटाखों के निर्माण की अनुमति देने का सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि वह इस सुझाव को स्वीकार करने के पक्ष में है। हालांकि, अंतिम अनुमति और शर्तें आगे की कार्यवाही में स्पष्ट होंगी।
दिवाली पर पटाखों पर अंतिम फैसला CPCB की रिपोर्ट के बाद
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किन प्रकार के पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति होगी, इस पर फैसला CPCB की रिपोर्ट और संबंधित तकनीकी जानकारी के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल कोर्ट ने किसी निश्चित समय की घोषणा नहीं की है।
यानी इस समय यह कहना सही नहीं होगा कि दिवाली पर पटाखों चलाने का अंतिम समय तय हो गया है। कोर्ट ने केवल यह संकेत दिया है कि आतिशबाजी के लिए निश्चित समय निर्धारित किया जाएगा।
पटाखा निर्माताओं ने उठाया पूरे देश का मुद्दा
पटाखा निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने दलील दी कि नियम बनाते समय केवल दिल्ली को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने पूरे देश के लिए एक समान दृष्टिकोण की जरूरत बताई और कहा कि दिल्ली की पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भी संबंधित मामलों को एक साथ सुना जाना चाहिए।
उन्होंने Arjun Gopal और M.C. Mehta मामलों को साथ सुनने की बात रखी। कोर्ट ने भी माना कि दोनों मामलों में कई मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हें एक साथ सुना जाना उचित होगा।
पिछले साल क्या हुआ था?
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के दौरान सीमित अवधि के लिए ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी। उस समय बिक्री और इस्तेमाल पर कई शर्तें लगाई गई थीं और आतिशबाजी के लिए निर्धारित समय भी तय किया गया था।
इससे पहले Arjun Gopal मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कई दिशानिर्देश जारी किए थे। कोर्ट के पुराने आदेशों में बोरियम जैसे प्रतिबंधित रसायनों और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी सख्त प्रावधान रहे हैं।
अभी क्या तय हुआ है?
- पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में कोर्ट नहीं है।
- 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।
- आतिशबाजी के लिए विशेष समय तय किया जाएगा।
- बोरियम आधारित पटाखों पर CPCB की रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक आएगी।
- ‘लड़ी’ या जॉइंट पटाखों पर शर्तों के साथ अनुमति के प्रस्ताव पर विचार हो रहा है।
- किन पटाखों की अनुमति होगी, इसका अंतिम स्वरूप आगे की सुनवाई में स्पष्ट होगा।
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