Author: अवधेश कुमार मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार

awdhesh kumar mishra

जहाँ हर खबर एक ज़िम्मेदारी है, और हर शब्द एक वचन। 25 सालों से अधिक के सफर में मैंने टीवी और प्रिंट मीडिया के हर पड़ाव को अपनी नज़रों से देखा, अनुभव किया और उसके माध्यम से समाज के सामने सच को रखा। NEWS18 उत्तराखंड में स्टेट हेड/ असाइनमेंट एडीटर रहते हुए मैं न केवल ख़बरों की निगरानी करता रहा, बल्कि हर मुश्किल घड़ी में, चाहे वह चुनावी घमासान हो या हिमालयी आपदा, सीधे मैदान में उतरकर रिपोर्टिंग करता रहा। सहारा टीवी, ETV, ZEE NEWS, जैन टीवी - हर मंच पर मैंने कंटेंट की आत्मा को समझते हुए समाज के उन मुद्दों को उठाया जिन पर अक्सर चुप्पी छाई रहती है। ईटीवी उर्दू के लिए 'हमारे मसाइल', 'गुफ्तगू', और 'कुछ लम्हें फुर्सत के' जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए मैंने केवल बातें नहीं कीं, संवाद रचे। मेरे लिए पत्रकारिता महज़ सूचना देने का माध्यम नहीं, वह समाज की नब्ज़ है। और इस नब्ज़ को पकड़ने की कला मैंने अपने अनुभव, अध्ययन और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से मिले ज्ञान से सीखी है। आज भी जब मैं कैमरे के पीछे या कलम के सामने होता हूँ, तो मन में केवल एक विचार होता है - "जो कहूँ, वह सत्य हो। और जो सत्य हो, वह समाज के काम आए।" यह मेरी यात्रा है, जो एक पत्रकार तक सीमित नहीं, एक ज़िम्मेदार नागरिक की जो संवाद को ही बदलाव का सबसे बड़ा साधन मानता है।

लोहिया ट्रस्ट की कमान शिवपाल यादव से अखिलेश यादव के हाथ आने के बाद समाजवादी परिवार की पुरानी राजनीतिक कहानी फिर चर्चा में है। 2017 के विवाद और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस बदलाव के क्या मायने हैं?

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खड़गपुर की IPS अधिकारी बुशरा बानो के तबादले ने एक बार फिर भाषा, धर्म, प्रशासन और राजनीति के बीच खिंची उस रेखा पर बहस छेड़ दी है, जिसे लोकतंत्र में बेहद सावधानी से देखे जाने की जरूरत है। अब सवाल यह है कि किसी अफसर का तबादला सरकारी फाइल और प्रशासनिक जरूरत के आधार पर होगा या उसके मुंह से निकले शब्दों का धर्म देखकर? पश्चिम बंगाल के खड़गपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो का 14 सितंबर को तबादला कर दिया गया। उन्हें राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट नियुक्त…

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आरक्षण सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन बदलते भारत में इसकी समीक्षा भी जरूरी है। सामाजिक पिछड़ापन, आर्थिक कमजोरी, शिक्षा, क्षेत्र और वास्तविक प्रतिनिधित्व को साथ देखकर अधिक न्यायपूर्ण व्यवस्था कैसे बनाई जा सकती है

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तीस्ता-6 और उत्तराखंड की सुरंग दुर्घटनाओं के बीच यह सवाल गंभीर हो गया है कि देश में सुरंग निर्माण के दौरान मजदूरों की सुरक्षा और जवाबदेही को आखिर कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।

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FSSAI की व्हिस्की और रम उत्पादों पर हालिया कार्रवाई ने भारतीय शराब उद्योग में नई बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ कंपनियों की लेबलिंग का नहीं, बल्कि यह भी है कि यदि नियामकीय कमी वर्षों से मौजूद थी तो कार्रवाई अब क्यों हुई?

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यशवंत वर्मा मामले ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, जवाबदेही और संविधान की सर्वोच्चता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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क्या भारत की सारी व्हिस्की नकली है? FSSAI की हालिया कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इस विशेष रिपोर्ट में जानिए ENA क्या है, फ्लेवर्ड स्पिरिट और पारंपरिक व्हिस्की में क्या अंतर है, FSSAI को किस बात पर आपत्ति है, उद्योग का पक्ष क्या है और उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर पड़ सकता है

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भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने 12 वर्षों के शोध के बाद भारत में तितली और पतंग की 13,703 प्रजातियों की पहली व्यापक वैज्ञानिक सूची प्रकाशित की है। यह विश्व की ज्ञात लेपिडोप्टेरा प्रजातियों का लगभग 8.25 प्रतिशत है।

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1913 में स्थापित यह क्लब क्यों हमेशा सत्ता, प्रभाव और अभिजात वर्ग के प्रतीक के रूप में चर्चा में रहा? पढ़िए इतिहास, विवाद और कानूनी लड़ाई पर आधारित यह विशेष रिपोर्ट।

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करीब छह वर्षों के अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले स्थित शिपकी ला से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू हो गया है। सदियों पुराने सिल्क रूट का हिस्सा रहे इस मार्ग के खुलने से सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, स्थानीय व्यापार, रोजगार और सांस्कृतिक संबंधों को नई उम्मीद मिली है।

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