बुलंदशहर से गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मांगी हिरासत; CJP पक्ष के वकील ने कहा- नियमित कोर्ट में सुनवाई का इंतजार करते रहे, बाद में जज के आवास पर पेश किए जाने की मिली जानकारी
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। दिल्ली पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद संबंधित जज के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद पुलिस को एक दिन की हिरासत मिली। हालांकि, इस पेशी की प्रक्रिया को लेकर CJP से जुड़े पक्ष के वकील ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वे नियमित अदालत में सुनवाई शुरू होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन बाद में पता चला कि आरोपी को जज के आवास पर पेश किया गया।
यह मामला एक वायरल पॉडकास्ट के बाद फिर राष्ट्रीय चर्चा में आया। वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का दावा करते सुनाई देते हैं। इसके बाद CJP, विपक्षी नेताओं और अन्य समर्थकों ने दिल्ली पुलिस से उनकी गिरफ्तारी और कड़ी धाराएं लगाने की मांग की। दिल्ली पुलिस ने दूसरी ओर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया और कहा कि जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की गई।
बुलंदशहर से पकड़े गए स्वतंत्र भारद्वाज
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने 4 सितंबर को बुलंदशहर में स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिया। खबरों के अनुसार पुलिस टीम ने उन्हें करीब दोपहर 2 बजे उनके घर से पकड़ा। कुछ अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि पुलिस के पहुंचने से पहले वह स्थान बदलने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद शनिवार को उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ी।

CJP ने उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान CJP नेताओं के साथ कुछ राजनीतिक प्रतिनिधि भी पहुंचे। पुलिस से बातचीत के बाद FIR में SC/ST Act से जुड़ी धाराएं जोड़ने की जानकारी सामने आई और बाद में पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की।
जज के आवास पर पेश किए जाने का आरोप
इस मामले में आज सबसे दिलचस्प कानूनी सवाल पेशी की प्रक्रिया को लेकर उठा है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारी के वकील ऋषव रंजन ने कहा कि उनकी टीम अदालत में सुनवाई का इंतजार कर रही थी। उनके मुताबिक बाद में पता चला कि लीगल-एड काउंसिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ी और आरोपी को संबंधित जज के कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स स्थित आवास पर पेश किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतने गंभीर मामले में पुलिस ने केवल एक दिन की हिरासत क्यों मांगी।
दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों में यह दर्ज है कि स्वतंत्र भारद्वाज को संबंधित जज के सामने पेश किया गया और एक दिन की पुलिस हिरासत दी गई। इसलिए नियमित अदालत की प्रक्रिया को लेकर वकील की आपत्ति और जज के समक्ष पेशी-दोनों तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मामला जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित झड़प से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की गई और उनके सिर में चोट आई।
बाद में एक पॉडकास्ट क्लिप वायरल हुई, जिसमें भारद्वाज कथित तौर पर इस घटना का बखान करते दिखाई दिए। Indian Express और India Today की रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने हमले को लेकर ऐसी बातें कहीं जिन्हें CJP ने लगभग खुले तौर पर अपराध की स्वीकारोक्ति के रूप में पेश किया। इसी वीडियो के बाद मामले ने राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर तेजी से तूल पकड़ा।

“राजनीतिक पहुंच” से बचने का दावा, पुलिस ने नकारा
वायरल वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते सुनाई देते हैं कि घटना के बाद वह जेल नहीं गए और एक राजनीतिक व्यक्ति की मदद से कार्रवाई से बच गए। इस दावे ने मामले को केवल मारपीट के आरोप तक सीमित नहीं रहने दिया।
CJP और कुछ विपक्षी नेताओं ने इसी आधार पर पुलिस से पूछा कि यदि किसी आरोपी ने सार्वजनिक रूप से ऐसी बातें कही थीं तो उस पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई। दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप को तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार बताया। नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने कहा कि जांच कानून के अनुसार की गई और आरोपी समेत दो लोगों से पूछताछ की गई थी।
चोट कितनी गंभीर थी? पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावों में अंतर
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू चोट की गंभीरता है। CJP पक्ष का कहना है कि संजय कुमार को सिर में गंभीर चोट लगी और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। एक वकील ने दावा किया कि सिर में कई टांके लगे थे।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट को “simple” बताया गया और पुलिस के अनुसार सिर पर चोट एक स्टील के कड़े से लगी थी। पुलिस ने खोपड़ी टूटने की बात का समर्थन नहीं किया।
इसलिए “खोपड़ी फोड़ दी गई” या “खोपड़ी टूट गई” जैसे दावों को अभी आरोप/वायरल बयान के तौर पर ही लिखना उचित है, मेडिकल रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं।
FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ी गईं
CJP ने आरोप लगाया कि शुरुआती FIR में स्वतंत्र भारद्वाज पर हल्की धाराएं लगाई गई थीं और पुलिस से SC/ST Act समेत अधिक गंभीर प्रावधान जोड़ने की मांग की गई। शुक्रवार के प्रदर्शन और बातचीत के बाद पुलिस ने FIR में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act से संबंधित धाराएं जोड़े जाने की पुष्टि की।
CJP की ओर से यह भी मांग की गई कि घटना की परिस्थितियों और चोट की प्रकृति के आधार पर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी कठोर धारा पर विचार किया जाए। पुलिस ने कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर होगी।
नाबालिग प्रदर्शनकारी की शिकायत के बाद POCSO की नई FIR
इस मामले ने एक और गंभीर मोड़ तब लिया जब नाबालिग प्रदर्शनकारी ने कथित ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न को लेकर शिकायत दी। इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ POCSO Act के तहत अलग FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ BNS और Information Technology Act के प्रावधान भी लगाए गए हैं।
इस तरह अब स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ घटनाक्रम में कम-से-कम दो अलग कानूनी पहलू सामने हैं-जंतर-मंतर की कथित मारपीट और नाबालिग से जुड़ी ऑनलाइन धमकी/उत्पीड़न की शिकायत।
संसद मार्ग थाने पर क्यों जुटे CJP और राजनीतिक नेता?
CJP का आरोप था कि जंतर-मंतर की घटना के बाद पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शन में CJP नेताओं के अलावा आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद, कांग्रेस से जुड़े प्रतिनिधि और पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और FIR में कड़ी धाराएं जोड़ने की मांग की। बाद में पुलिस ने SC/ST Act की धाराएं जोड़े जाने की पुष्टि की।
पुलिस के सामने अब क्या है सबसे बड़ा सवाल?
स्वतंत्र भारद्वाज की एक दिन की पुलिस हिरासत अब जांच का अगला चरण है। पुलिस को कथित मारपीट की वास्तविक भूमिका, घटनास्थल के वीडियो, गवाहों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और वायरल पॉडकास्ट/वीडियो की सामग्री का मिलान करना होगा।
साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो में किए गए दावों और घटनास्थल से सामने आए वास्तविक साक्ष्यों में कितना मेल है। पुलिस ने पहले कहा था कि स्वतंत्र भारद्वाज और दूसरे आरोपी से पूछताछ की जा चुकी थी और आगे चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
अभी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं
यह पूरा मामला फिलहाल जांच के चरण में है। स्वतंत्र भारद्वाज पर लगे आरोपों को अदालत में अभी अंतिम रूप से साबित नहीं किया गया है। एक दिन की पुलिस हिरासत भी दोष सिद्ध होने का संकेत नहीं है, बल्कि जांच के लिए लिया गया न्यायिक कदम है।
पेशी की प्रक्रिया को लेकर CJP पक्ष के वकील की आपत्ति भी फिलहाल एक पक्ष का आरोप है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस का अपना पक्ष मौजूद है। इसलिए मामले की रिपोर्टिंग में पुलिस, शिकायतकर्ता पक्ष, बचाव पक्ष और अदालत की वास्तविक कार्यवाही-चारों को अलग-अलग दर्ज करना जरूरी है।
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