नई दिल्ली। वकीलों के अखिल भारतीय संगठन ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन का AILU दिल्ली राज्य सम्मेलन साकेत कोर्ट में संपन्न हुआ। सम्मेलन में जंतर-मंतर आंदोलन और उसके बाद के हालात और वकीलों की भूमिका पर मंथन हुआ। सम्मेलन में 31 सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी का चुनाव किया गया।
Gen-Z के विरोध-प्रदर्शन और वकीलों की भूमिका पर चर्चा
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए एआईएलयू के राष्ट्रीय महामंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पीवी सुरेंद्रनाथ ने बताया कि कैसे Gen-Z के विरोध-प्रदर्शन ने लोगों का ध्यान खींचा है और पुरानी पीढ़ियों के मन से डर को खत्म किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ये बात बेहतर समझती है और युवाओं को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह वकीलों की जिम्मेदारी है कि हम युवाओं के जोश को कम न होने दें।

‘भारत में असहमति का भविष्य-पुलिस, विरोध और संवैधानिक अधिकार’ पर सेमिनार
सम्मेलन में दो विषयों पर सेमिनार आयोजित किए गए। पहले सेमिनार का विषय था ‘भारत में असहमति का भविष्य-पुलिस, विरोध और संवैधानिक अधिकार’। इस विषय पर अपनी बात रखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ पढ़ाने वाली डॉ. अनुमेहा मिश्रा ने कहा कि भले ही आजादी के बाद भारत का संविधान सोच के लिहाज से प्रगतिशील था, लेकिन देश ने औपनिवेशिक दौर के दमनकारी तंत्र, कानूनों और पुलिस व्यवस्था को बनाए रखा। उन्होंने कहा कि कोई प्रदर्शन किसी सरकार की अनुमति का मोहताज कैसे हो सकता है। असहमति की आवाज को जिंदा रखना ही लोकतंत्र है। लेकिन विरोध प्रदर्शन करने वालों को एंटी नेशनल और आतंकी करार दिया जाता है।
डॉ. गौहर रज़ा ने साम्राज्यवाद और नई चुनौतियों पर रखी बात
इस मौके पर दूसरे सेमिनार को जाने-माने वैज्ञानिक और कवि डॉ. गौहर रज़ा ने ‘साम्राज्यवाद: मौजूदा हालात और नई चुनौतियां’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि दुनिया अब आपस में जुड़ी हुई है। उन्होंने सूरत के हीरा बाजार में आए संकट का उदाहरण दिया जहां ट्रंप के टैरिफ की वजह से कई हीरा पॉलिशिंट यूनिट और छोटे कारोबार बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी बढ़ने की वजह से माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल से निकालने के लिए मजबूर हो गए हैं क्योंकि वे अब फीस नहीं भर पा रहे हैं।
सुजाता मधोक ने जंतर-मंतर और विरोध प्रदर्शन की जगह का मुद्दा उठाया
इस मौके पर दिल्ली यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स की अध्यक्ष सुजाता मधोक ने कहा कि पिछले कुछ सालों में असहमति की आवाज को दबाने के कई तरीके अपनाए गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1990 के दशक में संसद के सामने विरोध प्रदर्शन के लिए ‘बोट क्लब’ का बड़ा मैदान खुला रहता था। फिर पुलिस ने विरोध प्रदर्शन की जगह को संसद से कुछ किलोमीटर दूर जंतर-मंतर रोड तक सीमित कर दिया। अब बैरिकेड्स लगाकर उस जगह को और भी सीमित कर दिया गया है और रात भर वहां रुकने की इज़ाज़त भी नहीं है, जबकि पहले ऐसा आम बात थी।

31 सदस्यीय नयी राज्य कार्यकारिणी का गठन
सम्मेलन में 31 सदस्यीय नयी राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें वरिष्ठ वकील अनिल कुमार चौहान को अध्यक्ष, संजय कुमार को सचिव और अद्रीजा भद्रा को कोषाध्यक्ष चुना गया। सम्मेलन में दिल्ली भर से आए वकीलों ने भविष्य में संगठन को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
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