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Home»धर्म और अध्यात्म»निष्काम सेवा से अहंकार का क्षय, भक्ति की पहली सीढ़ी समर्पण: परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती
धर्म और अध्यात्म

निष्काम सेवा से अहंकार का क्षय, भक्ति की पहली सीढ़ी समर्पण: परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती

lalmohan maharajBy lalmohan maharajAugust 12, 2026Updated:August 12, 2026No Comments4 Mins Read12 Views
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स्वामी निरंजनानंद सरस्वती Nishkam Sevaऔर भक्ति पर प्रवचन देते हुए
Nishkam Seva पादुका दर्शन स्थित संन्यास पीठ में भागवत कथा के तीसरे दिन स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने निष्काम सेवा और समर्पण को भक्ति का आधार बताया।
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मुंगेर। Nishkam Seva। पादुका दर्शन स्थित संन्यास पीठ में परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती की पद्म जयंती एवं चातुर्मास अनुष्ठान के तहत चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, त्याग और निष्काम सेवा को आध्यात्मिक साधना का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि समर्पण और सजगता के साथ अपने भीतर का निरीक्षण करना है। समर्पण भक्ति की पहली सीढ़ी है। जब व्यक्ति बिना फल की अपेक्षा के सेवा करता है, तब उसके भीतर का अहंकार और स्वार्थ धीरे-धीरे क्षीण होने लगता है।

Nishkam Seva से अहंकार और स्वार्थ का क्षय

स्वामी निरंजनानंद ने कहा कि सेवा केवल किसी दूसरे की सहायता करना नहीं, बल्कि स्वयं को भीतर से बदलने की साधना है। निष्काम भाव से किया गया कर्म मन की संकीर्णता और नकारात्मकता को कम करता है तथा विनम्रता और कृतज्ञता का भाव विकसित करता है। उन्होंने आत्मशुद्धि को सतत प्रक्रिया बताते हुए कहा कि यह एक दिन में पूरी नहीं होती। इसके लिए हर दिन एक छोटा संकल्प लेना और उसे पूरी निष्ठा से पूरा करना चाहिए। निरंतर अभ्यास ही विचार, व्यवहार और जीवन में परिवर्तन लाता है। निष्काम सेवा में कर्म तो होता है, लेकिन कर्म का अहंकार नहीं; सहायता होती है, लेकिन उपकार का भाव नहीं।

भजन और संकीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

भागवत कथा के दौरान मानस कोकिला कृष्णा मिश्रा ने भजन और संकीर्तन के माध्यम से कथा के आध्यात्मिक भाव को और गहराई दी। “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः” के सामूहिक उच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने भक्ति का अनुभव किया। “भजो राधे कृष्णा, गोपाल कृष्णा, श्री राधेश्याम” जैसे संकीर्तन में श्रद्धालु भाव-विभोर होकर शामिल हुए। भजन और संकीर्तन के माध्यम से यह संदेश उभरा कि ईश्वर-स्मरण केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना को भी निर्मल करने का माध्यम है।

परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए।1

कथा में ‘मैकदा’ और ‘जाम’ जैसे प्रतीकों को ईश्वर के प्रति गहन प्रेम और आत्मसमर्पण के आध्यात्मिक भाव से जोड़ा गया। भक्ति को बाहरी कर्मकांड के बजाय भीतर के भाव से जोड़ते हुए कहा गया कि जब मनुष्य अपने अहंकार को छोड़कर ईश्वर के प्रति समर्पित होता है, तभी भक्ति जीवन का अनुभव बनती है।

मन के विच्छेद को समाधि में बदलने की कथा

कथा में राजा परीक्षित और शुकदेव के प्रसंग के माध्यम से मृत्यु-बोध, वैराग्य और आत्मज्ञान की चर्चा हुई। कथा परंपरा के अनुसार, मृत्यु का समय निकट जानकर राजा परीक्षित गंगा तट पर पहुंचे, जहां शुकदेव ने उन्हें भागवत का ज्ञान दिया। संदेश यह कि जीवन की अनिश्चितता के बीच मनुष्य को बाहरी भय से नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, भक्ति और वैराग्य से भीतर की स्थिरता खोजनी चाहिए।

कथा के दौरान स्त्री के सात दिव्य गुणों—कीर्ति, मधुर वाणी, स्मृति, मेधा, धैर्य, क्षमा और करुणा—का भी उल्लेख किया गया। माता देवहूति के प्रसंग के माध्यम से आत्मज्ञान और सांख्य दर्शन की चर्चा हुई।

भगवान के नाम स्मरण, सत्संग और सदाचार को बताया शांति का मार्ग

भागवत के संदेश के रूप में भगवान के नाम का स्मरण, सत्संग, कथा-श्रवण, निःस्वार्थ भाव, वैराग्य और सदाचार को मन की शांति का मार्ग बताया गया। कहा गया कि गुरु की कृपा से साधना का वास्तविक अर्थ समझ में आता है। सद्गुरु मनुष्य को बाहरी संपदा नहीं, भीतर की संपदा अर्जित करना सिखाते हैं। कथा में यह भाव भी उभरा कि जीवन का लक्ष्य केवल मुक्ति की कामना नहीं, बल्कि भक्ति में जीवन को रूपांतरित करना है। भगवान की शरण में जाने वाले की रक्षा का संदेश वराह अवतार, प्रह्लाद और ध्रुव के प्रसंगों से जोड़ा गया।

तीसरे दिन की कथा का केंद्रीय संदेश

कार्यक्रम के आरंभ में स्वामी शिवध्यानम ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया और पिछले दिन की कथा के प्रसंगों को आगे की कथा से जोड़ते हुए उसकी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि स्पष्ट की। तीसरे दिन की कथा का केंद्रीय संदेश यही रहा कि भक्ति बाहर की गतिविधि से अधिक भीतर के परिवर्तन का नाम है। निष्काम सेवा उस परिवर्तन की साधना है और प्रतिदिन लिया गया छोटा-सा संकल्प आत्मशुद्धि की दिशा में एक निरंतर कदम।

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लाल मोहन महाराज मुंगेर प्रमंडल के चर्चित क्राइम रिपोर्टर हैं। वे पिछले तीन दशक से इस प्रमंडल में क्राइम न्यूज कवर कर रहे हैं। क्राइम के अलावा ये राजनीति और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। कई समाचार पत्रों में व्यूरो प्रमुख के पद पर काम कर चुके लाल मोहन महाराज भारतीय पत्रकार संघ ए.आई. जे के प्रदेश अध्यक्ष भी है।

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