नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी सावारकर मानहानि केस को लेकर राहुल गांधी के बयान से जुड़े लखनऊ के आपराधिक मानहानि मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन और संबंधित आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि मामले में अभियोजन चलाने के लिए जरूरी स्वीकृति हासिल किए जाने का उल्लेख उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में नहीं है। ऐसे में लखनऊ ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन और शिकायत पर आधारित कार्यवाही को जारी नहीं रखा जा सकता।
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क्या है राहुल गांधी सावरकर मानहानि केस?
यह मामला राहुल गांधी की ओर से सावरकर को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर के बारे में आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की थीं। इसी आधार पर लखनऊ में आपराधिक शिकायत दाखिल की गई थी और बाद में ट्रायल कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अब उस समन के साथ-साथ शिकायत और उससे जुड़ी कार्यवाही को भी निरस्त कर दिया है। कोर्ट के सामने मुख्य कानूनी सवाल अभियोजन के लिए जरूरी स्वीकृति से जुड़ा था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में ऐसी स्वीकृति दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं था।

25 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
इससे पहले 25 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उस समय अदालत ने स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने की चेतावनी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने उस समय लखनऊ ट्रायल कोर्ट की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन पर रोक लगा दी थी। अदालत ने यह भी कहा था कि स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बयान देते समय इतिहास और तथ्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर पर की थी टिप्पणी
यह मामला नवंबर 2022 में महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी की ओर से सावरकर को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़ा था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने सावरकर को अंग्रेजों का सेवक बताया और उनके अंग्रेजों से पेंशन लेने की बात कही थी। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर लखनऊ में आपराधिक शिकायत दाखिल की गई थी।
कोर्ट ने अभियोजन की स्वीकृति को माना अहम
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन के लिए जरूरी सरकारी स्वीकृति का मुद्दा सामने आया। अदालत ने पाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में इस तरह की स्वीकृति दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है।
इसी कानूनी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ ट्रायल कोर्ट के समन को रद्द कर दिया और शिकायत तथा उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को भी निरस्त कर दिया।
राहुल गांधी के लिए क्या है फैसले का मतलब?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सावरकर टिप्पणी से जुड़े लखनऊ के इस आपराधिक मामले में राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन और संबंधित कार्यवाही समाप्त हो गई है। यह फैसला मामले की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है और इसका आधार अभियोजन के लिए आवश्यक स्वीकृति का अभाव है।
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