PART 5 | नक्शे पर खुली जमीन की अगली परत
कैडस्ट्रल मैप से दिखा जमीन का प्रस्तावित इस्तेमाल, अब “सवाल-जमीन” बदलेगी कैसे?
पटना। पटना के दक्षिणी हिस्से में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप सिर्फ नई कॉलोनियां बसाने की योजना नहीं है। बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में इस पूरे इलाके के लिए अलग-अलग लैंड यूज तय करने की तस्वीर सामने रखी गई है। नक्शों को कैडस्ट्रल मैप के साथ देखने पर यह समझ आता है कि मौजूदा जमीन के अलग-अलग हिस्सों को भविष्य में किस तरह के इस्तेमाल के लिए प्रस्तावित किया गया है।
योजना का नोटिफाइड स्पेशल एरिया करीब 81,730 एकड़ का है। इसमें 273 राजस्व गांव और नौ कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक शामिल हैं। वहीं करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया, जिसमें 19 राजस्व गांव हैं, इसे इस पूरे प्रोजेक्ट का शुरुआती इम्प्लीमेंटेशन जोन बनाया गया है। योजना के मुताबिक इसी कोर एरिया में पहले टाउन प्लानिंग स्कीम्स, ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक फैसिलिटी विकसित की जानी हैं।
कैडस्ट्रल मैप में जमीन के टुकड़ों पर दिखता है प्रस्तावित इस्तेमाल
बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में प्रपोज्ड लैंड यूज मैप को कैडस्ट्रल मैप के साथ भी दिखाया गया है। इस ओवरले से यह देखा जा सकता है कि मौजूदा कैडस्ट्रल पार्सल यानी खसरा/प्लॉट या भू-नक्शे में दर्ज जमीन किस प्रस्तावित लैंड यूज के क्षेत्र में पड़ रही है। कोर एरिया के लिए अलग प्रपोज्ड लैंड यूज मैप भी दिया गया है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सीमा है।
कैडस्ट्रल मैप से यह पता चलता है कि कौन-सा भूखंड या Land Parcel किस Proposed Land Use के दायरे में आ रहा है। लेकिन केवल इस नक्शे से उस जमीन के मालिक का नाम निर्धारित नहीं किया जा सकता। किसान या जमीन मालिक की पहचान के लिए अलग राजस्व अभिलेखों की जरूरत होगी।
इसलिए इस पड़ताल में हम एक-एक प्लॉट के मालिक का नाम निकालने के बजाय यह देख रहे हैं कि नक्शे पर जमीन का भविष्य क्या तय किया गया है।
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की पूरी योजना पढ़िए FreelancerPost की Pillar Story PART 1
81,730 एकड़ की टाउनशिप के लिए जमीन कैसे जुटाएगी सरकार? जानिए Freelancerpost की Land Story PART 2

सबसे ज्यादा जमीन रेजिडेंशियल के लिए प्रस्तावित
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक Proposed Land Use Distribution में रेजिडेंशियल/आवासीय सबसे बड़ी लैंड यूज कैटेगरी है।
| Proposed Land Use | क्षेत्रफल | हिस्सा |
|---|---|---|
| Residential | 28,723.95 एकड़ | 35.18% |
| Urban Agriculture | 17,616.13 एकड़ | 21.57% |
| Transport & Communication | 6,237.60 एकड़ | 7.64% |
| TOD Zone | 5,406.00 एकड़ | 6.62% |
| Recreational | 4,774.86 एकड़ | 5.85% |
| Industrial | 4,651.67 एकड़ | 5.70% |
| Green Belt | 3,606.00 एकड़ | 4.42% |
| Public Purpose | 3,319.56 एकड़ | 4.07% |
| Commercial | 3,246.03 एकड़ | 3.98% |
| Canal/Streams/Drains | 1,898.66 एकड़ | 2.33% |
| Water Bodies | 1,814.12 एकड़ | 2.22% |
| Public Utilities | 359.54 एकड़ | 0.44% |
योजना की अपनी तालिका में कुल प्रस्तावित Land Use 81,654.12 एकड़ दिया गया है।
यानी नक्शे पर सिर्फ मकान नहीं हैं
नक्शे को देखने पर यह भी साफ होता है कि प्रस्तावित शहर की संरचना सिर्फ रेजिडेंशियल क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसमें बड़े रेजिडेंशियल सेक्टर्स, कमर्शियल एरिया, सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट यानी CBD, TOD जोन, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स एरिया, सरकारी एवं इंस्टीट्यूशनल एरिया, स्पोर्ट्स और रिक्रिएशन एरिया, ग्रीन बेल्ट, अर्बन एग्रीकल्चर, वाटर बॉडीज, ड्रेनेज नेटवर्क, सड़क और ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर सभी को अलग-अलग जगह दी गई है।
योजना में रेजिडेंशियल एरिया को अलग-अलग सेक्टर्स में व्यवस्थित करने की बात है। CBD और MRTS/TOD कॉरिडोर के आसपास ज्यादा घनत्व और बाहरी हिस्सों में अपेक्षाकृत कम घनत्व रखने का प्रस्ताव है।

कोर एरिया के आसपास बनेगा शहर का सबसे घना हिस्सा
बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट यानी CBD को कोर एरिया के भीतर और उसके आसपास विकसित करने की बात कही गई है। यह इलाका कमर्शियल, फाइनेंशियल, एडमिनिस्ट्रेटिव और कल्चरल सेंटर के रूप में विकसित किया जाना है। यहां ऑफिस, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, गवर्नमेंट ऑफिसेज, होटल्स, रिटेल, इंटरटेनमेंट और हाई-राइज रेजिडेंशियल डेवलपमेंट जैसी गतिविधियों का प्रस्ताव है।
यानी 3,008 एकड़ का कोर एरिया सिर्फ शुरुआती निर्माण क्षेत्र नहीं है। इसके आसपास बनने वाला सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट यानी CBD पूरे प्रस्तावित शहर की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने वाला है।
सड़क के किनारे भी बदलेगा जमीन का इस्तेमाल
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में बिहटा-सरमेरा रोड (NH-131G) के प्रमुख हिस्सों के साथ 200 मीटर चौड़े कमर्शियल कॉरिडोर का प्रस्ताव है।
इस कॉरिडोर में रीजनल कमर्शियल एक्टिविटीज, बिजनेस पार्क, होटल्स, रिटेल सेंटर्स, ऑफिसेज और सर्विस एस्टैब्लिशमेंट्स विकसित किए जाने की बात कही गई है। दूसरी ओर दो 90 मीटर चौड़ी एक्सियल रोड्स, 60 मीटर रिंग रोड और कई 45 तथा 30 मीटर चौड़ी आर्टेरियल रोड्स यानी मुख्य सड़कों का प्रस्ताव है। इन कॉरिडोर पर MRTS नेटवर्क भी प्रस्तावित है।
यानी भविष्य की तस्वीर में सड़क और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क खुद जमीन के इस्तेमाल को तय करने वाले बड़े कारक होंगे।
TOD Zone में बढ़ेगा Development Intensity
प्रस्तावित MRTS कॉरिडोर यानी मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर के आसपास करीब 500 मीटर का TOD Influence Zone यानी ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट जोन रखा गया है।
इस क्षेत्र में रेजिडेंशियल, कमर्शियल, ऑफिस, हॉस्पिटैलिटी, इंस्टीट्यूशनल और रिक्रिएशनल गतिविधियों को मिलाकर ज्यादा घनत्व वाला डेवलपमेंट प्रस्तावित है। योजना में हायर FAR और ज्यादा डेवलपमेंट इंटेंसिटी को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।
इसका मतलब यह है कि भविष्य में सिर्फ सड़क ही नहीं, सड़क और MRTS की स्थिति के आधार पर भी आसपास की जमीन का उपयोग और विकास का स्वरूप बदल सकता है।
दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स का भी बड़ा हिस्सा
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग क्षेत्र प्रस्तावित किए गए हैं। आमस–दरभंगा एक्सप्रेसवे के पूर्वी हिस्से में इंडस्ट्रियल हब, बाजार समिति के पास एग्रीकल्चर-बेस्ड इंडस्ट्रियल एरिया और गवासपुर हॉल्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब प्रस्तावित है।
इसका मतलब है कि प्रस्तावित टाउनशिप में रहने की जगह, व्यापार, उद्योग और माल ढुलाई चारों की योजना एक साथ बनाई गई है।

जमीन के बीच से गुजरेंगे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक दो 90 मीटर एक्सियल रोड्स और 60 मीटर रिंग रोड प्रस्तावित हैं। SH-01 को 60 मीटर राइट ऑफ वे तक चौड़ा करने तथा कुछ राष्ट्रीय/राज्य मार्गों को भी 60 मीटर राइट ऑफ वे तक विकसित करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा पूरे टाउनशिप में 27 यूटिलिटी साइट्स प्रस्तावित हैं। इनका इस्तेमाल वाटर ट्रीटमेंट, सीवेज ट्रीटमेंट, पंपिंग स्टेशन, सबस्टेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और टेलीकम्युनिकेशन जैसी सुविधाओं के लिए किया जाना है।
यानी भविष्य की जमीन की तस्वीर केवल रेजिडेंशियल बनाम एग्रीकल्चर की नहीं है। बीच में सड़क, MRTS, यूटिलिटीज, ड्रेन्स, ग्रीन बेल्ट, पार्क और पब्लिक फैसिलिटीज का पूरा नेटवर्क भी आएगा।
🔎 नक्शे का सबसे महत्वपूर्ण सवाल
जमीन बदलेगी कैसे?
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 खुद कहता है कि कोर एरिया में डेवलपमेंट टाउन प्लानिंग स्कीम्स के जरिए शुरू किया जाएगा। इसका अर्थ है कि अभी नक्शे पर जो लैंड यूज दिखाई दे रहा है, उसे जमीन पर लागू करने के लिए आगे टाउन प्लानिंग स्कीम्स, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और लैंड डेवलपमेंट की प्रक्रिया चलेगी।
नक्शे पर जिस जमीन को रेजिडेंशियल, कमर्शियल, रोड, TOD या किसी दूसरे लैंड यूज में रखा गया है, उस जमीन को वास्तविक योजना में कैसे विकसित किया जाएगा?
यही सवाल हमारी अगली कड़ी का आधार बनेगा।
एक और सवाल : 81,730 एकड़ और 81,654.12 एकड़ में अंतर क्यों?
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में ग्रॉस प्लानिंग एरिया 81,730 एकड़ दिया गया है। वहीं Proposed Land Use Distribution की तालिका का कुल क्षेत्रफल 81,654.12 एकड़ है।
दोनों के बीच 75.88 एकड़ का अंतर है। यह जरूरी नहीं कि यह कोई गलती हो। इसके पीछे मैपिंग, क्लासिफिकेशन या प्लानिंग मेथोडोलॉजी का कारण हो सकता है। लेकिन प्रस्तावित प्लान में इस अंतर की स्पष्ट वजह सामने आए तो तस्वीर और साफ होगी।
इसलिए यह भी PMAA यानी पटना मेट्रोपोलिटन एरिया अथॉरिटी से पूछे जाने वाले सवालों में शामिल किया जाना चाहिए।
नक्शे ने बता दिया, अब जमीन पर बारी
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के नक्शे को कैडस्ट्रल मैप के साथ देखने पर एक बात साफ होती है। सरकार ने सिर्फ जमीन चिन्हित नहीं की है, बल्कि उसके संभावित भविष्य के इस्तेमाल की पूरी स्पैटियल स्ट्रक्चर तैयार की है।
रेजिडेंशियल से लेकर कमर्शियल, TOD, इंडस्ट्रियल, रोड्स, यूटिलिटीज, ग्रीन बेल्ट और अर्बन एग्रीकल्चर तक अलग-अलग लैंड यूज तय किए गए हैं। लेकिन नक्शा यह नहीं बताता कि किसी खास Parcel का मालिक कौन है। उसके लिए अलग राजस्व रिकॉर्ड जरूरी होंगे।
इसलिए इस रिपोर्ट में हमारा सवाल किसी एक किसान की जमीन तक सीमित नहीं है।
हमारा सवाल इससे बड़ा है–
जिस इलाके में आज गांव, खेत और मौजूदा बस्तियां हैं, वहां 2047 की इस प्रस्तावित शहर की तस्वीर जमीन पर उतरेगी कैसे?
यहीं से Part 6 शुरू होगा- Town Planning Scheme और जमीन जुटाने की प्रक्रिया।
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