कम उम्र में भी बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, खराब लाइफस्टाइल, स्मोकिंग, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को लेकर रहें सतर्क
दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हार्टअटैक बीमारी केवल बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के लोग भी हार्ट से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई बार शरीर में इसके शुरुआती संकेत दिखाई देते हैं, लेकिन लोग उन्हें सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
एम्स के कॉर्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश यादव कहते हैं कि सही दिनचर्या और बेहतर खान-पान दिल को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ हार्ट की सेहत को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच और किसी भी असामान्य लक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए।
हार्ट की बीमारियों के लक्षण कई बार एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं। ऐसे में लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
दृष्टि झा ने डॉ. राकेश यादव से हार्ट की बीमारी, उसके लक्षण, हार्ट अटैक, खराब लाइफस्टाइल, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, स्टेंट, हार्ट ट्रांसप्लांट और बचाव के उपायों को लेकर विस्तार से बातचीत की।
सवाल: किसी सामान्य व्यक्ति को कैसे पता चले कि उसका हार्ट बीमार हो रहा है?
डॉ. राकेश यादव: हृदय रोग आज एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। किसी सामान्य व्यक्ति के लिए यह पहचानना हमेशा आसान नहीं होता, क्योंकि हृदय रोग कई प्रकार के होते हैं। हालांकि, कुछ सामान्य लक्षण जरूर होते हैं।
अगर चलने पर सांस फूलने लगे, सीने में भारीपन महसूस हो, चक्कर आए या बार-बार बेहोशी की स्थिति बने, तो इन्हें हृदय रोग के संभावित संकेतों के रूप में देखा जाना चाहिए। हाथ या उंगलियों के नाखून नीले पड़ना भी एक संकेत हो सकता है।
अगर परिवार में किसी बुजुर्ग, बच्चे या महिला में इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो उन्हें डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।
सवाल: क्या हार्ट के बीमार होने से पहले शरीर कोई संकेत देता है?
डॉ. राकेश यादव: हां, हृदय की ज्यादातर बीमारियों में पहले से कुछ संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, एक्यूट हार्ट अटैक में कई बार पहले से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता।
अगर आपकी लाइफस्टाइल खराब है, आप हाइपरटेंसिव हैं, डायबिटिक हैं, स्मोकिंग करते हैं और अपनी जीवनशैली में बदलाव नहीं करते, तो अचानक हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
हार्ट अटैक में अचानक सीने में दर्द या दबाव महसूस होना और जबड़े के नीचे से सीने तक दबाव या दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं।
हार्ट अटैक के संभावित संकेत
सीने में भारीपन या दर्द, चलने पर सांस फूलना, चक्कर, असामान्य थकान या शारीरिक क्षमता में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सवाल: हार्ट की बीमारी के प्रमुख कारण क्या हैं?
डॉ. राकेश यादव: हृदय की बीमारियों के कई कारण हैं। सबसे सामान्य बीमारियों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज शामिल है, जिसमें हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है।
दूसरी बीमारी वाल्व से संबंधित होती है। भारत में, खासकर कम सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले लोगों में रूमेटिक हार्ट डिजीज के मामले देखे जाते हैं, जिसमें हृदय के वाल्व प्रभावित हो सकते हैं।
इसके अलावा हार्ट की मांसपेशियों से संबंधित बीमारी को कार्डियोमायोपैथी कहते हैं। जन्मजात संरचनात्मक हृदय रोग भी हो सकते हैं।
हृदय की इलेक्ट्रिकल कंडक्शन सिस्टम से जुड़ी समस्याओं में हार्ट बीट का कम या ज्यादा होना शामिल है। कुछ मामलों में सडन कार्डियक डेथ का खतरा भी हो सकता है।
इसके अलावा हृदय की झिल्ली से जुड़ी बीमारी, हृदय में ट्यूमर या संक्रमण जैसी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
सवाल: क्या खराब लाइफस्टाइल भी दिल की बीमारी का कारण बन सकती है?

डॉ. राकेश यादव: बिल्कुल। खराब लाइफस्टाइल कोरोनरी आर्टरी डिजीज के प्रमुख कारणों में से एक है, जिसे आम भाषा में हार्ट अटैक से जोड़ा जाता है।
खराब लाइफस्टाइल में मोटापा, स्मोकिंग, तंबाकू का सेवन, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित नहीं करना, तनाव और ड्रग एडिक्शन जैसी चीजें शामिल हैं।
अगर इन चीजों को नियंत्रित किया जाए तो बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सवाल: दिल खराब होने पर शरीर के किन अंगों पर असर पड़ सकता है?
डॉ. राकेश यादव: हमारा हृदय एक पंपिंग चैंबर की तरह काम करता है और शरीर के सभी अंगों तक रक्त पहुंचाता है। जब हृदय धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है तो उसका असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है। गंभीर स्थिति में शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं।
हार्ट अटैक के लक्षणों को गैस समझकर नजरअंदाज न करें
सवाल: हार्ट अटैक कब और कैसे आता है?
डॉ. राकेश यादव: हार्ट अटैक के सामान्य लक्षणों में अचानक सीने में भारीपन या तेज दर्द, घबराहट और सांस फूलना शामिल हैं। कुछ मामलों में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।
उम्र 40 वर्ष से अधिक हो या कम, इस तरह के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लोग कई बार इसे गैस का दर्द समझ लेते हैं और गैस की दवा ले लेते हैं। इससे इलाज में देरी हो सकती है।
एक्यूट हार्ट अटैक की स्थिति में जितनी जल्दी इलाज मिले, उतना ही हृदय को बचाने और गंभीर परिणामों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
सवाल: हार्ट अटैक क्यों होता है?
डॉ. राकेश यादव: हृदय की धमनियों में धीरे-धीरे कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है और वे संकरी होती जाती हैं। कई बार प्लाक अचानक फट सकता है और वहां खून का थक्का बन सकता है।
इससे धमनी बंद हो सकती है और जिस हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुकती है, वहां की हृदय मांसपेशी को नुकसान पहुंचने लगता है। इसी स्थिति को हार्ट अटैक कहा जाता है।
सवाल: हार्ट अटैक से प्रभावित व्यक्ति खुद अपनी मदद कैसे कर सकता है?
डॉ. राकेश यादव: सबसे जरूरी है कि लक्षणों को तुरंत पहचानें और जल्द से जल्द चिकित्सकीय मदद लें। खुद से इलाज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
अगर हार्ट अटैक के लक्षण महसूस हों और अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती हो, तो डॉक्टर की सलाह के अनुरूप तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। मरीज को अनावश्यक रूप से चलाने या खड़ा करके ले जाने के बजाय सुरक्षित तरीके से नजदीकी चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना चाहिए, जहां ECG जैसी सुविधा उपलब्ध हो।
साइलेंट हार्ट अटैक क्या है?
सवाल: साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है?
डॉ. राकेश यादव: साइलेंट हार्ट अटैक का मतलब यह है कि हार्ट अटैक तो हुआ, लेकिन उसके सामान्य लक्षण, खासकर सीने में तेज दर्द, स्पष्ट रूप से महसूस नहीं हुए।
उदाहरण के लिए डायबिटीज के मरीज को बहुत हल्का दर्द हुआ और उसने उसे नजरअंदाज कर दिया। बाद में जांच के दौरान पता चल सकता है कि पहले हार्ट अटैक हो चुका है।
इसमें भी जटिलताएं सामान्य हार्ट अटैक जैसी हो सकती हैं।
सांस फूलना भी हो सकता है दिल की बीमारी का संकेत
सवाल: क्या सांस की समस्या दिल की बीमारी से जुड़ी हो सकती है?
डॉ. राकेश यादव: हां। सांस फूलना हृदय रोग का एक महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति पहले दो मंजिल आसानी से चढ़ जाता था लेकिन अब एक मंजिल चढ़ने पर ही सांस फूलने लगे या सीने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सांस फूलने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें फेफड़ों की बीमारी भी शामिल है। लेकिन अगर लेटने पर सांस ज्यादा फूलती है या रात में सांस फूलने के कारण नींद खुलती है, तो यह गंभीर हृदय रोग का संकेत हो सकता है और चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
भारतीयों में कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा
सवाल: क्या भारत में विदेशों के मुकाबले हार्ट अटैक ज्यादा होता है?
डॉ. राकेश यादव: यह कहना सही नहीं होगा कि पांच-छह गुना ज्यादा होता है। लेकिन भारतीयों में हार्ट अटैक अपेक्षाकृत कम उम्र में होने की प्रवृत्ति देखी जाती है।
हमारे यहां हार्ट अटैक की औसत उम्र कम बताई जाती है। इसके पीछे जेनेटिक कारणों के साथ-साथ लाइफस्टाइल भी भूमिका निभाती है।
हमारे सामने एक बड़ी समस्या इलाज में देरी की भी है। दूर-दराज के इलाकों में हार्ट अटैक होने पर मरीज को अस्पताल पहुंचने में समय लग सकता है।
एक्यूट हार्ट अटैक में जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचना बहुत महत्वपूर्ण है। इलाज में जितनी देरी होगी, हृदय को नुकसान का खतरा उतना बढ़ सकता है।
कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज का पहले पता चल सकता है?
सवाल: क्या कोरोनरी आर्टरी में रुकावट का पहले पता लगाया जा सकता है?
डॉ. राकेश यादव: बिल्कुल। कई लोगों में एंजाइना की समस्या पहले से होती है। अगर तेज चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सीने में भारीपन या दर्द महसूस हो और पहले की तुलना में आपकी क्षमता कम हो गई हो, तो यह कोरोनरी आर्टरी डिजीज का संकेत हो सकता है।
अगर परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को हृदय रोग रहा है, या व्यक्ति डायबिटिक है, स्मोकिंग करता है अथवा हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है, तो जोखिम बढ़ सकता है।
इस तरह के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हार्ट को बीमारी से बचाने के लिए क्या करें?

सवाल: हार्ट की बीमारी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
डॉ. राकेश यादव: सबसे महत्वपूर्ण है जागरूकता। लोगों को हार्ट की बीमारी के लक्षणों को पहचानना सीखना चाहिए।
लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी है। स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन छोड़ना चाहिए। घर का खाना खाने और जंक फूड से बचने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि करें, वजन नियंत्रित रखें और स्वस्थ खान-पान अपनाएं।
अब सिर्फ 40 की उम्र के बाद ही हार्ट अटैक नहीं
सवाल: कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
डॉ. राकेश यादव: यह मानना अब सही नहीं है कि हार्ट अटैक सिर्फ 40 साल की उम्र के बाद ही होगा। हमने 18-19 साल की उम्र के मरीज भी देखे हैं।
अगर लाइफस्टाइल बहुत खराब है, परिवार में हृदय रोग का मजबूत इतिहास है, कम उम्र में मोटापा, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं और फिर भी लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं किया जाता, तो कम उम्र में भी हृदय रोग का खतरा हो सकता है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, खराब लाइफस्टाइल और परिवार में हृदय रोग का इतिहास रखने वाले लोगों को हार्ट हेल्थ को लेकर विशेष सतर्क रहना चाहिए।
हार्ट अटैक के बाद दवाएं और लाइफस्टाइल दोनों जरूरी
सवाल: हार्ट अटैक आने के बाद मरीज को क्या करना चाहिए?
डॉ. राकेश यादव: सबसे पहले जल्द से जल्द चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। जितनी जल्दी इलाज मिलेगा, हृदय को बचाने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
हार्ट अटैक के बाद कई मरीजों को लंबे समय तक दवाएं लेने की जरूरत पड़ सकती है। इसके साथ ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना और लाइफस्टाइल में सुधार करना भी जरूरी है।
एक बार हार्ट अटैक हो जाने के बाद दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम हो सकता है, इसलिए दवाएं और डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एंजियोग्राफी क्या है?
सवाल: कोरोनरी एंजियोग्राफी क्या होती है?
डॉ. राकेश यादव: कोरोनरी एंजियोग्राफी एक जांच है। इसमें एक विशेष प्रक्रिया के जरिए हृदय की धमनियों में कंट्रास्ट डाला जाता है और एक्स-रे इमेजिंग की मदद से कोरोनरी आर्टरी को देखा जाता है।
इससे पता चलता है कि धमनियां सामान्य हैं या उनमें कहीं संकुचन है। साथ ही यह भी पता चलता है कि संकुचन कितना है और किस स्थान पर है।
सवाल: इस जांच के क्या फायदे हैं?
डॉ. राकेश यादव: इससे कोरोनरी आर्टरी में मौजूद संकुचन की स्थिति और उसकी गंभीरता का पता चलता है। यह कोरोनरी आर्टरी के इलाज की योजना बनाने में उपयोगी जांच है।
एंजियोप्लास्टी और स्टेंट क्या है?
सवाल: एंजियोप्लास्टी क्या होती है?
डॉ. राकेश यादव: अगर कोरोनरी एंजियोग्राफी में किसी धमनी में गंभीर संकुचन पाया जाता है, तो कुछ मामलों में एंजियोप्लास्टी के जरिए उस संकुचन का इलाज किया जाता है।
इस प्रक्रिया में तार और बैलून की मदद से संकुचित हिस्से को खोला जाता है और जरूरत के अनुसार स्टेंट लगाया जाता है। इसे कोरोनरी एंजियोप्लास्टी कहा जाता है।
सवाल: स्टेंट क्या होता है?
डॉ. राकेश यादव: स्टेंट एक तरह की मेटलिक मेश ट्यूब होती है, जिसे संकुचित धमनी के हिस्से में लगाया जाता है। बैलून की मदद से इसे फैलाया जाता है ताकि धमनी को खुला रखने में सहायता मिल सके।
ओपन हार्ट सर्जरी और बाईपास कब जरूरी होती है?
सवाल: ओपन हार्ट सर्जरी क्या है और इसकी जरूरत कब पड़ती है?
डॉ. राकेश यादव: जब कोरोनरी आर्टरी में ऐसी स्थिति हो कि एंजियोप्लास्टी या स्टेंट के जरिए इलाज उपयुक्त न हो, तो कुछ मरीजों में बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
इसमें शरीर के किसी दूसरे हिस्से से रक्त वाहिका लेकर संकुचित धमनी के आगे रक्त प्रवाह के लिए नया रास्ता बनाया जाता है। इसे बाईपास सर्जरी कहा जाता है।
हार्ट ट्रांसप्लांट कब किया जाता है?
सवाल: हार्ट ट्रांसप्लांट क्या है?
डॉ. राकेश यादव: जब हृदय इतना खराब हो जाए कि इलाज के दूसरे विकल्प पर्याप्त न रहें, तो कुछ मरीजों में हार्ट ट्रांसप्लांट का विकल्प होता है। इसमें मरीज के खराब हृदय को डोनर के हृदय से बदला जाता है। नई तकनीकों और दवाओं के आने से इसके परिणामों में सुधार हुआ है।
महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण
सवाल: क्या पुरुषों और महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग-अलग होते हैं?
डॉ. राकेश यादव: सामान्य तौर पर प्रमुख लक्षणों में अंतर नहीं होता। हालांकि, महिलाओं में मेनोपॉज तक हार्ट अटैक का खतरा अपेक्षाकृत कम माना जाता है। मेनोपॉज के बाद यह अंतर कम हो जाता है।
युवाओं के लिए डॉक्टर की सलाह: मौज-मस्ती के साथ लाइफस्टाइल भी ठीक रखें
सवाल: हार्ट की समस्या को नियंत्रित रखने के लिए क्या करना चाहिए?
डॉ. राकेश यादव: युवाओं से यही कहना चाहूंगा कि मौज-मस्ती ठीक है, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल को भी स्वस्थ रखें।
काम करने से हार्ट अटैक नहीं होता, बल्कि आप किस तरह काम करते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। अगर आप लगातार तनाव में हैं, स्मोकिंग करते हैं या रातभर जागते हैं तो अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देने की जरूरत है।
खूब मेहनत कीजिए, लेकिन खुश होकर और स्वस्थ तरीके से काम कीजिए।
योग सिर्फ शरीर नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी
सवाल: हार्ट को स्वस्थ रखने में योग कितना कारगर है?
डॉ. राकेश यादव: योग को केवल शारीरिक व्यायाम के तौर पर नहीं देखना चाहिए। इसमें मानसिक और आध्यात्मिक पक्ष भी जुड़े हैं।
लाइफस्टाइल में बदलाव केवल शारीरिक स्तर पर नहीं होना चाहिए। हमारी सोच में भी बदलाव जरूरी है। जब तक व्यक्ति यह नहीं समझेगा कि स्मोकिंग उसके लिए नुकसानदायक है, तब तक उसे छोड़ना मुश्किल हो सकता है।
योग को किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। यह शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और समग्र जीवनशैली के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए कौन-सी एक्सरसाइज करें?
सवाल: हार्ट को हेल्दी रखने के लिए कौन-सी एक्सरसाइज करनी चाहिए?
डॉ. राकेश यादव: सामान्य वॉक कीजिए। कोई भी एरोबिक एक्सरसाइज की जा सकती है। पीटी जैसी शारीरिक गतिविधियां भी की जा सकती हैं।
हफ्ते में तीन दिन करीब 40 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज करना हार्ट के लिए अच्छा हो सकता है।
डॉ. राकेश यादव के ‘हेल्दी हार्ट’ के छह मंत्र
सवाल: आखिर में हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
डॉ. राकेश यादव: मैं हमेशा कहता हूं कि हेल्दी हार्ट के लिए छह चीजें याद रखिए-
Buy Good — अच्छी चीजें खरीदिए।
Cook Good — अच्छा और स्वस्थ खाना पकाइए।
Eat Good — अच्छा और संतुलित खाना खाइए।
Work Good — अच्छी तरह काम कीजिए।
Sleep Good — पर्याप्त और अच्छी नींद लीजिए।
Live Good — स्वस्थ और बेहतर जीवन जीएं।
अगर हम इन बातों को अपनी जिंदगी में शामिल कर लें तो हृदय से जुड़ी कई बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
डॉक्टर के 6 हेल्दी हार्ट मंत्र
BUY GOOD → COOK GOOD → EAT GOOD → WORK GOOD → SLEEP GOOD → LIVE GOOD
डिस्क्लेमर: इस इंटरव्यू में दी गई जानकारी डॉक्टर द्वारा बातचीत के दौरान दी गई सामान्य चिकित्सकीय जानकारी पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह या आपातकालीन उपचार का विकल्प न मानें। किसी भी गंभीर या अचानक लक्षण की स्थिति में योग्य चिकित्सक/नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
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