हिंदी पखवाड़ा के तहत एनसीजेडसीसी में हुआ आयोजन; युवा कवियों ने वीर रस, प्रेम, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं सुनाईं, वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिता में 70 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
प्रयागराज, 28 सितंबर। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत सोमवार को युवा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में युवा कवियों ने वीर रस, देशभक्ति, प्रेम, हास्य-व्यंग्य और जीवन से जुड़े विषयों पर अपनी कविताओं का पाठ किया। कवियों की प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम के साथ हिंदी के विकास और सोशल मीडिया से जुड़े विषयों पर वाद-विवाद एवं निबंध प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
युवा कवि सम्मेलन : देशभक्ति की कविता से गूंजा सभागार
युवा कवि अभिजीत मिश्रा ने देशप्रेम से ओत-प्रोत कविता प्रस्तुत की। उन्होंने कहा-
“जो अपना एक वेश है, अशेष है, अशेष है, वो सिर्फ ये परिवेश है, कि सबसे पहले देश है।”
उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।

बाराबंकी से आए कवि आशीष ने हास्य-व्यंग्य की रचना सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने अपनी रचना की पंक्तियां सुनाईं-
“ऐसा नहीं मिला कभी, वैसा नहीं मिला, फिर इश्क बाद उसके जैसा नहीं मिला…”
तिरंगे और बेटियों के शौर्य पर आयुषी त्रिपाठी की कविता
बांदा से आईं कवयित्री आयुषी त्रिपाठी ने तिरंगे और बेटियों के शौर्य को केंद्र में रखकर कविता प्रस्तुत की। उन्होंने कहा-
“नए भारत का देखो हो रहा उद्भव तिरंगे में, किया बेटी ने भी जय हिंद का कलरव तिरंगे में।”
उनकी कविता पर भी सभागार तालियों से गूंज उठा।
सामाजिक बदलाव पर आकांक्षा बुंदेला की रचना

कवयित्री आकांक्षा बुंदेला ने बदलते सामाजिक परिवेश को अपनी कविता का विषय बनाया। उनकी रचना में समाज में हो रहे बदलावों और बदलते मानवीय संबंधों की झलक दिखाई दी।
वहीं कृष्णकांत ‘कामिल’ ने अपनी रचना-
“रंज सहते रहे, मुस्कुराते रहे, साथ हम जिंदगी का निभाते रहे…”
सुनाकर श्रोताओं को भावुक करने के साथ ही खूब गुदगुदाया। उनकी इन पंक्तियों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।

हिंदी के विकास पर वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिता
हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत इसी क्रम में वाद-विवाद एवं निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। “सोशल मीडिया : हिंदी विकास की संभावनाएं या चुनौतियां” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई, जिसमें स्कूल एवं कॉलेजों के 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वहीं “हिंदी के विकास में कला और संस्कृति की भूमिका” विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में 40 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय, कार्यक्रम प्रभारी कृष्ण मोहन द्विवेदी एवं श्रेयस शुक्ला ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर सरस्वती पत्रिका के संपादक अनुपम परिहार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विनम्र सेन सिंह तथा अंग्रेजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मृत्युंजय राव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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