मीना तिवारी बोलीं– महिलाओं से बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों पर हो कार्रवाई; हर मुसहर टोली में वैकल्पिक रोजगार और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग
पटना। पटना जिले के पिपरा थाना अंतर्गत बेहरावां चकिया कांड को लेकर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने मंगलवार को पटना में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बेऊर जेल में बंद 32 महिलाओं समेत 39 लोगों की तत्काल रिहाई, तीन महादलितों की मौत की जवाबदेही तय करने और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन में पीड़ित परिवारों के सदस्यों के साथ सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं।
प्रदर्शनकारी गेट पब्लिक लाइब्रेरी से मार्च निकालकर गर्दनीबाग धरनास्थल पहुंचे। वहां गेट बंद होने के कारण महिलाएं धरनास्थल पर ही बैठ गईं और नारेबाजी करते हुए सभा की। सभा को ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, विधान परिषद सदस्य शशि यादव और पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने संबोधित किया।
बेहरावां चकिया की पीड़ित महिलाओं ससीमा देवी, खुशबू कुमारी और प्रीति कुमारी ने सभा में अपनी आपबीती सुनाई और मामले में कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व मीना तिवारी और शशि यादव ने किया।
बेहरावां चकिया कांड : मीना तिवारी ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने आरोप लगाया कि 4 अक्टूबर को बेहरावां चकिया गांव में शराब की तलाश के नाम पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया, लड़कियों के दुपट्टे खींचे गए और गाली-गलौज की गई। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में 32 महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इनमें कई छोटे बच्चों की मां हैं।
मीना तिवारी ने यह भी कहा कि पुलिस की छापेमारी से डरकर कुछ लोग पास की नदी में कूद गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने पानी के भीतर पत्थर मारकर उन्हें डुबाए रखा, जिससे रामू मांझी और अशोक मांझी की मौत हो गई। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
तिवारी ने 11 सितंबर की एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इसी पंचायत में राजा बाबू को शराब पीने के आरोप में तलाशने गई पुलिस ने उनके पिता सुरेश महतो, मां और सयानी बहन को गिरफ्तार किया था। उनके मुताबिक, परिजनों को देर रात तक थाने में प्रताड़ित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मां और बहन के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार से अपमानित होकर राजा बाबू ने 26 अक्टूबर को आत्महत्या कर ली। तिवारी ने कहा कि राजा बाबू के परिजनों ने उच्चाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला।
ऐपवा महासचिव ने बिहार में दलितों और महादलितों के साथ पुलिस उत्पीड़न बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है और फर्जी मुकदमों में जेल भेजा जा रहा है।
शशि यादव ने थानाध्यक्ष को निलंबित करने की मांग की
विधान परिषद सदस्य शशि यादव ने कहा कि बिहार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उनके मुताबिक, पुलिस और अपराधी दोनों महिलाओं तथा महादलित समुदाय के लोगों का उत्पीड़न कर रहे हैं। उन्होंने पिपरा थानाध्यक्ष को निलंबित करने और जेल में बंद महिलाओं को रिहा करने की मांग की।

सभा में पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने भी प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। प्रदर्शन में कामरेड अमर, जितेंद्र, ऐपवा पटना नगर सचिव अनुराधा, ऐपवा नेत्री अफ्शां जबीं, राखी मेहता, रेखा देवी, नीलम देवी और विभा गुप्ता समेत सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, पांच प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के बाद ऐपवा ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने बेहरावां चकिया की घटना और इससे जुड़े मामलों में कार्रवाई की मांग करते हुए पांच प्रमुख मांगें रखीं।
- बंदियों की रिहाई: बेऊर जेल में बंद 32 महिलाओं को तत्काल रिहा किया जाए। सात पुरुष बंदियों की भी रिहाई की जाए।
- तीन मौतों की जवाबदेही: रामू मांझी, अशोक मांझी और राजा बाबू की मौत के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे पिपरा थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए। पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की जाए।
- महिलाओं से दुर्व्यवहार पर कार्रवाई: बेहरावां चकिया में महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- उजाड़ने और प्रताड़ित करने पर रोक: वैकल्पिक रोजगार या सरकारी नौकरी की व्यवस्था किए बिना मुसहर समुदाय के लोगों को शराब के नाम पर उजाड़ना और प्रताड़ित करना बंद किया जाए।
- रोजगार और मुआवजा: हर मुसहर टोली में वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की जाए और सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
ऐपवा ने मांग की कि मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को न्याय तथा राहत उपलब्ध कराई जाए।
बेहरावां चकिया मामले में क्या हैं आरोप?
बेहरावां चकिया का मामला पुलिस की छापेमारी, महिलाओं की गिरफ्तारी और तीन लोगों की मौत से जुड़े आरोपों के कारण चर्चा में है। ऐपवा और पीड़ित परिवारों के आरोपों के अनुसार, 4 अक्टूबर की छापेमारी के दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। ग्रामीणों ने नदी में कूदे लोगों के साथ पुलिस के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं।
ऐपवा ने 11 सितंबर की घटना का हवाला देते हुए राजा बाबू की मौत को भी पुलिस के कथित दुर्व्यवहार से जोड़ा है। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
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