भारतीय लोक कला की अमर साधिका, पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित महान लोक कलाकार डॉ. तीजन बाई की अस्थियां सोमवार को तीर्थराज प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम में पूरे वैदिक रीति-रिवाज और धार्मिक विधि-विधान के साथ विसर्जित की गईं। इस दौरान संगम तट पर भावुक माहौल रहा और कला जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक अंतिम विदाई दी।
अस्थि विसर्जन के समय उनके पुत्र दिलहरण पारधी, पौत्र सौरभ पारधी, नाती झाकेश्वर देशमुख सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय, कार्यक्रम प्रभारी कृष्णमोहन द्विवेदी, मनोज कुमार सहित अनेक कलाकारों, रंगकर्मियों और संस्कृति प्रेमियों ने संगम तट पर पहुंचकर महान लोक कलाकार को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सभी ने एक स्वर में कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोक कला, लोक रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होगी।
प्रयागराज में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
अस्थि विसर्जन से एक दिन पूर्व प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) में डॉ. तीजन बाई की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर कलाकारों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों, संस्कृत प्रेमियों और शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान को याद किया।
कौन थीं डॉ. तीजन बाई?
डॉ. तीजन बाई भारत की सबसे प्रतिष्ठित लोक कलाकारों में गिनी जाती थीं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी लोकगायन शैली को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को अपनी सशक्त आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली से जीवंत करने वाली तीजन बाई ने भारतीय लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान दिलाई।

उनके कला-साधना के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी नवाजा गया।
5 जुलाई को हुआ था निधन
डॉ. तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को लंबी बीमारी के बाद रायपुर स्थित एम्स में 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन पर देशभर के कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक संस्थानों और कला प्रेमियों ने गहरा शोक व्यक्त किया था। प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा कला जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।
डॉ. तीजन बाई का जीवन भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रतिष्ठा का पर्याय रहेगा। उनकी आवाज़, उनकी कला और पंडवानी की परंपरा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।
