पटना। बिहार छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस की ओर से गठित फैक्ट-फाइंडिंग टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने राज्य सरकार पर छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने का आरोप लगाया। वहीं इन आरोपों और छात्र आंदोलनों के समर्थन में एनएसयूआई ने पटना में प्रतिरोध मार्च निकाला, जिसके दौरान कांग्रेस और छात्र संगठन के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
मंगलवार को बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कन्हैया कुमार ने कहा कि फैक्ट-फाइंडिंग टीम की शुरुआती रिपोर्ट लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कई जिलों का दौरा, छात्रों और अधिकारियों से की बातचीत
कन्हैया कुमार ने बताया कि कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने पटना, सिवान, जहानाबाद, भागलपुर और दरभंगा समेत कई जिलों का दौरा किया। टीम ने छात्रों, उनके परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की।
उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, गोलीबारी और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गईं। उनका आरोप था कि बल प्रयोग के दौरान आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कार्रवाई किस अधिकारी या मजिस्ट्रेट के आदेश पर हुई।

सिवान की घटना पर उठाए सवाल
कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि सिवान में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों के मेडिकल परीक्षण, गिरफ्तारी मेमो और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में नाबालिगों और छात्राओं को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया तथा परिजनों को समय पर सूचना नहीं दी गई।
पत्रकारों और सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर कार्रवाई का भी आरोप
कन्हैया कुमार ने कहा कि फैक्ट-फाइंडिंग टीम के अनुसार छात्र आंदोलनों की कवरेज करने वाले कुछ पत्रकारों, यूट्यूबरों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को भी कथित रूप से पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने इन मामलों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
सरकार से उठाईं ये प्रमुख मांगें
कन्हैया कुमार ने बिहार सरकार से मांग की कि-
- छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच कराई जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- लंबित मामलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
- निर्दोष छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए।
इसके बाद निकला प्रतिरोध मार्च
संवाददाता सम्मेलन के बाद एनएसयूआई ने पटना के इनकम टैक्स चौराहे से प्रतिरोध मार्च निकाला। संगठन का कहना था कि यह प्रदर्शन छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया।
मार्च में राज्य के विभिन्न जिलों से आए छात्र-युवा शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया
प्रदर्शन के दौरान बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, एनएसयूआई बिहार अध्यक्ष सूरज यादव समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर कोतवाली थाना पहुंचाया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया।
राजेश राम ने क्या कहा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने आरोप लगाया कि छात्र रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने सिवान में पुलिस द्वारा कथित रूप से AK-47 के इस्तेमाल के आरोपों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग भी दोहराई।
विनोद जाखड़ का बयान
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि यह प्रदर्शन केवल पटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार के छात्रों की आवाज है। उनका आरोप था कि सरकार छात्रों के सवालों का जवाब देने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।
सरकार का पक्ष
इस मामले में बिहार सरकार या पुलिस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया इस संवाददाता सम्मेलन में सामने नहीं आई। यदि सरकार या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
