पटना। PhD शोधार्थी आमरण अनशन। बिहार में उच्च शिक्षा और शोधार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर पिछले छह दिनों से तीन PhD धारक आमरण अनशन पर बैठे हैं। लगातार अनशन के कारण आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट की बात सामने आ रही है। वहीं, सरकार की ओर से अब तक किसी सक्षम प्रतिनिधि के धरनास्थल पर पहुंचकर अनशनकारियों से बातचीत नहीं करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है और सरकार पर संवाद के लिए दबाव बढ़ रहा है।
All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बीकू सिंह प्रधान उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की मांगों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से जुड़े प्रावधानों में सुधार, पुरानी UGC नियमावली के प्रावधानों को लागू करना, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, PhD एवं NET अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा और शोधार्थियों से जुड़े अन्य मुद्दों का समाधान शामिल है।
PhD शोधार्थी आमरण अनशन पर
आमरण अनशन के छठे दिन मनेर विधायक एवं बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति भाई वीरेंद्र धरनास्थल पहुंचे। उन्होंने अनशन कर रहे कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बीकू सिंह प्रधान से मुलाकात की और उनकी मांगों को सुना।
धरनास्थल से ही भाई वीरेंद्र ने बिहार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ से फोन पर बातचीत की। उन्होंने मंत्री से आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और जल्द सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया, ताकि आंदोलन का सम्मानजनक समाधान निकाला जा सके।
भाई वीरेंद्र ने पटना के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन से भी फोन पर बातचीत की। उन्होंने छह दिनों से अनशन कर रहे आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य परीक्षण में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए तत्काल चिकित्सकीय जांच और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
राज्यपाल से भी मुलाकात का दावा
भाई वीरेंद्र ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले राज्यपाल से भी मुलाकात की थी और बिहार के युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया था। उन्होंने सहायक प्राध्यापक बहाली में अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने, डोमिसाइल नीति लागू करने तथा शोधार्थियों और अभ्यर्थियों की न्यायसंगत मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग रखी।
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राजेश राम ने भी दिया आंदोलन को समर्थन
आंदोलन को बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम का भी समर्थन मिला। राजेश राम गर्दनीबाग धरनास्थल पहुंचे और आमरण अनशन कर रहे PhD अभ्यर्थियों से मुलाकात की।
राजेश राम ने ‘Statutes for Appointments of Assistant Professors 2026’ को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अराजकता बढ़ सकती है और विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की छह मांगें जायज हैं और सरकार को उनकी मांगों पर तत्काल विचार करना चाहिए। राजेश राम ने कहा कि कांग्रेस आंदोलनकारियों का मांग पत्र राहुल गांधी, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग तक भेजेगी और संबंधित नियमावली पर पुनर्विचार की मांग करेगी।

‘छह दिन से अनशन, स्वास्थ्य की तत्काल जांच हो’
राजेश राम ने आमरण अनशन कर रहे कुमुद पटेल, अभिषेक कुमार और बीकू सिंह के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था कराने और उच्च अधिकारियों की टीम भेजकर आंदोलनकारियों से बातचीत करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि राजधानी में मुख्यमंत्री कार्यालय से कुछ दूरी पर उच्च डिग्रीधारी युवा अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं और सरकार की ओर से अब तक प्रभावी संवाद नहीं होना चिंता का विषय है।
PhD धारकों और शोधार्थियों की बड़ी मौजूदगी
धरनास्थल पर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य अजय यादव, डॉ. उमेश यादव, डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. हिमांशु यादव और नीरज झा समेत बड़ी संख्या में PhD धारक, शोधार्थी और NET अभ्यर्थी मौजूद रहे।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन समेत पंकज यादव, प्रेमचंद सिंह और चंद्र प्रकाश सिंह सहित कई कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता भी धरनास्थल पहुंचे और आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।
अब सरकार के रुख पर नजर
छह दिनों से जारी आमरण अनशन और आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट की बात सामने आने के बाद अब इस आंदोलन पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ता दिख रहा है। एक तरफ भाई वीरेंद्र ने धरनास्थल से उच्च शिक्षा मंत्री से फोन पर बातचीत की, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से तत्काल संवाद की मांग की है।
अब देखना यह है कि लगातार बढ़ रहे राजनीतिक और सामाजिक समर्थन के बीच बिहार सरकार आंदोलनकारियों से औपचारिक बातचीत के लिए क्या पहल करती है।
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