पटना। prof binod kumar tripathi। बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी को राज्यपाल सचिवालय में सलाहकार (संकाय उत्कृष्टता एवं शैक्षणिक विकास) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब राज्य के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध संस्कृति और राष्ट्रीय रैंकिंग सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रो. त्रिपाठी बिहार लोक भवन में कार्य करते हुए राज्यपाल-सह-कुलाधिपति को संकाय विकास, संस्थागत सुधार, NAAC एवं NIRF प्रत्यायन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े विषयों पर रणनीतिक परामर्श देंगे।
Prof Binod Kumar Tripathi की नियुक्ति अहम क्यों?
बिहार के अधिकांश विश्वविद्यालय वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शोध, फैकल्टी प्रशिक्षण, राष्ट्रीय रैंकिंग और प्रत्यायन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में राज्यपाल सचिवालय ने अनुभवी शिक्षाविद् को सलाहकार बनाकर विश्वविद्यालयों में संस्थागत सुधार की प्रक्रिया को गति देने की रणनीति अपनाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता, शोध, नवाचार और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की क्षमता मजबूत हो सकती है।

कौन हैं Prof Binod Kumar Tripathi?
प्रो. त्रिपाठी देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं। उन्हें उच्च शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षिक नीति के क्षेत्र में 40 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
उन्होंने:
- यूजीसी के इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन (IUCTE) के संस्थापक निदेशक के रूप में कार्य किया।
- एनसीईआरटी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
- बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पीएचडी की।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक सुधारों पर व्यापक कार्य किया।
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में हर वर्ष होगा फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम
राज्यपाल-सह-कुलाधिपति ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों तथा अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों में Faculty Development Programme (FDP) को अनिवार्य रूप से आयोजित करने की व्यापक रूपरेखा को मंजूरी दी है।
इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बदलती तकनीक, नई शिक्षण पद्धतियों और वैश्विक शैक्षणिक मानकों के अनुरूप तैयार करना है।

इन विषयों पर होगा शिक्षकों का प्रशिक्षण
प्रस्तावित छह दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शिक्षकों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा-
- शोध एवं अनुसंधान
- डिजिटल शिक्षण
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)
- नवाचार एवं उद्यमिता
- शैक्षणिक नेतृत्व
- भारतीय ज्ञान परंपरा
- जलवायु परिवर्तन
- साइबर सुरक्षा
- मानसिक स्वास्थ्य
- कौशल विकास
कौन करेगा कार्यक्रम की निगरानी?
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की निगरानी बिहार लोक भवन में गठित संचालन समिति करेगी।
वहीं,
- पटना विश्वविद्यालय
- बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय
के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC) राज्य स्तरीय संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।
NEP-2020 के लक्ष्यों को मिलेगी गति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख उद्देश्यों—शिक्षण गुणवत्ता, अनुसंधान, बहुविषयक शिक्षा, तकनीकी दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा—को बिहार के विश्वविद्यालयों में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यदि संकाय विकास कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित हुए, तो इसका प्रभाव विश्वविद्यालयों की NAAC ग्रेडिंग, NIRF रैंकिंग, शोध प्रकाशनों और छात्रों की सीखने की गुणवत्ता पर भी देखने को मिल सकता है।
मुख्य बातें
- प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी बने राज्यपाल के सलाहकार।
- बिहार में उच्च शिक्षा सुधारों को मिलेगी नई गति।
- सभी विश्वविद्यालयों में हर वर्ष फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम अनिवार्य।
- AI, डिजिटल शिक्षा, शोध और नवाचार जैसे विषयों पर होगा प्रशिक्षण।
- NAAC, NIRF और NEP-2020 के क्रियान्वयन पर रहेगा विशेष फोकस।
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