नई दिल्ली। तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNV) की स्थापना को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य सरकार के हिंदी को लेकर रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी, ऐसा नहीं हो सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार से अपना नजरिया बदलने की जरूरत बताई और केंद्र तथा राज्य को बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की सलाह दी।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की उस मांग को स्वीकार नहीं किया जिसमें दिसंबर 2025 के उस निर्देश को वापस लेने की मांग की गई थी, जिसके तहत राज्य को हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए जमीन चिन्हित करने को कहा गया था। हालांकि, कोर्ट ने राज्य को अनुपालन के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया।
‘तमिलनाडु में हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी, ऐसा नहीं हो सकता’
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने तमिलनाडु सरकार के हिंदी को लेकर रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य को अपनी सोच बदलनी होगी और ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि चेन्नई में बैठे लोगों को दिल्ली में बैठे लोगों से अलग-थलग नहीं होना चाहिए और दिल्ली तथा चेन्नई के बीच दूरी की मानसिकता नहीं होनी चाहिए। पीठ ने केंद्र और राज्य के बीच सहकारी संघवाद (cooperative federalism) के तहत बातचीत की जरूरत पर जोर दिया।
नवोदय विद्यालयों को लेकर क्या है विवाद?
मामला तमिलनाडु के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने से जुड़ा है। मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य को इन विद्यालयों की स्थापना की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया था। तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
राज्य सरकार का मुख्य तर्क है कि नवोदय विद्यालयों में लागू तीन भाषा व्यवस्था तमिलनाडु की मौजूदा दो-भाषा नीति से मेल नहीं खाती। राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि शिक्षा नीति और भाषा से जुड़े ऐसे फैसलों में राज्य की अपनी नीति और संवैधानिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था?
15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालयों की स्थापना के लिए आवश्यक जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया था।
उस समय भी कोर्ट ने राज्य को नवोदय विद्यालयों की स्थापना के मुद्दे को भाषा विवाद में बदलने से बचने की सलाह दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इन विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
तमिलनाडु सरकार ने बाद में उस आदेश को वापस लेने की मांग की। 17 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, लेकिन राज्य को जमीन चिन्हित करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर 2026 को होगी।
तमिलनाडु सरकार ने तीन भाषा नीति पर क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने दलील दी कि नवोदय विद्यालयों में लागू व्यवस्था तमिलनाडु की राज्य नीति से अलग है। उनका कहना था कि राज्य में लंबे समय से दो-भाषा नीति लागू है और नवोदय विद्यालयों की व्यवस्था उससे अलग है।
राज्य ने यह भी तर्क दिया कि शिक्षा नीति जैसे मामलों में केंद्र और राज्य के बीच सहमति जरूरी है तथा किसी नीति को राज्य पर एकतरफा तरीके से लागू नहीं किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा- भाषा के मुद्दे पर बातचीत करें
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार को बातचीत के जरिए मतभेद दूर करने की सलाह दी। पीठ ने कहा कि राज्य को केवल इस आधार पर केंद्रीय नीति को स्वीकार करने से इनकार नहीं करना चाहिए कि वह उसकी मौजूदा नीति से अलग है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना से तमिलनाडु में शिक्षा का स्तर कम नहीं होगा, बल्कि छात्रों के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होंगे।
₹3,000 करोड़ से ज्यादा बकाया राशि का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र से मिलने वाली राशि का मुद्दा भी उठाया गया। राज्य की ओर से कहा गया कि केंद्र पर इस मद में ₹3,000 करोड़ से अधिक की राशि बकाया है।
राज्य ने इसी वित्तीय मुद्दे को भी केंद्र-राज्य संबंधों और नवोदय विद्यालयों के संचालन से जुड़ी चिंताओं के साथ रखा। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि राज्य की मुख्य जिम्मेदारी विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराना है और बाकी व्यवस्था केंद्र की ओर से की जाएगी।
‘चेन्नई और दिल्ली को अलग नहीं किया जा सकता’
सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र और राज्य के बीच टकराव के बजाय संवाद पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि चेन्नई और दिल्ली को एक-दूसरे से अलग-थलग देखने की मानसिकता नहीं होनी चाहिए।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि राज्य अपनी शिक्षा व्यवस्था में जो अच्छा काम कर रहा है, उसमें कुछ अतिरिक्त जुड़ने से उसकी गुणवत्ता कम नहीं होगी। कोर्ट ने इसी संदर्भ में तमिलनाडु सरकार से अपने रुख में लचीलापन लाने और केंद्र के साथ बातचीत करने को कहा।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 के अपने निर्देश को वापस नहीं लिया है। तमिलनाडु सरकार को अब तीन महीने के भीतर हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन चिन्हित करनी होगी।
साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को भाषा नीति समेत अन्य मतभेदों पर बातचीत जारी रखने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति खत्म कर दी?
नहीं। आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति को समाप्त करने का कोई आदेश नहीं दिया। सुनवाई का तत्काल मुद्दा नवोदय विद्यालयों की स्थापना, जमीन की पहचान और उससे जुड़े भाषा एवं नीति संबंधी विवाद थे। कोर्ट ने केंद्र और राज्य को बातचीत से समाधान निकालने पर जोर दिया है।
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