नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन यानी की DUSU Election 2026 के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन हुई हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने कहा कि लोकतंत्र को ‘आपराधिक समाज’ में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय, केंद्र/संबंधित प्रशासन और दिल्ली पुलिस से 18 सितंबर तक कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अधिकारियों की रिपोर्ट से वह संतुष्ट नहीं हुआ तो मतगणना और चुनाव परिणाम पर रोक समेत कड़े आदेश दिए जा सकते हैं। फिलहाल चुनाव पर रोक नहीं लगाई गई है। DUSU चुनाव 18 सितंबर को होने हैं और परिणाम 19 सितंबर को आने की उम्मीद है।
‘Enough is Enough’, कोर्ट ने अधिकारियों को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 16 सितंबर की घटनाओं को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि घटना के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कितनी FIR दर्ज हुईं और क्या कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने कहा कि वह इस तरह के ‘reckless and criminal conduct’ को स्वीकार नहीं कर सकता। पीठ ने यह भी कहा कि छात्र संघ चुनावों में इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं और पिछले आदेशों तथा Lyngdoh Committee की सिफारिशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि छात्र संघों को लोकतंत्र की ‘नर्सरी’ माना जाता है और छात्र संगठनों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत किया जाना चाहिए। लेकिन चुनावों का इस तरह हिंसक रूप लेना स्वीकार्य नहीं है।
DUSU Election 2026 : कोर्ट ने चुनाव रोकने की चेतावनी क्यों दी?
याचिकाकर्ता प्रशांत मनचंदा ने कोर्ट के सामने 16 सितंबर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले साल कोर्ट की ओर से दिशा-निर्देश दिए जाने के बावजूद हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं।
उन्होंने दावा किया कि नॉर्थ कैंपस में छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट हुई तथा कुछ कानून के छात्रों को तस्वीरें लेने के कारण पीटा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग लाठी लेकर परिसर में मौजूद थे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से स्थिति नियंत्रित नहीं कर पाने की स्थिति में चुनाव प्रक्रिया पर कड़े कदम उठाने की बात कही। हालांकि, गुरुवार को कोर्ट ने चुनाव रद्द करने का आदेश नहीं दिया। उसने कहा कि यदि 18 सितंबर को अधिकारियों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई तो मतगणना और परिणाम रोकने समेत अन्य कड़े आदेश दिए जा सकते हैं।
‘शिक्षकों को पीटने और बंदूकें लहराने की अनुमति नहीं’
सुनवाई के दौरान पीठ ने हिंसा को लेकर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि छात्रों और अन्य लोगों को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पीठ ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अगर चुनाव प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं कर सकता तो उसे अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करनी होगी। कोर्ट ने अपने परिवार के सदस्यों के नॉर्थ कैंपस में पढ़ने का भी उल्लेख करते हुए छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
ASG चेतन शर्मा ने क्या कहा?
केंद्र की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने कोर्ट की चिंताओं से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि हिंसा या नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि DUSU चुनाव के लिए 13 अगस्त को आदर्श आचार संहिता लागू हुई थी और 16 सितंबर शाम 5 बजे के बाद प्रचार समाप्त हो गया। उनके अनुसार इसके बाद कैंपस में स्थिति शांतिपूर्ण रही।
कोर्ट ने हालांकि सवाल किया कि प्रचार समाप्त होने से पहले जो घटनाएं हुईं, उनके लिए क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है तो उसके क्या परिणाम होंगे।
16 सितंबर को क्या हुआ था?
DUSU Election 2026 के लिए 16 सितंबर चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था। इसी दिन दिल्ली यूनिवर्सिटी के Law Centre-1 के बाहर छात्रों के दो समूहों के बीच झड़प की खबर सामने आई। Bar & Bench के अनुसार यह विवाद कथित तौर पर प्रचार बैनर हटाने को लेकर शुरू हुआ था और कुछ छात्र घायल हुए थे। पुलिस ने इसे लगभग शाम 5 बजे हुई मामूली झड़प बताया था, जबकि ABVP ने अपने सदस्यों के घायल होने का दावा किया था।
इन घटनाओं के बाद हिंसा और चुनावी नियमों के उल्लंघन को लेकर हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई।
DUSU चुनाव 18 सितंबर को
DUSU Election 2026 18 सितंबर को प्रस्तावित हैं। गुरुवार की सुनवाई में कोर्ट ने फिलहाल चुनाव प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है। हालांकि, उसने दिल्ली विश्वविद्यालय और पुलिस समेत संबंधित अधिकारियों को 18 सितंबर को अपनी कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने साफ किया कि रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में वह counting और result को रोकने समेत कड़े आदेश पारित कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को दोपहर 12 बजे होगी।
एक दिन पहले राजनीतिक दलों के छात्र विंग पर भी आया था फैसला
इससे एक दिन पहले, 16 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने DUSU Election 2026 से जुड़ी एक अलग याचिका पर कहा था कि किसी राजनीतिक दल के छात्र विंग का सदस्य होना अपने आप में DUSU Election 2026 लड़ने से अयोग्य नहीं बनाता।
हालांकि, कोर्ट ने साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय और चुनाव अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप को रोकने के निर्देश दिए थे।
इस तरह DUSU Election 2026 को लेकर कोर्ट के सामने फिलहाल दो अलग मुद्दे हैं-उम्मीदवार की पात्रता और चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप, तथा दूसरी ओर चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और सुरक्षा व्यवस्था।
फिलहाल 18 सितंबर की रिपोर्ट के बाद कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार है।
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