राजेश राम बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त ने लोकतंत्र की हत्या की, इस्तीफा देना होगा; कांग्रेस ने SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची को लेकर उठाए सवाल
पटना। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने शुक्रवार को पटना में विशाल विरोध मार्च निकाला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में निकला मार्च आर. ब्लॉक स्थित चाणक्य होटल के पास से शुरू होकर राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर बढ़ा। लेकिन प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने अटल पथ के पास एमएलसी क्वार्टर के नजदीक बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की। इस दौरान यहां पुलिस और प्रदर्नकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ना चाहते थे। और वे इसमें कामयाब भी हो गए। हालात बिगड़ता देख प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
हम आपको बता दें कि कांग्रेस का यह प्रदर्शन SIR (Special Intensive Revision), मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर हो रहे देशव्यापी विरोध का हिस्सा था। शुक्रवार को कई राज्यों में कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए।
‘ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा’- राजेश राम

विरोध मार्च को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों के कारण चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।
राजेश राम ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की बैठकों में दर्ज आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और सत्ता के संरक्षण में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की गई।उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल इस्तीफा देकर देश से माफी मांगनी चाहिए।
चुनाव आयोग ने हाल में SIR और अन्य फैसलों को लेकर सामने आई आपत्तियों के संबंध में कहा है कि आयोग के सभी अंतिम निर्णय, जिसमें SIR भी शामिल है, पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय और तकनीकी सुझाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
कांग्रेस ने SIR और वोटर लिस्ट को बनाया प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा
कांग्रेस का आरोप है कि बिहार में SIR के दौरान मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठे और इसी तरह की प्रक्रिया दूसरे राज्यों में भी अपनाई गई। राजेश राम ने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में चुनाव से पहले मतदाताओं की मैपिंग और मतदाता सूची में बदलाव के जरिए भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले भी मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं और इलेक्ट्रॉनिक डाटा तथा CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग कर चुके हैं।
इन दावों के बीच The Indian Express की 23 सितंबर की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में Form-6, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी डाटाबेस के केंद्रीकरण समेत कई मुद्दों का उल्लेख किया गया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट की उस व्याख्या को खारिज किया है जिसमें इसे आयोग के भीतर निर्णायक मतभेद या टूट के रूप में देखा जा रहा है। आयोग के मुताबिक अलग-अलग राय और आपत्तियां आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

‘जिन राज्यों में ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव हुए, वहां फिर चुनाव हों’
राजेश राम ने इससे आगे बढ़ते हुए मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में जिन राज्यों में विधानसभा और लोकसभा चुनाव कराए गए हैं, वहां दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें बिहार भी शामिल है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग यदि एकतरफा तरीके से काम करेगा तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है। मौजूदा कानून के तहत किसी चुनाव को चुनौती देने और चुनाव परिणाम रद्द कराने की प्रक्रिया न्यायिक व्यवस्था और संबंधित चुनाव कानूनों के तहत होती है।
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान का भी किया जिक्र
राजेश राम ने कहा कि राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के जरिए मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से मतदाता सूची के इलेक्ट्रॉनिक डाटा और अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग कर रही है।
यह मुद्दा अब ‘वोट चोरी’ से लेकर चुनाव आयोग की जवाबदेही तक कांग्रेस के राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बन गया है।

पुलिस बैरिकेडिंग के बाद वाटर कैनन
आर. ब्लॉक से निकला मार्च राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहा था। प्रदर्शनकारियों के हाथों में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां थीं।
पुलिस ने अटल पथ के पास एमएलसी क्वार्टर के नजदीक बैरिकेडिंग कर मार्च को रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। देश के अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया। पुलिस ने वाटर कैनन के जरिए पुतले को बुझाने की कोशिश की।
हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता हुए शामिल
इस प्रदर्शन में राज्य के कोने-कोने से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पटना पहुंचे और मार्च में शामिल हुए। पटना जिला ग्रामीण-2 के जिलाध्यक्ष सरदार गुरजीत सिंह के नेतृत्व में मोकामा, बाढ़ और बख्तियारपुर से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए।
Freelancerpost (फ्रीलांसर पोस्ट) से बातचीत में कांग्रेस पटना जिला ग्रामीण-2 के जिलाध्यक्ष सरदार गुरजीत सिंह ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा। उन्होंने कहा, “हम देश के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस का कार्यकर्ता ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार है।”
वहीं, प्रदर्शन में शामिल बख्तियारपुर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ने Freelancerpost (फ्रीलांसर पोस्ट) से बातचीत में कहा कि कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए भाजपा और चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत से चल रही ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को गांवों की गलियों तक पहुंचा चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
अजय कुमार ने कहा, “हम सरकार की चूल हिला देंगे। सिर्फ ज्ञानेश कुमार को नहीं, वोट चोरी से बनी सरकारों को भी जाना होगा।”
बख्तियारपुर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार के नेतृत्व में बख्तियारपुर क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पटना पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां थीं और वे लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

प्रदर्शन में बाढ़ प्रखंड अध्यक्ष प्रो. सियाराम सिंह, नगर अध्यक्ष मोहम्मद शाहबुद्दीन, बख्तियारपुर के पूर्व कांग्रेस नेता दयानंद यादव और रविंद्र सिंह समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे।
इसके अलावा प्रदर्शन में सांसद पप्पू यादव, अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, विधायक मनोज विश्वास, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, पूर्व विधायक प्रतिमा कुमारी दास, बंटी चौधरी, ऋषि मिश्रा, डॉ. संजय यादव, पंकज यादव, मिन्नत रहमानी, स्नेहाशीष वर्द्धन पाण्डेय, कुमार आशीष, कमल कमलेश, राजीव मेहता, चंद्रप्रकाश सिंह, डॉ. कुमारी सोनी, प्रेमचंद सिंह, डॉ. अमन कुमार, उमैर खान, अफरोज खान, जितेंद्र नाथ पटेल, मंजीत आनंद साहू, अनुराग चंदन, रीता सिंह, मृणाल अनामय, संजय पाण्डेय, अरुण पाठक, हीरा सिंह बग्गा, मनीष यादव, पूनम यादव, कुमारी अनिता, बिट्टू यादव, सत्येंद्र कुमार, राहुल भारद्वाज और अनुकूल राज समेत कई नेता मौजूद रहे।
देशभर में तेज हुआ CEC के इस्तीफे का मुद्दा
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद पिछले कुछ दिनों में उस समय तेज हुआ जब चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आई। इसके बाद राहुल गांधी ने भी 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और उन्हें ‘सरकारी गवाह’ बनने की सलाह दी।
इसके जवाब में भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि SIR समेत उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इस तरह फिलहाल विवाद के तीन प्रमुख पक्ष सामने हैं-कांग्रेस के आरोप, भाजपा का राजनीतिक जवाब और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष।
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