हाईकोर्ट में MCD का हलफनामा; 354 PG को कारण बताओ नोटिस, दिल्ली में मास्टर प्लान के मुताबिक सिर्फ 512 PG चल रहे
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन PG हादसा मामले में दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कार्रवाई की जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट को दी है। निगम ने बताया कि हादसे के बाद 543 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया, 178 संपत्तियों को सील किया गया और 354 PG को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। मामले में लापरवाही के आरोप में MCD के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार से पूछा कि राजधानी में PG को नियंत्रित करने वाले नियमों और कानूनों का पालन किस तरह कराया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
पांच वरिष्ठ MCD अधिकारी निलंबित
MCD ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है। संबंधित जोन के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
इसमें डिप्टी कमिश्नर और भवन विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। इससे पहले भी MCD ने सत्य निकेतन हादसे के बाद दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया था। इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार सहित भवन विभाग के अधिकारी शामिल थे।
543 संपत्तियां ध्वस्त, 178 सील
MCD ने कोर्ट को बताया कि हादसे के बाद 543 संपत्तियों को गिराया गया, जबकि 178 संपत्तियों को सील किया गया है। इसके अलावा 354 PG संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
इस कार्रवाई का उद्देश्य उन संपत्तियों की पहचान करना है, जहां बिना अनुमति निर्माण, भवन नियमों के उल्लंघन या आवासीय संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं।
इससे पहले 6 से 18 सितंबर के बीच MCD ने 397 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और 152 संपत्तियों को सील किया था। उस दौरान 310 अनधिकृत निर्माण संबंधी और 178 सीलिंग संबंधी कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे।
सत्य निकेतन PG हादसा : दिल्ली में सिर्फ 512 PG मास्टर प्लान के मुताबिक
MCD ने कोर्ट को यह भी बताया कि दिल्ली में केवल 512 PG ही मास्टर प्लान के मुताबिक संचालित हो रहे हैं। इस आंकड़े ने राजधानी में छात्रों के लिए संचालित PG और हॉस्टल की नियमन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट ने पहले ही कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले बाहर के छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी PG पर निर्भर रहना पड़ता है। अदालत ने PG की सुरक्षा और उनके नियमन को गंभीर मुद्दा माना था।
6 सितंबर को भरभराकर गिरा था पांच मंजिला PG
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे छात्रों के लिए संचालित पांच मंजिला PG भवन अचानक गिर गया था। यह भवन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक छात्र बहुल इलाके में था।
हादसे में सात लोगों की मौत हुई और 12 लोग घायल हुए। पुलिस के मुताबिक मलबे से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था।
मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया था। हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए थे।
पुलिस जांच में भी सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
हादसे की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को दिए स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि भवन मालिकों ने संरचनात्मक बदलाव और मरम्मत के दौरान किसी योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर या आर्किटेक्ट की सलाह नहीं ली थी।
पुलिस के अनुसार, भवन में मरम्मत और संरचनात्मक बदलाव का काम चल रहा था और PG संचालकों ने भी सुरक्षा के लिए उचित सावधानियां नहीं बरतीं। पुलिस ने यह भी कहा कि परिसर को व्यावसायिक रूप से किराये पर देने के लिए जरूरी लैंड-यूज कन्वर्जन की अनुमति नहीं ली गई थी।
हाईकोर्ट ने जिम्मेदारी तय करने को कहा था
हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए MCD को दक्षिणी दिल्ली समेत शहर के PG और हॉस्टल की जांच करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने पूछा था कि हादसे वाली इमारत के पास वैध निर्माण अनुमति थी या नहीं और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ था तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने MCD को सभी PG की जांच कर यह बताने को कहा था कि संबंधित इमारतों के पास आवश्यक अनुमति है या नहीं और कहीं भवन उपनियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया।
कोर्ट ने PG व्यवस्था और हॉस्टल की कमी पर भी उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली में छात्रों के लिए उपलब्ध हॉस्टल की संख्या को भी अपर्याप्त बताया था। अदालत ने कहा था कि बाहर से दिल्ली आने वाले छात्रों के पास निजी PG में रहने के अलावा सीमित विकल्प हैं।
इसी वजह से कोर्ट ने सिर्फ एक इमारत की सुरक्षा तक मामला सीमित रखने के बजाय दिल्ली में PG के नियमन, भवन अनुमति, सुरक्षा मानकों और अधिकारियों की जवाबदेही को व्यापक रूप से देखने के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले की निगरानी जारी रखने को कहा
सत्य निकेतन PG हादसा से जुड़ी कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंची थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली हाईकोर्ट से अपने पास ट्रांसफर करने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट को ही मामले की निगरानी जारी रखने को कहा था।
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