याचिका में SIR के दौरान 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जांच की मांग; दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का भी हवाला
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के दौरान संवैधानिक और वैधानिक दायित्वों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में SIR से जुड़े फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए कथित बदलावों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
CEC ज्ञानेश कुमार : SIR के फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि ऐसे सभी फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को गैरकानूनी घोषित किया जाए, जिन्हें याचिका के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना शुरू, मंजूर या लागू किया गया।
याचिका में 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम की धारा 18 का हवाला देते हुए आयोग के सामूहिक निर्णय की व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे निर्णय यदि बहुमत या पूर्ण आयोग की सहमति के विपरीत लिए गए हैं तो उन्हें असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाना चाहिए।
13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की SIT जांच की मांग
याचिका में SIR के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक जांच आयोग गठित करने की मांग की गई है।
हालांकि, 13 करोड़ नाम हटाए जाने की बात याचिका में की गई जांच की मांग और आरोप का हिस्सा है। इसे इस स्तर पर प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। याचिका में इस पूरे मामले की जांच के बाद जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
फॉर्म-6 को पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग
याचिका में फॉर्म-6 को उसके वैधानिक मूल स्वरूप में बहाल करने की भी मांग की गई है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है। निर्वाचन आयोग के मौजूदा नागरिक सेवा पोर्टल पर भी नए मतदाता पंजीकरण के लिए Form-6 उपलब्ध है।
याचिका में दावा किया गया है कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर भी चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों का हवाला
याचिका में हाल में सामने आई The Indian Express की रिपोर्ट को भी आधार बनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें मतदाता जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाता सूची के डेटा प्रबंधन, Form-6 तथा IT सिस्टम से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में कहा था कि निर्णय या आदेश उनकी जानकारी अथवा मंजूरी के बिना लिए गए। कुछ आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।
फॉर्म-6 और वोटर डेटा को लेकर क्या था विवाद?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि 16 मई 2026 को विवेक जोशी ने नए मतदाताओं के लिए Form-6 में बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा था कि सरकार की ओर से नियमों में बदलाव किए बिना फॉर्म में इस तरह परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। सुखबीर सिंह संधू ने भी बाद में इस पर सहमति जताई थी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 29 मई को विवेक जोशी ने मतदाता सूची के डेटाबेस को केंद्रीकृत किए जाने को लेकर सवाल उठाया और उसके ऑडिट की जरूरत बताई थी। अगस्त में भी Form-6 और IT सिस्टम की पहुंच से संबंधित आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने 23 सितंबर को आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव तथा आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष में SIR सहित उसके सभी निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। आयोग ने यह भी कहा कि उसके आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।
ECI ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्मों और मतदाता डेटा की सुरक्षा को लेकर भी कहा कि ECINET जैसी प्रणालियां सुरक्षा प्रोटोकॉल, IT सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण के तहत संचालित होती हैं।
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