SIR को लेकर बोले माले महासचिव- “2020 बिहार विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ वोट के अधिकार पर हमला”
पटना। गांधी जयंती के अवसर पर भाकपा-माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। पटना के गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने इंडिया गठबंधन के आह्वान पर आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ को संबोधित किया।
दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि देश में नागरिकों के मताधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला हो रहा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को भी निंदनीय बताया।
दिल्ली में 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। प्रदर्शन से जुड़े लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
गांधी जयंती पर सरकार पर निशाना
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, “गांधी के देश में गांधी जयंती के दिन वोट चोरों को बचाया जा रहा है और आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं तथा लोगों के वोट के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों का भी जिक्र किया। हाल में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों को लेकर रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने इन नोट्स के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए कहा था कि ये निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थे और आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
“ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें”
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि जिन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, उनके नाम वापस जोड़े जाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
SIR को लेकर उठे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह ऐसी याचिका पर सुनवाई करने वाला है, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और देशव्यापी SIR को चुनौती दी गई है।
2023 के कानून पर भी उठाए सवाल
दीपांकर भट्टाचार्य ने 2023 में बनाए गए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नए कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका बढ़ी है और चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों से जुड़े मामलों में कानूनी सुरक्षा दी गई है।
यहां 2023 के कानून का प्रावधान स्पष्ट है। धारा 16 के तहत CEC या चुनाव आयुक्त द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किए गए किसी कार्य, बात या कदम को लेकर उनके खिलाफ सिविल या आपराधिक कार्यवाही को अदालत में स्वीकार करने या जारी रखने पर रोक का प्रावधान है।
दीपांकर ने कहा कि ऐसी कानूनी सुरक्षा को समाप्त किया जाना चाहिए और चुनाव आयोग को स्वतंत्र तथा जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
“2020 और 2024 के चुनावों के बाद शुरू हुआ SIR का खेल”
दीपांकर भट्टाचार्य ने SIR को बिहार के 2020 विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव के राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि इन चुनावों के बाद मतदाता सूची और वोट के अधिकार को लेकर विवाद बढ़ा।
उन्होंने कहा कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA ने 243 में से 125 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिलीं और NDA ने गठबंधन के जरिए केंद्र में सरकार बनाई।
इन्हीं चुनावी नतीजों का संदर्भ देते हुए दीपांकर ने आरोप लगाया कि इसके बाद SIR के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव का सिलसिला शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि यह केवल मतदाता सूची का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार और मतदान के अधिकार से जुड़ा प्रश्न है।
हालांकि, SIR को 2020 या 2024 के चुनाव परिणामों का परिणाम बताना दीपांकर भट्टाचार्य का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध आधिकारिक/विश्वसनीय रिकॉर्ड के अनुसार बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जून 2025 में शुरू हुई थी।
“वोट का अधिकार आजादी के आंदोलन की बड़ी उपलब्धि”

दीपांकर भट्टाचार्य ने गांधी जयंती के मौके पर कहा कि महात्मा गांधी को याद करना केवल उन्हें श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि उनके विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन से हासिल लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेना भी है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के बाद देश को संविधान मिला और नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त हुए। हर वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज इसी अधिकार को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
“लड़ाई लंबी चलेगी”
माले महासचिव ने कहा कि वोट के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लंबी चलेगी।उन्होंने लोगों से संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि गांधी जयंती के दिन यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
कार्यक्रम में ये नेता रहे मौजूद
‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ के कार्यक्रम में भाकपा-माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के अलावा राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य मीना तिवारी, कॉमरेड अमर और विधान परिषद सदस्य शशि यादव सहित इंडिया गठबंधन से जुड़े विभिन्न दलों के नेता शामिल हुए।
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