नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को 2023 की जातीय हिंसा के पीड़ितों के लिए बनाए गए मणिपुर राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
राहत शिविरों में मौतों पर कोर्ट ने क्या पूछा?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मणिपुर राहत शिविरों में हुई मौतों से जुड़े आंकड़ों पर ध्यान दिया। कोर्ट के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार, आठ जिलों के राहत शिविरों में 640 मौतों का आंकड़ा सामने आया था। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में 608 मौतों का उल्लेख किया गया था। कोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि अप्राकृतिक मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार सिर्फ 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया था। बाद की प्रशासनिक जानकारी में 640 मौतों में से 34 को अप्राकृतिक बताया गया और 25 मामलों में आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से इन मौतों के कारण, पोस्टमार्टम और उठाए गए कदमों का पूरा ब्योरा मांगा है।
अप्राकृतिक मौतों पर FIR और जांच के निर्देश
कोर्ट ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को भी इस मामले को तुरंत देखने का निर्देश दिया है। उसे सभी अप्राकृतिक मौतों के मामलों में FIR दर्ज कराने, मौत के कारणों का सही तरीके से पता लगाने और पहले से दर्ज मामलों की जांच तेजी से कराने को कहा गया है।
कोर्ट ने मणिपुर राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा, सम्मान, चिकित्सा सुविधाओं और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
मुआवजे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह जानकारी भी रखी गई कि कुछ अप्राकृतिक मौतों के मामलों में मृतकों के परिवारों को 20 हजार से 30 हजार रुपये तक का मुआवजा दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस राशि पर भी सवाल उठाया और राज्य से स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट के सामने ऐसी जानकारी भी रखी गई थी जिसमें प्रभावित परिवारों के लिए अधिक मुआवजे का प्रावधान होने का उल्लेख था।
मणिपुर हिंसा के मामलों की जांच की स्थिति
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की जांच की स्थिति की जानकारी दी। अदालत को बताया गया कि आठ जिलों में 42 SIT बनाई गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि कई मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में मामले अभी जांच के स्तर पर हैं। CBI से जुड़े मामलों की स्थिति पर भी अदालत ने सुनवाई के दौरान जानकारी ली।

कैसे शुरू हुई थी मणिपुर में जातीय हिंसा?
मणिपुर में बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा 3 मई 2023 को भड़की थी। इससे पहले 19 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई/मीतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने के मामले पर विचार कर केंद्र सरकार को अपनी सिफारिश भेजने का निर्देश दिया था। इस फैसले का आदिवासी संगठनों ने विरोध किया था।
इसके बाद 3 मई को आयोजित आदिवासी एकजुटता रैली के दौरान हिंसा भड़क गई और देखते ही देखते राज्य के कई हिस्सों में मैतेई और कुकी-समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष फैल गया। बाद में मणिपुर हाईकोर्ट ने अपने अप्रैल 2023 के उस निर्देश से जुड़े विवादित हिस्से को वापस ले लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर भी लिया था स्वतः संज्ञान
जुलाई 2023 में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। 20 जुलाई 2023 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो को लेकर गहरी चिंता जताई और केंद्र तथा मणिपुर सरकार से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।
अब राहत शिविरों में हुई अप्राकृतिक मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ताजा कार्रवाई ने मणिपुर में विस्थापित लोगों की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और मौतों की जांच के सवाल को फिर से अदालत के केंद्र में ला दिया है।
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