वाराणसी। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की ऐतिहासिक जन्मस्थली लमही स्थित प्रेमचंद शोध संस्थान में एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी पर आधारित लघु फिल्म ‘पंच परमेश्वर’ का लोकार्पण हुआ. राज्य हिंदी संस्थान के सौजन्य से निर्मित इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सभी पात्रों का अभिनय केवल शिक्षकों द्वारा ही किया गया है।
उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में कक्षा 5 के पाठ्यक्रम में शामिल इस कहानी पर बनी फिल्म न केवल विद्यार्थियों के लिए पाठ्य-सामग्री की समझ को आसान बनाएगी, बल्कि अध्यापकों के लिए भी एक उत्कृष्ट टीएलएम (Teaching Learning Material) और शिक्षण सहायता के रूप में उपयोगी साबित होगी। फिल्म के सफल निर्माण और निर्देशन के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह एवं राज्य हिंदी संस्थान की निदेशक चंदना राम इकबाल यादव द्वारा पूरी टीम को सम्मानित किया गया.
इस अवसर पर डॉ. राम जनम सिंह द्वारा रचित नाटक पुस्तक “यशोधरा के प्रश्न” का गरिमामय वातावरण में लोकार्पण संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन वाराणसी मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह, राज्य हिंदी संस्थान वाराणसी की निदेशक चंदना राम इकबाल यादव, सहायक निदेशक अवधेश कुमार, शोध प्रवक्ता प्रदीप जायसवाल, प्रेमचंद शोध संस्थान के समन्वयक प्रो. नीरज खरे, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के डॉ. विवेक सिंह तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मीडिया पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. धनंजय चोपड़ा के कर-कमलों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

इस मौके पर डॉ. राम जनम सिंह ने कहा कि इस कलात्मक व शैक्षणिक यात्रा में कदम-कदम पर साथ देने वाले सभी सहयोगियों, कलाकारों और शुभचिंतकों का मैं हृदय से आभार व धन्यवाद प्रकट करता हूं।
मुंशी प्रेमचंद और ’21वीं सदी में हिंदी भाषा शिक्षण’ पर गंभीर मंथन
एक लघु फिल्म के प्रदर्शन से पूर्व मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान तथा राज्य हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक विचार-गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का मुख्य विषय ’21वीं सदी में हिंदी भाषा शिक्षण: प्रयोग और संभावनाएं’ रहा।
इसमें हिंदी शिक्षण में आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यमों और एआई (AI) आधारित शिक्षण पद्धतियों के प्रयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस मौके पर डॉ. धनंजय चोपड़ा (Course Coordinator,Centre of Media Studies, University of Allahabad) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए जोर दिया कि हिंदी दिवस को केवल एक दिन के औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरे वर्ष चलने वाले एक निरंतर उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक दौर में शिक्षा क्षेत्र के भीतर डिजिटल तकनीक को अपनाना समय की अनिवार्य मांग बन चुका है। विशिष्ट अतिथि व शोध संस्थान के समन्वयक प्रो. नीरज खरे ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद जी की भाषा शैली हिंदी के लोकतांत्रिक और जन-सामान्य स्वरूप का एक सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। इस गरिमामय समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, विद्वान, शिक्षक, शोधार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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