नई दिल्ली | FreelancerPost
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में कथित अभद्र व्यवहार और हंगामे के मामले में गिरफ्तार दो लॉ छात्रों को जमानत दे दी है। अदालत ने दोनों आरोपियों को ₹25-25 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने, प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहने और साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया है।
जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) रवि ने यह आदेश पारित किया।
किन छात्रों को मिली जमानत?
जिन दो आरोपियों को जमानत मिली है, उनमें प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान शामिल हैं।
- प्रबल प्रताप सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में एलएलबी तृतीय वर्ष के छात्र हैं।
- चंद्रभान एलएलबी द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।
दोनों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने तिलक मार्ग थाने में मामला दर्ज किया था।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया। शिकायत में 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक घटना का उल्लेख है।
उस दिन जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह से पूछा कि क्या वह स्वयं अपनी पैरवी करेंगे।
आरोप है कि इसके बाद प्रबल प्रताप सिंह ने अदालत से लखनऊ के एक एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने की बात कही। जब अदालत ने इस पर आपत्ति जताई, तो कथित रूप से उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और केस से संबंधित फाइल न्यायाधीशों की ओर फेंक दी।
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कोर्ट रूम से बाहर ले जाकर हिरासत में लिया। बाद में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई।
कोर्ट ने जमानत देते समय क्या शर्तें लगाईं?
पटियाला हाउस कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि—
- वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
- ट्रायल के दौरान प्रत्येक तारीख पर अदालत में उपस्थित रहेंगे।
- किसी भी गवाह को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास नहीं करेंगे।
- जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं करेंगे।
मामले की आगे की सुनवाई संबंधित अदालत में जारी रहेगी।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा। जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है।
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