नई दिल्ली। Supreme Court Protesters। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए SC ने कहा है कि दिल्ली सहित अन्य राज्य सरकारें छोटे आरोपों वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने या समाप्त करने पर विचार कर सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत के पहले के आदेश में ‘आपराधिक अतीत’ का आशय केवल उन लोगों से था जिन पर हत्या जैसे गंभीर और संगीन आरोप हैं।
अदालत ने कहा कि राजनीतिक या आंदोलन के दौरान दर्ज छोटे आपराधिक मामलों वाले प्रदर्शनकारियों को राहत देने का रास्ता खुला रहेगा।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर बनेगा प्रोटोकॉल
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि वह पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल तैयार करेगा। अदालत ने कहा कि यह तय किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में सुरक्षा बल पैलेट गन का प्रयोग कर सकते हैं, ताकि भविष्य में किसी तरह की अस्पष्टता न रहे।
सरकार ने वादा दोहराया
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में अपने पहले दिए गए आश्वासन पर कायम है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला नहीं था, उन्हें रिहा कर दिया गया है।
इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कई मामलों में पुलिस क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की बात कर रही है। जवाब में तुषार मेहता ने कहा कि एफआईआर को लेकर कुछ गलतफहमी हुई थी और सरकार समाधान निकालने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित रूप से लाठीचार्ज करने और बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने अदालत को बताया कि कई वीडियो फुटेज में पुलिसकर्मियों का व्यवहार स्पष्ट रूप से दिखाई देता है और उनकी पहचान भी हो चुकी है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी मांग की कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से यह पूछा जाए कि पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई।
28 जुलाई को दिया था अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए निर्देश दिया था कि नाबालिगों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया था कि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।
अदालत ने इस मामले में दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया था।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार, 20 जून से जंतर-मंतर पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून से आमरण अनशन शुरू किया था। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई जगहों पर पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस छोड़ी और बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गईं।
Background
यह मामला जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। वहीं सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है
FAQ
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
राज्य सरकारें छोटे आरोप वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर विचार कर सकती हैं।
पैलेट गन पर अदालत ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल और दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे।
किसे राहत नहीं मिलेगी?
जिन लोगों पर हत्या जैसे गंभीर और संगीन आपराधिक आरोप हैं, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।
ये भी पढ़े:-
हेट स्पीच मामले में वृंदा करात को सुप्रीम कोर्ट से झटका, पुनर्विचार याचिका खारिज
महिला पहलवान यौन उत्पीड़न केस में बृजभूषण शरण सिंह बरी, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सुनाया फैसला
SPECIAL REPORT: पैलेट गन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जंतर-मंतर से सिवान तक क्या है पूरा मामला?
