लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के उल्लंघन पर कोर्ट ने मांगा जवाब, चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ पर भी जताई चिंता
नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) के चुनाव के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी है। विजय जुलूस पर रोक दिल्ली की सड़कों के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर और हॉस्टल के अंदर भी लागू रहेगी। कोर्ट ने सभी छात्र संगठनों और उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर पूछा है कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और अदालत के पूर्व निर्देशों के उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ चुनावी क्षतिपूर्ति (electoral damages) क्यों न लगाई जाए।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब अदालत को बताया गया कि DUSU चुनाव के लिए मतदान जारी है और परिणाम अगले दिन घोषित किए जाने हैं। कोर्ट ने कहा कि परिणाम घोषित होने के बाद उम्मीदवारों, उनके समर्थकों, छात्रों या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से विजय जुलूस नहीं निकाला जाना चाहिए।
कोर्ट ने विजय जुलूस पर रोक की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को दी है। आदेश के उल्लंघन पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है
17 सितंबर को हिंसा के मामले पर हाईकोर्ट ने अपनाया था सख्त रुख
बता दें कि 17 सितंबर को हाईकोर्ट ने प्रचार के अंतिम दिन हुई हिंसा के मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि लोकतंत्र को आपराधिक समाज के रूप में तब्दील नहीं किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली यूनिवर्सिटी से सख्त लहजे में पूछा कि 16 सितंबर की घटना हुई और न आपने एफआईआर दर्ज किया और किसी की गिरफ्तारी की। कोर्ट ने कहा था कि एनफ इज एनफ। हम इस तरह के आपराधिक बर्ताव को सहन नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं हर साल के छात्र संघ के चुनाव में होती हैं।
याचिकाकर्ता ने 16 सितंबर की घटना को बताया था काला दिन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रशांत मनचंदा ने कहा था कि हाईकोर्ट ने 2025 में कुछ दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद 16 सितंबर को जमकर मारपीट, तोड़फोड़ हुई। गुंडा तत्वों ने पूरे नॉर्थ कैंपस पर कब्जा कर रखा था। जिसके बाद कुछ प्रोफेसर और छात्रों ने हाईकोर्ट आने को कहा। मनचंदा ने कहा कि 16 सितंबर का दिन डूसू चुनाव के लिए इतिहास का सबसे काला दिन था। कुछ लॉ स्टूडेंट को इसलिए पीटा गया क्योंकि वे फोटोग्राफ ले रहे थे। गुंडा तत्व यूनिवर्सिटी के बाहर के थे और उनके हाथों में लाठी थी। तब कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कहा कि आपको चुनाव रद्द करने या बाद में करने पर विचार करना होगा।
छात्र संगठन भी इस याचिका में पक्षकार हैं। जब नोटिस जारी होगा तभी वे पेश होंगे। कोर्ट ने कहा कि भले ही प्रशासन गैरजिम्मेदार हो, लेकिन छात्रों को जिम्मेदार होना चाहिए। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे कि आप शिक्षकों को पीटें और बंदूकें लहराएं। कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से कहा कि अगर आप स्थिति नहीं संभाल सकते तो हम चुनाव रद्द कर देंगे। चीफ जस्टिस ने कहा कि उनकी खुद की बेटी और भतीजी यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं। उनका क्या होगा। ये वाकया हर साल हो रहा है।
एएसजी चेतन शर्मा ने कोर्ट की चिंताओं से जताई सहमति
सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने हाईकोर्ट की चिंताओं से सहमति जताई। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को आदर्श आचार संहिता लागू हुई। 16 सितंबर की शाम 5 बजे के बाद कोई कैंपेन नहीं हुआ और यूनिवर्सिटी कैंपस पूरे तरीके से शांत है। तब कोर्ट ने कहा कि लेकिन उसके पहले जो हुआ उसका क्या। तब चेतन शर्मा ने कहा कि हम दोषियों पर कार्रवाई करेंगे। कोर्ट ने पूछा कि क्या वो आचार संहिता का उल्लंघन नहीं था। अगर वो आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे थे तो उसके क्या परिणाम होंगे।
16 सितंबर को हुई थी तोड़फोड़
बता दें कि 16 सितंबर को डूसू के चुनाव में दो छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जमकर तोड़फोड़ की थी। 16 सितंबर को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था। डूसू का चुनाव 18 सितंबर को होना है। बता दें कि 16 सितंबर को हाईकोर्ट ने इसी मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी राजनीतिक पार्टी के छात्र विंग का सदस्य होने के कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) चुनाव के उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
ये भी पढ़ें:-
₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर MDR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जानिए क्या बदलेगा
