नई दिल्ली। फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के एक दृश्य में ‘शूरवीर’ गाने के इस्तेमाल को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने फिल्म के निर्माताओं की ओर से पेश वकील से संबंधित दृश्य देखने और अगली सुनवाई में इस पर जवाब देने को कहा।
याचिका में फिल्म के क्लाइमैक्स में ‘शूरवीर’ गाने के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए इसे हटाने या इसकी जगह कोई दूसरा बैकग्राउंड म्यूजिक इस्तेमाल करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका प्रशांत कुमार सिंह ने दाखिल की है।
कोर्ट ने निर्माता के वकील से क्या कहा?
सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माता एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश अधिवक्ता जेके भारद्वाज से अदालत ने संबंधित दृश्य को देखने को कहा। रिपोर्टों के मुताबिक, चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने सवाल किया कि महाराणा प्रताप को समर्पित गाने को ऐसे दृश्य में इस्तेमाल किए जाने पर क्या उनका ‘ज़मीर संतुष्ट’ है।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या निर्माता के वकील ने फिल्म देखी है। सुनवाई में वकील ने बताया कि उन्होंने अभी फिल्म नहीं देखी थी। इसके बाद अदालत ने उन्हें फिल्म देखने और अगली सुनवाई में लौटने को कहा।
याचिका में मिर्जापुर: द मूवी ‘शूरवीर’ गाने को लेकर क्या आपत्ति?
याचिकाकर्ता प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि ‘शूरवीर’ गाना महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि के रूप में बनाया गया था और फिल्म में इसे गैंगस्टर एवं हिंसक दृश्यों की पृष्ठभूमि में इस्तेमाल किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि इस तरह का इस्तेमाल महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक विरासत को काल्पनिक आपराधिक किरदारों के साथ जोड़ने वाला हो सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि गाने के मूल सांस्कृतिक संदर्भ और फिल्म में उसके इस्तेमाल के बीच अंतर से ऐतिहासिक व्यक्तित्व की सार्वजनिक स्मृति में भ्रामक जुड़ाव पैदा हो सकता है। ये याचिकाकर्ता के तर्क हैं, जिन पर अदालत ने अभी अंतिम फैसला नहीं दिया है।
गाना हटाने के साथ क्या मांग की गई?
याचिका में अदालत से फिल्म के क्लाइमैक्स से ‘शूरवीर’ गाना हटाने या उसकी जगह दूसरा उपयुक्त बैकग्राउंड म्यूजिक इस्तेमाल करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा ऐतिहासिक या सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से जुड़े गीतों के फिल्मों में इस्तेमाल के लिए उचित दिशानिर्देश बनाने की मांग भी की गई है।
याचिका में कहा गया है कि ऐसे दिशानिर्देश बनाते समय कलात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हितों के बीच संतुलन रखा जाना चाहिए।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और CBFC का भी किया जिक्र
पिछली सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि उन्होंने इस शिकायत को पहले केंद्र सरकार के सामने क्यों नहीं उठाया। अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसे मामले में केंद्र सरकार और CBFC से संपर्क किया जा सकता है। कोर्ट ने इस स्तर पर याचिका के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि कलात्मक प्रस्तुति का आकलन करने के लिए संबंधित वैधानिक प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद अदालत ने फिल्म के निर्माताओं के वकील से संबंधित दृश्य देखने को कहा और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
क्या है ‘शूरवीर’ गाने का विवाद?
‘शूरवीर’ गाने को लेकर विवाद फिल्म में इसके इस्तेमाल के संदर्भ को लेकर है। याचिका के अनुसार यह गाना महाराणा प्रताप को समर्पित है, जबकि फिल्म में इसे अपराध और गैंगस्टर से जुड़े दृश्य के साथ इस्तेमाल किया गया है। इसी संदर्भ को लेकर याचिकाकर्ता ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।
हालांकि, गाने के कॉपीराइट या लाइसेंस को लेकर अलग विवाद सामने आया था, जिस पर Trouper Records ने स्पष्ट किया था कि गाना एक्सेल एंटरटेनमेंट को फिल्म में इस्तेमाल के लिए आधिकारिक रूप से लाइसेंस किया गया था। इसलिए मौजूदा याचिका का मुख्य मुद्दा कॉपीराइट नहीं, बल्कि गाने के कथित सांस्कृतिक संदर्भ और फिल्म में उसके इस्तेमाल से जुड़ा है।
आगे क्या होगा?
अब मामले में अदालत के समक्ष फिल्म के संबंधित दृश्य और निर्माताओं की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर आगे सुनवाई होगी। फिलहाल अदालत ने गाना हटाने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
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