मुंगेर। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब मुंगेर के प्रसिद्ध मां चंडिका स्थान पर भी दिखाई दे रहा है। करीब एक सप्ताह से मंदिर परिसर में जलजमाव के कारण श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच गया है और लंबे समय से जमा पानी से दुर्गंध आने की शिकायत श्रद्धालुओं ने की है।
देश के प्रमुख शक्तिपीठों में महत्वपूर्ण माने जाने वाले चंडिका स्थान में जलजमाव के कारण श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर लंबे समय से पानी जमा रहने के बावजूद जल निकासी और साफ-सफाई को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से समस्या गंभीर होती जा रही है।
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गर्भगृह तक पहुंचा पानी, पूजा-अर्चना में हो रही परेशानी
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण चंडिका स्थान के निचले हिस्से में पानी जमा हुआ है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच गया है, जिसके कारण सामान्य तरीके से पूजा-अर्चना करना मुश्किल हो गया है।
हालिया रिपोर्टों में भी चंडिका स्थान के गर्भगृह में गंगा का पानी प्रवेश करने की पुष्टि हुई थी। 22 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय गंगा का जलस्तर मुंगेर में 38.23 मीटर तक पहुंच गया था और मंदिर के गर्भगृह तक पानी पहुंचने से श्रद्धालुओं और पुजारियों को परेशानी हो रही थी।
लंबे समय से जमा पानी से आने लगी दुर्गंध
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण अब उसमें से दुर्गंध आने लगी है। उनका कहना है कि गंदे और दुर्गंधयुक्त पानी के बीच पूजा-अर्चना करना श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
श्रद्धालुओं ने जलजमाव वाले क्षेत्र की तत्काल सफाई और पानी की निकासी की मांग की है, ताकि मंदिर परिसर में स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण बनाया जा सके।
प्राचीन कुएं में भी गंदगी, सफाई की मांग
चंडिका स्थान परिसर में मौजूद एक प्राचीन कुएं की स्थिति को लेकर भी स्थानीय श्रद्धालुओं ने चिंता जताई है। उनके अनुसार, कुएं में खाली बोतलें, कचरा और अन्य गंदगी जमा है, जिसके कारण आसपास बदबू फैल रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में जलजमाव के साथ यदि कचरा और गंदा पानी भी जमा रहे तो साफ-सफाई की समस्या और गंभीर हो सकती है। इसलिए मंदिर परिसर के कुएं की भी तत्काल सफाई कराने की जरूरत है।

ब्लीचिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव की मांग
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम प्रशासन से जलजमाव वाले इलाके में ब्लीचिंग पाउडर और मच्छर नियंत्रण के लिए आवश्यक छिड़काव कराने की मांग की है। मुंगेर में बाढ़ और जलजमाव के बाद मच्छरजनित बीमारियों को लेकर पहले भी चिंता सामने आती रही है।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की
मां चंडिका स्थान में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर से जल्द से जल्द पानी हटाने, गंदगी की सफाई कराने और आवश्यक कीटनाशक/एंटी-लार्वा उपाय करने की मांग की है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले इस मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में लंबे समय तक जलजमाव बना रहना श्रद्धालुओं के साथ-साथ मंदिर से जुड़े दुकानदारों और स्थानीय लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है।
उन्होंने मुंगेर के जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पणिकर से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जल निकासी और सफाई की व्यवस्था कराने की मांग की है।
हर साल बाढ़ के दौरान सामने आती है जलजमाव की समस्या
चंडिका स्थान में गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ जलजमाव की समस्या नई नहीं है। पिछले वर्षों में भी बाढ़ के दौरान मंदिर के गर्भगृह में पानी पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
सितंबर 2024 में भी गंगा का पानी चंडिका स्थान में प्रवेश कर गया था। उस समय मंदिर परिसर में करीब 5.5 फीट तक पानी भरने और सुरक्षा के मद्देनजर श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
2025 में भी चंडिका स्थान के जलमग्न होने और गर्भगृह में कई फीट पानी जमा होने के कारण मंदिर का मुख्य द्वार बंद किए जाने की खबर सामने आई थी।
इससे यह सवाल भी उठता है कि हर साल बाढ़ के दौरान पैदा होने वाली इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कोई प्रभावी जल निकासी व्यवस्था बनाई जा सकती है?
स्थायी समाधान की जरूरत
श्रद्धालुओं की मांग केवल मौजूदा जलजमाव हटाने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि चंडिका स्थान में बार-बार बाढ़ का पानी पहुंचने की समस्या का स्थायी समाधान खोजा जाना चाहिए।
मंदिर परिसर की जल निकासी व्यवस्था, आसपास के नालों की सफाई, बाढ़ के पानी की रोकथाम, कचरा प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए नियमित व्यवस्था बनाई जाए तो हर साल श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानी को कम किया जा सकता है।
फिलहाल श्रद्धालुओं की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि इस बार मंदिर परिसर से पानी कब निकलेगा और सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा।
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