33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को ‘Logical Discrepancy’ और ‘Unmapped’ के आधार पर नोटिस; कोर्ट ने मांगी विस्तृत जानकारी, CJI ने कहा- नोटिस का आधार स्पष्ट होना चाहिए
नई दिल्ली। दिल्ली में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के दौरान ‘Logical Discrepancy’ के आधार पर जारी किए जा रहे नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर ऐसा प्रतीत होता है कि ये किसी मशीन के जरिए जारी किए गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि जिन मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं, उनके मामलों की विस्तृत जानकारी और नोटिस जारी करने का वास्तविक आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस जारी करने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
CJI ने दिया अपना उदाहरण
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को समझाते हुए अपना उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति 2019 में चंडीगढ़ से दिल्ली आ गया और अब दिल्ली में वोट डाल रहा है, तो केवल इसे ‘Logical Discrepancy’ बताकर नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा।
CJI ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में नोटिस में यह स्पष्ट होना चाहिए कि विसंगति किस रिकॉर्ड या तथ्य के आधार पर मानी गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में Booth Level Officer (BLO) को संवेदनशील और पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस
याचिका पर पहले हुई मेंशनिंग के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया था कि दिल्ली SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं और इसके अलावा लगभग 33.13 लाख मतदाताओं को ‘Logical Discrepancy’ या ‘Unmapped’ श्रेणी के आधार पर नोटिस दिए गए हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 31 अगस्त को जारी दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.56 लाख नाम पिछली सूची की तुलना में शामिल नहीं थे। वहीं 33.13 लाख मतदाताओं को अलग से विसंगति या पुराने SIR रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने के आधार पर चिन्हित किया गया। इनमें करीब 19.33 लाख ‘Logical Discrepancy’ और 13.79 लाख ‘No Mapping’ श्रेणी में बताए गए हैं।
प्रशांत भूषण ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
17 सितंबर को मामले की मेंशनिंग के दौरान प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें किस खास आधार पर ‘Logical Discrepancy’ की श्रेणी में रखा गया है।
भूषण ने कहा था कि कई नोटिसों में मतदाता को केवल सामान्य श्रेणी बताई जा रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि उसके रिकॉर्ड में वास्तविक विसंगति क्या है और किस दस्तावेज या पुराने रिकॉर्ड के आधार पर उसे नोटिस दिया गया है।
उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में मतदाता के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि उसे किस बात का जवाब देना है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की ओर से दायर याचिका में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने और ‘Logical Discrepancy’ निर्धारित करने के मानदंड और प्रक्रिया का खुलासा करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि नोटिस में व्यक्तिगत मामले की वास्तविक विसंगति नहीं बताई जाती, तो मतदाता प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखने में कठिनाई महसूस कर सकता है।
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ कर रही है।
आगे क्या?
दिल्ली SIR की प्रक्रिया में ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक 30 सितंबर 2026 तक दावे दाखिल किए जा सकते हैं, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।
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