मोटर व्हीकल रूल्स के Rule 167 में संशोधन का विरोध; ट्रैफिक चालान के निपटारे के लिए SDM और अधिकारियों की नियुक्ति पर बार एसोसिएशंस नाराज
नई दिल्ली। मोटर व्हीकल रूल 167 में संशोधन के विरोध में दिल्ली की निचली अदालतों में सोमवार को वकीलों ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। वकीलों के अदालतों में न्यायिक कार्य से अलग रहने के कारण अधिकांश मामलों में पक्षकारों को अगली तारीख मिली। इस बीच Coordination Committee of All District Court Bar Associations of Delhi ने 24 सितंबर को दिल्ली के उपराज्यपाल के घेराव का ऐलान किया है।
बार एसोसिएशंस का कहना है कि मोटर व्हीकल रूल्स में किए गए संशोधन से ट्रैफिक चालान के निपटारे की मौजूदा न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी। समिति ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली सरकार के संबंधित मंत्री और कानून मंत्री के सामने भी अपनी आपत्तियां रखी थीं।
मोटर व्हीकल रूल 167 में संशोधन का वकील क्यों कर रहे विरोध?
वकीलों के मुताबिक, संशोधन के बाद ट्रैफिक चालानों की सुनवाई के लिए SDM, Executive Magistrate और विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इससे पहले ट्रैफिक चालानों से जुड़े मामलों की सुनवाई अदालतों में मजिस्ट्रेट करते थे।
नए प्रावधान के मुताबिक, किसी व्यक्ति के खिलाफ ट्रैफिक चालान जारी होने के बाद उसे या तो चालान की राशि जमा करनी होगी या 45 दिनों के भीतर दिल्ली सरकार की ओर से निर्धारित अधिकारी के सामने चालान को चुनौती देनी होगी।
बार एसोसिएशंस का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति 45 दिनों के भीतर चालान का विरोध नहीं करता है तो उसे चालान स्वीकार करने वाला माना जाएगा।
अधिकारी के फैसले के बाद कोर्ट जाने के लिए भी जमा करनी होगी राशि
वकीलों के मुताबिक, संशोधन में यह भी प्रावधान है कि यदि दिल्ली सरकार की ओर से नियुक्त अधिकारी चालान के खिलाफ दायर आपत्ति को खारिज कर देता है तो संबंधित व्यक्ति अदालत का रुख तभी कर सकता है, जब वह चालान की राशि का 50 प्रतिशत दिल्ली सरकार के पास जमा करे।
इसी प्रावधान को लेकर वकीलों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे चालान के खिलाफ न्यायिक उपाय हासिल करने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
27 अगस्त और 7 सितंबर को हुई थी बैठक
Coordination Committee के मुताबिक, समिति ने इस मुद्दे पर 27 अगस्त को संबंधित मंत्री के सामने अपनी आपत्तियां रखी थीं। इसके बाद 7 सितंबर को दिल्ली सरकार के कानून मंत्री के साथ भी बैठक हुई।
समिति का कहना है कि इन बैठकों के दौरान उसे आश्वासन दिया गया था कि दिल्ली सरकार ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए SDM या अन्य अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव पर अमल नहीं करेगी।
हालांकि, इसके बाद मीडिया रिपोर्टों में दिल्ली सरकार की ओर से ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए अधिकारियों की नियुक्ति किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद बार एसोसिएशंस ने न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का फैसला किया।
सुबह से ही वकीलों से कोर्ट नहीं जाने की अपील
सोमवार को दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों में बार एसोसिएशंस के पदाधिकारी और नेता सुबह से ही वकीलों से न्यायिक कार्यों में शामिल नहीं होने की अपील करते रहे।
Coordination Committee के महासचिव नरवीर डबास ने कड़कड़डूमा कोर्ट में मोर्चा संभाला। समिति की ओर से Rule 167 में संशोधन वापस लेने और ट्रैफिक चालानों की सुनवाई से जुड़े नए प्रावधानों पर सरकार से पुनर्विचार की मांग की जा रही है।
24 सितंबर को उपराज्यपाल के घेराव का ऐलान
न्यायिक कार्यों के बहिष्कार के बाद भी सरकार की ओर से संशोधन वापस लेने को लेकर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने का दावा करते हुए Coordination Committee ने 24 सितंबर को दिल्ली के उपराज्यपाल के घेराव का ऐलान किया है।
अब बार एसोसिएशंस की अगली रणनीति 24 सितंबर के कार्यक्रम के बाद तय होगी। इस मुद्दे पर सरकार और दिल्ली के जिला अदालतों के वकीलों के बीच टकराव आगे बढ़ने की स्थिति में इसका असर ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों की सुनवाई पर भी पड़ सकता है।
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